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GD Agrawal

पत्र: न उंगली काँपी, न सरकार का दिल पसीजा, आशा है मां गंगा भगीरथ को आँँचल में भर लेंंगी

आपको लाज नहीं आयी इस नपुंसक समाज को कहते हुए की गंगा मैया को बचा लो, सोये हुए सिस्टम से गुहार लगाते जो आमरण को मरण में तब्दील करने लगा, आपको जरा भी नहीं लगा कि प्रोफेसर की हैसियत क्या होती है।