Home » HOME » भारत में कोरोना के कम मामले आने का क्या है कारण ? पढ़िए…

भारत में कोरोना के कम मामले आने का क्या है कारण ? पढ़िए…

Sharing is Important

ग्राउंड रिपोर्ट, ललित कुमार सिंह:
भारत में कोरोना वायरस(Corona Virus) से मरने वाले लोगों की संख्या आज 166 पहुंच गयी, जिनमें 17 लोगों की मौत पिछले 24 घंटे में हुई हैं. वहीँ कुल 5,734 लोग अब तक संक्रमित पाए गए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) के अनुसार, 5,095 लोग अभी भी संक्रमित हैं, जबकि 472 लोग पूरी तरह ठीक हो चुके हैं. भारत में अन्य देशों के मुकाबले मामले और मौत दोनों कम हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार इन आंकड़ों पीछे कुछ बड़ी वजह रही हैं…

आबादी के हिसाब से कम टेस्ट

130 करोड़ आबादी वाले देश भारत में अभी तक सिर्फ 85 हजार लोगों का ही कोरोनावायरस टेस्ट हुआ है. यानी एक लाख की आबादी पर सिर्फ 6.5 लोगों का ही टेस्ट हो रहा है. जो बेहद कम है. 6 अप्रैल तक भारत में लगभग 85 हजार टेस्ट हुए हैं. वहीँ कई राज्यों में अब भी रोजाना केवल 250 से 500 तक टेस्ट ही किये जा रहे हैं, जिसमें एक व्यक्ति के ही कई टेस्ट होते हैं. ये एक बड़ी वजह है कि भारत में अब तक कोरोना के केस कम आए हैं.

दुनिया के अन्य देशों की बात करें तो दक्षिण कोरिया की कुल आबादी 5.1 करोड़ है, जिनमें से 2.5 लाख से अधिक टेस्ट किये जा चुके हैं. बहरीन में 20075, इटली में 8385, ऑस्ट्रिया में 6203, ब्रिटेन में 2109, अमेरिका में 447, वहीं जापान में 257 लोगों के कोरोना टेस्ट किये गए हैं. और चीन में मार्च के अंत तक 3.20 लाख लोगों के टेस्ट किये.

यह भी पढ़ें: दुनिया के सबसे प्रदूषित इन शहरों को लॉक डाउन ने बना दिया स्वच्छ…

जल्दी लॉक डाउन लागू

पूरे देश में लॉक डाउन दूसरी स्टेज में लागू करना एक बड़ी वजह है. इस कारण कोरोना एक महीने से दूसरी स्टेज में ही है. इसीलिए अभी रोजाना लगभग 500 केस ही सामने आ रहे हैं. डब्ल्यूएएचओ का कहना है कि भारत सरकार ने लॉकडाउन को सही समय पर लागू किया है. चीन, अमेरिका ओर यूरोपीयन देशों के तुलना में भारत में कोरोनावायरस के मामले काफी काम रफ़्तार में हैं.

READ:  Discrimination against Muslims, Dalits and Adivasis in Healthcare

22 मार्च को प्रधानमंत्री ने देशवासियों से “जनता कर्फ्यू” का पालन करने की अपील की थी, तब देश में 374 मामले थे. उसके अगले हफ्ते में करीब 820 मामले सामने आये, यानी एक दिन में 100 मामले. 31 मार्च तक कुल 1635 मामले थे. 6 अप्रैल को यही संख्या बढ़कर 4778 के करीबी पहुंच गई. मतलब 6 दिन में 3145 केस आए. अभी की स्थिति में देश में अब एक दिन में 500 से ज्यादा कोरोना केस आ रहे हैं.

स्वास्थ्य एक्सपर्ट्स का मानना है, भारत में कोरोनावायरस एक महीने से दूसरी स्टेज में ही है. अभी ये तीसरी स्टेज में नहीं आया है, जिसे कम्युनिटी ट्रांसमिशन का फेज भी कहा जाता है.

यह भी पढ़ें: Corona: बढ़ सकता है लॉक डाउन? पीएम मोदी ने दिए संकेत

72 सालों से बीसीजी टीके का इस्तेमाल

भारत समेत दुनिया के जिन देशों में लंबे समय से बीसीजी का टीका लग रहा, वहां लोगों में कोरोनावायरस का खतरा कम है. भारत में 72 साल से बीसीजी के जिस टीके का इस्तेमाल हो रहा है, उसे दुनिया अब कोरोना से लड़ने में मददगार मान रही है. भारत में बचपन में दी जाने वाली ट्यूबरकुलोसिस (टीबी या तपेदिक) से बचाव की वैक्‍सीन कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में उम्‍मीद की नई किरण बनकर सामने आई है.

BCG वैक्सीन के बारे में और जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

READ:  अभिव्यक्ति की आज़ादी पर मंड़राते ख़तरे को पहचानना ज़रूरी…!

एक नई रिपोर्ट में पता चला है कि जिन लोगों को BCG वैक्‍सीन दी गई है, उनमें मृत्‍य दर यह वैक्‍सीन न लेने वाले लोगों की तुलना में काफी कम है. न्यूयॉर्क इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेस की स्टडी के मुताबिक, अमेरिका और इटली जैसे जिन देशों में बीसीजी वैक्सीनेशन की पॉलिसी नहीं है, वहां कोरोना के मामले भी ज्यादा सामने आ रहे हैं और मौतें भी ज्यादा हो रही हैं. वहीं, जापान और ब्राजील जैसे देशों में इटली और अमेरिका के मुकाबले मौतें फिलहाल कम हैं.

बीसीजी का पूरा नाम है, बेसिलस कामेट गुएरिन (Bacille Calmette- Guerin) का टीका भारत में जन्म के तुरंत बाद छह महीने के बीच लगाया जाता है. इस वैक्सीन का अविष्कार लगभग 100 साल पहले किया गया था. यह टीबी और सांस से जुड़ी बीमारियों को राेकने वाला टीका है. मेडिकल साइंस की नजर में बीसीजी का वैक्सीन बैक्टीरिया से मुकाबले के लिए रोग प्रतिरोधक शक्ति देता है। इससे शरीर को इम्यूनिटी मिलती है, जिससे वह रोगाणुओं का हमला झेल पाता है.