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“Money Laundering” क्या है और कैसे की जाती है ?  जानें इससे जुड़ी सभी बातें

Money Laundering-

मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) शब्द को आपने अकसर पढ़ा और सुना होगा। ख़बरों में ये शब्द समय-समय पर चर्चा का विषय बनता रहता है। देश में कई नेता, उद्योगपति समते बड़े-बड़े लोग मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) से जुड़े मामले में गिरफ्तार किए जाते रहे हैं। हालही में आम आदमी पार्टी के कैबिनेट मिनिस्टर सत्येंद्र जैन को दिल्ली से गिरफ्तार कर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल भेजा गया है। आइये आपको मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी हर ज़रूरी बात को बताते हैं।

Money Laundering क्या है ?

मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) शब्द अमेरिकन माफ़ियाओं के ग्रुप्स से निकला है। 80 के दशक में अमेरिका (America) मनी लॉन्ड्रिंग का हब बन गया था। अमेरिकी सरकार के लिय मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के मामले बड़ी चिंता का सबब बन गए थे। लेकिन धीरे-धीरे इसका जाल दुनिया के अन्य देशों में फैल गया। आज भारत उनमें से एक है। जहां मनी लॉन्ड्रिंग का जाल दिन-प्रतिदिन फैलता जा रहा है।

ग़लत तरीक़े से कमाए गए धन को मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) की मदद से एक नंबर का पैसा दिखाने के लिय इसका इस्तेमाल किया जाता है। आसान भाषा में जिसको हम काला धन कहते हैं। उस पैसै को मनी लॉन्ड्रिंग के ज़रिए सरकार और आयकर विभाग की नज़रों से बचाकर रखा जाता है। इसके साथ ही इन पैसों को ऐसी जगह निवेश किया जाता है। जिसका पता देश की जांच एजेंसियां आसानी से नहीं लगा पाती हैं।

यूं समझे कि अवैध तरीक़े से कमाई गई मोटी रक़म मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) की मदद से सफेद पैसे के रूप में उसके असल मालिक के पास वापस आ जाती है। भारत में मनी लॉन्ड्रिंग को ‘हवाला’ के रूप में में जाना जाता है। राजनीति की दुनिया में इसका इस्तेमाल अधिक देखने को मिलता है। आज भी भारत में हवाला का नेटवर्क फैला हुआ है। चुनाव में हवाला के ज़रिए पैसे के लेन-देन सबसे अधिक देखा गया है। 90 के दशक में भारत में कई बड़े नेताओं के नाम हवाला से जुड़े थे।

क्यों की जाती है Money Laundering?

भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) का कारोबार फैला हुआ है। दुनियाभर में इस धंधे में कई गिरोह आज भी सक्रिय हैं। जिनका मुख्य कार्य ग़लत तरीक़े से कमाए गए पैसे,टैक्स चोरी, फ़र्ज़ी निवेश, ब्लैक मनी या अन्य किसी तरह से जमा किए गए अवैध पैसों को एक देश से दूसरे ले जाकर ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से उसी पैसे को वापस फिर उसी देश मे लाने का काम करते हैं। जहां यह पैसा वैध रूप में बनकर उसके मालिक के पास पहुंच जाता है।

भारत में मुख्यता हवाल की मदद से टैक्स चोरी के पैसे को सफेद बनाना, बड़े-बड़े कारोबार में निवेश करना या पैसे का ऐसी जगह इस्तेमाल कर देना जहां जांच एजेंसियां पैसे का असल सोर्स पता न लगा सकें। ऐसा इस लिय होता है कि क्योंकि ग़लत तरीकों से कमाए गए पैसों का स्रोत बताना बड़ा मुश्किल होता है। सरकार की नज़र और जांच एजेंसियों से काला पैसा बचाने के लिय ही मुख्य तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) का सहारा लिया जाता है।

अरबों रूपये की मनी लॉन्ड्रिंग कैसे होती है ?

  • यह कोई आसान काम नहीं होता है। क्योंकि सारा काला पैसा कैश के रूप में मौजूद होता है। किसी ख़ुफिया जगह पर इस पैसे को रखा जाता है। जहां किसी को भी इसकी भनक न लगे।
  • फ़िर काला धन जमा करने वाले हवाला के कारोबार से जुड़े गिरोह से संपर्क करता है। फ़िर इस कारोबार से जुड़े गिरोह फर्ज़ी कंपनियां बनाकर पैसा उन देशों में भेजते हैं जहां टैक्स से जुड़े नियम बेहद आसान हों।
  • फ़िर वही काला पैसा वापस देश में निवेश की शक्ल में भेजा जाता है। ऐसा करके वहीं पैसा फिर से भारत में निवेश के तौर वापिस लाया जाता है।
  • गिरोह के लोग बेहद शातिर होते हैं। एजेंट इन पैसों को इस प्रकार से दर्शाते हैं कि जिससे कि जांच एजेंसियों को उनके सोर्स का पता नहीं ना चल सके।
  • भारत में सबसे अधिक चुनाव के समय हवाला की मदद से काले पैसा का इस्तेमाल अधिक देखा जाता है। करोड़ों-अरबों रूपये का कैश कई बार तो गाड़ियों में पकड़ा जाता है।

भारत में मनी लॉन्ड्रिंग के लिए सज़ा

मनी लॉन्ड्रिंग के क़ानूनों के तहत अगर किसी व्यक्ति को इसमें दोषी पाया जाता है। तब ऐसे में जितना भी पैसा उसके पास से मिला है। सबको जांच एजेंसियों द्वारा ज़ब्त कर लिया जाता है। इसके साथ ही इन पैसों की मदद से खड़े किए गए कारोबार-संपत्तियों को कुर्क किया जा सकता है या सरकार उनपर क़ब्ज़ाक करके नीलाम भी कर सकती है। दोषी पाए गए व्यक्ति को सज़ा हो सकती है।

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