LITERATURE

अंबवा की छांव संतोष जैन संतु

संतोष जैन ‘संतु’ द्वारा रचित ‘अंबवा की छांव’ हर हाल में चलना सिखाती है

संतोष जैन ‘संतु’ मध्यप्रदेश के सीहोर शहर के जाने-माने कवियों में से एक हैं। सीहोर जिले की आष्टा तहसील में आने वाले रोलागांव में एक किसान घर में उनका जन्म हुआ। नौकरी के लिए उन्हें अपना गांव छोड़ शहर आना पड़ा लेकिन अपनी रचनाओं और कविताओं में उन्होंने अपने गांव और संस्कृति को ज़िंदा रखा। …

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अल्हड़ बीकानेरी की कविताएं

अल्हड़ बीकानेरी जिन्होंने कभी बीकानेर नहीं देखा

अल्हड़ बीकानेरी का जन्म 17 मई, 1937 को हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बीकानेर गांव में हुआ था। उनके नाम में लगे बीकानेर से लोग उन्हें राजस्थानी समझ बैठते थे लेकिन उनकी एक कविता में वो कहत हैं कि कैसा क्रूर भाग्य का चक्कर, कैसा विकट समय का फेर। कहलाते हम बीकानेरी, कभी न देखा …

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Rahat Indori : वो 5 चुनिंदा शेर जो हमेशा उनको ज़िंदा रखेंगे

Rahat Indori : वो 5 चुनिंदा शेर जो हमेशा उनको ज़िंदा रखेंगे

मशहूर शायर राहत इंदौरी (Rahat Indori) साहब का निधन हो गया है। राहत इंदौरी (Rahat Indori) 70 साल के थे। निमोनिया के लक्षण होने के चलते राहत इंदौरी (Rahat Indori) को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन इसके बाद वे कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। मंगलवार सुबह खुद ट्वीट कर राहत इंदौरी (Rahat Indori) …

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गोपालदास नीरज

पुण्यतिथि विशेष : बुझते दीपों को ज़रा सूर्य बना लूँ तो चलूँ…

गोपालदास नीरज एक ऐसा नाम है जो बीसवीं सदी से इक्कीसवीं सदी तक जनमानस पर छाया हुआ है। इनके द्वारा रचित गीतों ने वह ऊर्जा प्रवाहित की है कि मनुष्य जीवन से जुड़कर, यथार्थ को पहचानता हुआ, हर स्थिति में अपनी राहों का निर्माण कर लेता है। बात 70 के दशक की है, जब साहिर …

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Bir Buru Ke davedaar

पुस्तक समीक्षा : बिर बुरु के दावेदार ऊर्फ जंगल पहाड़ के दावेदार

बिर बुरु के दावेदार पुस्तक की लेखिका आलोका कुजूर कहती हैं’ ‘‘बचपन से ही पहाड़ सपने में आता था अनगिनत सपने में अनगिनत पहाड़ से मिलना हुआ। हर सपने में नए पहाड़ से मुलाकात हुई। आश्चर्य की बाद में हकीकत में उन पहाड़ों से मुलाकात हुई जो सपने में आते थे। मैंने अपनी मां को …

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