दुनिया के सबसे प्रदूषित इन शहरों को लॉक डाउन ने बना दिया स्वच्छ…

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ग्राउंड रिपोर्ट, ललित कुमार सिंह:
कोरोनावायरस के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए हर जगह लॉकडाउन लागू है. मानव गतिविधि में एक ठहराव की वजह से दुनिया भर के शहर स्वच्छ हवा में सांस ले रहे हैं. ऐसा ठहराव पिछली कई सदियों में देखने को नहीं मिला था. 2019 विश्व रैंकिंग के अनुसार, भारत में दुनिया के दो-तिहाई सबसे प्रदूषित शहर हैं. यानी सबसे प्रदूषित 30 शहरों में से 21, सबसे प्रदूषित 20 शहरों में से 14 और सबसे प्रदूषित 10 शहरों में 6 शहर भारत में हैं.

एयर क्वालिटी इंडेक्स(Air Quality Index) स्केल के अनुसार, जैसा कि यूएस-ईपीए(US-EPA) 2016 द्वारा परिभाषित किया गया है, 0 से 50 के बीच AQI को “अच्छा” माना जाता है जबकि 51-100 के बीच “मध्यम” और 101-150 के बीच के AQI को “संवेदनशील समूहों के लिए अस्वस्थ” माना गया है. यदि AQI 151-200 के बीच और 201-300 के बीच है तो उस AQI को “बहुत अस्वस्थ” का दर्जा दिया गया है. जबकि AQI को 300 से ऊपर पाए जाने पर “खतरनाक” माना जाता है.

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लॉक डाउन लागू होने के बाद, कैसे दुनियाभर के पांच सबसे प्रदूषित शहरों में सुधरा AQI…

गाजियाबाद, भारत

साल 2019 में 110.2 की औसत AQI के साथ गाजियाबाद दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर की सूची में सबसे ऊपर था. जबकि मार्च में इसकी AQI का औसत 89.3 था. निर्माण पर प्रतिबंध लगने के बाद, साल 2020 में शहर की वायु में एक महत्वपूर्ण सुधार देखा गया. ये सुधार इसलिए भी आया क्योंकि कोरोना वायरस के चलते लोगों ने घर में रहना ही सही समझा.

10 मार्च से 8 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार, शहर में हवा 27 मार्च को “मध्यम” हो गयी. पूरे महीने में, सबसे साफ़ हवा 19 मार्च को थी तब हवा की गुणवत्ता में 177 तक गिरावट देखी गई थी. 22 मार्च को, जब जनता कर्फ्यू की घोषणा की गई, हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ. 23 मार्च को 21 दिन के लॉक डाउन की घोषणा के एक दिन बाद प्रदूषण का स्तर काफी गिर गया, जिससे AQI लगातार 27 दिनों से लेकर 3 अप्रैल तक लगातार आठ दिनों तक “मध्यम” श्रेणी में रही.

हालांकि, 5 अप्रैल को पूरी स्थति पलट गयी. जिसमें AQI लॉकडाउन से पहले जैसे यानी 158 हो गयी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिये जलाने वाली अपील लोगो ने पटाखे भी साथ में जला डाले. हालांकि पीएम मोदी ने “कोरोनावायरस के अंधेरे से लड़ने के लिए” रात 9 बजे मोमबत्ती और दिये जलाने को ही कहा था. लेकिन फिर 7 अप्रैल को, AQI 83 पर आ गया.

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होटन, चीन

चीन पिछले कई सालों से पर्यावरण के नियमों को लागू करने और प्रदूषणकारी उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संघर्ष कर रहा है. लेकिन फिर भी कुछ शहर बेहद प्रदूषित बने हुए हैं. इसमें होटन भी शामिल है. गाजियाबाद से बहुत पीछे नहीं, होटन का वर्ष 2019 में AQI 110.1 था, जो दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर था.

चीन, कोरोनवायरस से प्रभावित होने वाला पहला राष्ट्र होने के बाद भी लॉकडाउन को सबसे पहले लागू करने वाला पहला देश है. जिसकी वजह से शहर ने कोरोना वायरस के मामले और स्वच्छ हवा में सुधार देखा. आंकड़ों के मुताबिक़, 10 मार्च और 8 अप्रैल के बीच, हॉटन ने 11 मार्च को AQI को 1700 पार कर दिया था. हवा में सुधार होने के बावजूद, AQI 14 से 25 मार्च के बीच 152 और 273 के बीच रहा.

गुजरांवाला, पाकिस्तान

पाकिस्तान में 4000 से अधिक कोरोना वायरस के मामले और 60 लोगो की मौत के बाद भी अभी तक “पूर्ण” लॉकडाउन लागू नहीं हुआ है. हालांकि, देश महामारी से निपटने के लिए प्रयास कर रहा है. प्रधानमंत्री इमरान खान ने लोगों को सेल्फ आइसोलेशन पर सरकार द्वारा दिए दिशानिर्देशों का पालन करने की चेतावनी दी.

गुजरांवाला में अब तक कोरोनोवायरस के कुल 2000 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं. यह जिला अपने उच्च प्रदूषण स्तर के लिए भी कुख्यात है. गुजरांवाला और फैसलाबाद, दोनों विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में तीसरे और चौथे स्थान पर हैं. जबकि शहर का 2019 का औसत AQI 105.3 था, मार्च के आंकड़े इसकी वायु में एक वृद्धिशील सुधार दिखाते है।

10 मार्च से, शहर ने मध्यम या अच्छे स्तर पर स्वच्छ हवा दर्ज की है, जबकी उससे पिछले सात दिन यह “अस्वस्थ” श्रेणी में था. यहाँ 24 मार्च से हवा लगातार “मध्यम” बनी हुई है, क्योंकि देश में लॉकडाउन है, केवल आवश्यक सेवाओं को संचालित करने की अनुमति है.

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फैसलाबाद, पाकिस्तान

पाकिस्तान के फैसलाबाद में बुधवार को 72 AQI के साथ हवा में सुधार देखा गया. साल 2019 में शहर का औसत AQI 104.6 रहा. देश और बाकी दुनिया के साथ ये शहर भी कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन में है और यहाँ पर लोग सेल्फ आइसोलेशन भी कर रहे हैं. फैसलाबाद में भी लॉक डाउन के चलते वायु में काफी सुधार देखा गया.

दिल्ली, भारत

लॉक डाउन लागू होने के बाद दिल्ली और एनसीआर में उद्योगों, निजी वाहनों और सार्वजनिक परिवहन को बंद कर दिया गया. जबसे दिल्ली में हवा की गुणवत्ता मापनी शुरू हुई थी, तबसे पहली बार मार्च 2020 में दिल्ली सबसे कम प्रदूषित थी. 2019 में दिल्ली का AQI 98.6 था, जो 2019 वर्ष में दुनिया का पांचवा सबसे प्रदूषित शहर बना.

राजधानी के वायु गुणवत्ता रविवार शाम को गिर गई, जब कई लोगो ने पीएम मोदी की दिये और मोमबत्ती जलाने की अपील में पटाखे जला डाले. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के छह निगरानी स्टेशनों के डेटा में रात के 9 बजे के बाद अचानक पीएम 2.5 और पीएम 10 में वृद्धि दिखाई दी. दिल्ली के पर्यावरण विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “ये वृद्धि पटाखों के कारण थी, क्योंकि इस समय प्रदूषण का कोई अन्य स्रोत नहीं है।”