प्रशासन की तानाशाही और छात्रों का डीपी विरोध, कब खुलेगा IIMC?

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रिपोर्ट: ललित कुमार सिंह

भारतीय जन संचार संस्थान (Indian Institute of Mass Communication) एक बार फिर ख़बरों में है। लेकिन कारण इस बार भी प्रशासन का मनमानी रवैया है जिसका छात्र पुरज़ोर विरोध कर रहे हैं। कोविड बैच(2020-21) के ये छात्र कई महीनों से आईआईएमसी(IIMC) कैंपस को खोलने की मांग कर रहे हैं साथ ही वे ऑनलाइन कक्षाओं का विरोध कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि ऑनलाइन कक्षाओं की वजह से उन्हें तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिसकी वजह से वह इसका विरोध कर रहे हैं। लेकिन छात्रों की मांग को नज़रअंदाज़ करते हुए प्रशासन केवल आश्वासन ही दे रहा है।

शुक्रवार को आईआईएमसी(IIMC) में हुए एक ऑनलाइन कार्यक्रम “शुक्रवार संवाद” के मुख्य अतिथि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत थे। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों ने अपना विरोध दर्ज़ कराने के लिए मुख्य अतिथि का वक्तव्य शुरू होते ही सुनियोजित तरीके से कमेंट बॉक्स में अपने सवाल पूछने शुरू कर दिए। छात्र अपने सवालों से संस्थान(IIMC) के खोलने पर सरकार की राय जानने की कोशिश कर रहे थे।

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मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री के सामने ये सवाल पहुँचाना छात्रों के लिए इसलिए ज़रूरी हो गया था कि संस्थान उनकी बात को हर बार टाल रहा था। साथ ही छात्रों ने एक अनोखे ढंग से अपना विरोध जताने की कोशिश की जिसमें उन्होंने अपनी डिस्प्ले पिक्चर(DP) में लिखा (I Boycott Online Class)। लेकिन छात्रों के इस विरोध को देखते हुए इस डीपी वाले लगभग 80 छात्रों को मीटिंग से निकाल दिया गया। छात्रों की गलती यह थी कि उन्होंने सवाल पूछने की हिम्मत की।

2020-21 के इस बैच को कोरोना महामारी के चलते देर से शुरू किया गया था। इस सत्र को नवंबर में शुरू किया गया था। सत्र के सूचीपत्र में पहले सेमेस्टर को ऑनलाइन करने की बात की थी जबकि दूसरे सेमेस्टर के बारे में कोई लिखित जानकारी नहीं दी गयी थी। ऑनलाइन क्लास के चलते छात्रों ने तरह तरह परेशानियों का सामना किया। छात्रों ने इन परेशानियों को दूसरे सेमेस्टर में न झेलने के लिए कैंपस को खोलने की मांग की।

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छात्रों ने इस मुहीम को और आगे बढ़ाने के लिए ट्विटर व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हैशटैग #Reopen_IIMC चलाया है। छात्र अपने पोस्ट्स में आईआईएमसी के आधिकारिक हैंडल को टैग कर अपने सवाल कर रहे हैं।

आईआईएमसी के छात्र सोम शेखर ने ट्वीट करते हुए लिखा “जिस #शुक्रवार_संवाद में छात्रों से ‘संवाद’ करने के बजाय धक्का मार कर निकाल दिया जाता हो, ऐसे संवाद को मैं धक्का मारता हूं।”

उधर दूसरे छात्रों ने ट्वीट कर कहा…

छात्रों की मांग है कि पूरी फीस देने के बाद भी ऑनलाइन क्लास की वजह से वह पूरे साल प्रैक्टिकल से वंचित हैं और अब वह कैंपस में आकर पढ़ना चाहते हैं।
छात्रों का कहना है कि जब देशभर के राज्यों में चुनावी रैलियां हो सकती हैं तो फिर उन्हें ही उनके हक़ से वंचित क्यों रखा जा रहा है? आपको बता दें कि आईआईएमसी की फ़ीस एक सरकारी संस्थान होने के बावजूद बहुत ज़्यादा है। 2020 की शुरुआत में बढ़ी फ़ीस के विरोध में भी छात्रों ने संस्थान में विरोध प्रदर्शन किये थे। लेकिन इतनी फ़ीस देने के बाद भी छात्रों को संस्थान से दूर रखना कहाँ तक उचित है?

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