World Music Day Special: Every raga has anti-disease ability music health healing

विश्व संगीत दिवस विशेष: हर राग में है रोग निरोधक क्षमता!

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संगीत सिर्फ सात सुरों में बंधा नहीं होता। इसे बांधने के लिए विश्व की सीमाएं भी कम पड़ जाती हैं। संगीत दुनिया में हर मर्ज की दवा मानी जाती है। यह दु:खी से दु:खी इंसान को भी खुश कर देती है, संगीत का जादू एक मरते हुए इंसान को भी खुशी के लम्हे दे जाता है। संगीत दुनिया में हर जगह है। अगर इसे महसूस करें तो दैनिक जीवन में संगीत ही संगीत भरा है। कोयल की कूक, पानी की कलकल, हवा की सरसराहट, हर जगह संगीत ही तो है; बस ज़रूरत है तो इसे महसूस करने की।

Suyash Bhatt | New Delhi

अपनी ज़िंदगी के व्यस्त समय से कुछ पल सुकून के निकालिए और महसूस कीजिए इस संगीतमय दुनिया की धुन को। संगीत मानव जगत को ईश्वर का एक अनुपम दैवीय वरदान है। यह न सरहदों में कैद होता है और न भाषा में बंधता है। माना हर देश की भाषा, पहनावा और खानपान भले ही अलग हों, लेकिन हर देश के संगीत में सभी सात सुर एक जैसे होते हैं और लय-ताल भी एक सी होती है।

संगीत हर इंसान के लिए अलग मायने रखता है। किसी के लिए संगीत का मतलब अपने दिल को शांति देना है, तो कोई अपनी खुशी का संगीत के द्वारा इजहार करता है। प्रेमियों के लिए तो संगीत किसी रामबाण या ब्रह्मास्त्र से कम नहीं।

संगीत का प्रभाव
संगीत हर किसी को आनंद की अनुभूति देता है। संगीत के सात सुरों में छिपे राग मन को शांति देने के साथ ही रोगों को भी दूर करने में सहायक हैं। संगीतज्ञ पुरुषोत्तम शर्मा शास्त्रीय संगीत से तनाव व इसी से जुड़े अन्य रोग दूर कर रहे हैं। घनी आबादी के छोटे से घर में रहने वाले पुरुषोत्तम शर्मा के यहां काफ़ी लोग तनाव, अनिद्रा, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का इलाज कराने आते हैं। वह अपने रोगियों को कोई दवा या व्यायाम नहीं कराते। केवल एकाग्र मन से राग सुनने की नसीहत देते हैं। पुरुषोत्तम शर्मा कहते हैं कि राग से रोग तो दूर होता ही है, रोगी में आत्मविश्वास भी भरता है।

राग में रोग निरोधक क्षमता
संगीतज्ञ पुरुषोत्तम शर्मा के मुताबिक हर राग में रोग निरोधक क्षमता है। राग पूरिया धनाश्री अनिद्रा दूर करता है, तो राग मालकौंस तनाव से निजात दिलाता है। राग शिवरंजिनी मन को सुखद अनुभूति देता है। राग मोहिनी आत्मविश्वास बढ़ाता है। राग भैरवी ब्लड प्रेशर और पूरे तंत्रिका तंत्र को नियंत्रित रखता है। राग पहाड़ी स्नायु तंत्र को ठीक करता है। राग दरबारी कान्हड़ा तनाव दूर करता है तो राग अहीर भैरव व तोड़ी उच्च रक्तचाप के लिए कारगर है। दरबारी कान्हड़ा अस्थमा, भैरवी साइनस, राग तोड़ी सिरदर्द और क्रोध से निजात दिलाता है। एलोपैथी में इसे मान्यता नहीं है। एलोपैथी के मुताबिक संगीत से रोग दूर नहीं होते। हालांकि व्यावहारिक रूप से कई लोगों को संगीत सुनने या पढ़ने से नींद आ जाती है।

भारत में संगीत का वैविध्य
भारत जैसे प्राचीन देश में, जहाँ वेदों की संस्कृति है, वह शाम वेद संगीत की बात करता है। हमारी तो संस्कृति ही संगीत की संस्कृति है। हमारी प्रार्थना, सारे उत्सव, जीवन के सभी प्रसंगों से संगीत जुडा है. हमारे हरएक प्रदेश का अपना लोकसंगीत है। हिंदी फिल्मों के संगीत का इतना बड़ा खजाना हमारे पास है, उसका हमें गौरव होना चाहिए। हमारा शास्त्रीय संगीत दुनिया में सब से ज्यादा वैग्नानिक है। हमारे बड़े बुज़ुर्ग देशी संगीत का आनंद लेते है तो युवा लोग विदेशी संगीत का आनंद लेते है। आज संगीत विश्वव्यापी व्यवसाय बना है।

‘बसंत बहार’ फिल्म के एक गीत में गायक के सुर सजते नहीं है ऐसी परिस्थिति है। गीतकार शैलेन्द्र ने उस गीत में संगीत को व्याख्यायित करते लिखा था, ‘संगीत मन को पंख लगाये, गीतोँ से रिमज़िम रस बरसाये, सुर की साधना परमेश्वर की, सुर ना सजे, क्या गाऊं मै’।