बिहार की दर्दनाक तस्वीर: महिला के शव को ठेले पर ले जाने पर मजबूर रिश्तेदार

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बिहार के नालंदा में पोस्टमार्टम के बाद एक महिला के शव को उसके रिश्तेदार द्वारा ठेले में ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. जिसका कारण एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल है. एंबुलेंस के कर्मचारी और पुलिस के बीच अन-बन के कारण शुक्रवार से ही नालंदा जिले में एंबुलेंस सेवा पूरी तरह से ठप पड़ गई थी.

एंबुलेंस संघ के जिलाध्यक्ष का कहना है कि “भागनबीघा थाने के एक पुलिसकर्मी ने एंबुलेंस के एक कर्मचारी को घायल व्यक्ति को सदर थाने ले जाने को कहा था. जबकि एंबुलेंस कर्मचारी ने उस घायल व्यक्ति को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की बात कही थी. इसी बात को लेकर पुलिसकर्मी और एंबुलेंस कर्मचारी में बहस हो गई. जिसके बाद पुलिसकर्मी ने उस एंबुलेंस कर्मचारी की पिटाई कर दी.”

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बिहार में बाढ़ का कहर

इस समय बिहार कोरोना के साथ बाढ़ की मार भी झेल रहा है. बिहार की नदियां जैसे गंडक, कोसी, बागमती, अडवारा, कमला बलान, महानंदा और परमान खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. कुछ दिनों पहले बाढ़ के प्रकोप के कारण गोपालगंज जिले के सत्तरघाट पुल का एक हिस्सा गिर कर ध्वस्त हो गया था. इस पुल की लागत 263 करोड़ रुपये थी. दरबंगा जिले में करेह नदी के बढ़े जल स्तर के कारण कई गांवों की आबादी का सड़क संपर्क टूट गया है. पश्चिमी चंपारण के बगहा में भी कई गांवों की आबादी तटबंधों में आ गयी है. हियादपुर गांव में बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुस गया है. जिससे वहां के लोग पलायन को मजबूर हो गए है.

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बिहार में बढ़ता कोरोना संक्रमण

बिहार में कोरोना संक्रमण भी अपने चरम पर है. पिछले 24 घंटों में 901 कोरोना के नए मामले सामने आए हैं. इसके अलावा राज्य में कोरोना संक्रमित पीड़ितों की संख्या 23,000 तक पहुँच गई है. इस महामारी के कारण 167 मरीजों की मौत हो गई हैं और 14 हजार मरीज ठीक हो गए हैं. स्वास्थ्य विभाग ने अनुसार, शुक्रवार को 10273 सैंपल की जांच हुई. 

बिहार के एम्स के नर्सिंग स्टाफ, सफाई कर्मी और कर्मचारी दो महीने से वेतन ना मिलने के कारण हड़ताल पर चले गए हैं. इसके अलावा कोविड-19 से संक्रमित होने वाले कर्मचारी और उसके परिवार के सदस्यों का इलाज एम्स नहीं करता है.

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बिहार चुनाव नज़दीक है और हर राजनीतिक दल चुनाव की तैयारी में जुटा हुआ है. कोरोना काल में चुनावी रैली कैसे करानी है और कहाँ करानी है? यहीं सब ही राजनीतिक दलों की चुनैतियां नजर आ रही हैं.

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Written By Kirti Rawat, She is Journalism graduate from Indian Institute of Mass Communication New Delhi

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