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योगी आदित्यनाथ नहीं रहेंगे मुख्यमंत्री?

क्या योगी आदित्यनाथ नहीं रहेंगे मुख्यमंत्री ? चुनावी संग्राम के बीच क्या कहा पार्टी प्रभारी ने ?
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Ground Report | News Desk | Uttar Pradesh Elections 2021BJP Uttar Pradesh | उत्तर प्रदेश के चुनाव का बिगुल बज चुका है, जितना चुनाव का वक़्त नज़दीक आ चुका है उतनी ही राज्य में चहलकदमी बढ़ती जा रही है। सत्ता के गलियारे रोज़ ही नयी खबर के साथ उजागर हो रहे है, ऐसी स्थिति में हर छोटी खबर भी सुर्खियां बटोर रही है। बस एक दिन दिन पहले, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के जन्मदिन पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई ट्वीट नहीं किया तो उसके लिए भी काफी शोरगुल होने लगा।

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मौजूदा हालतों में सब नज़र लगाए थे की शायद योगी आदित्यनाथ की बढ़ती आलोचनाओं, खासकर पार्टी के अंदर और बड़े विधायकों के मीडिया में अलग ध्वनि के स्वर की वजह से उन्हें इस बार चुनाव से पहले मुख्यमंत्री के चहरे से हटाया जा सकता है और साथ ही कैबिनट में भी बड़े बदलाव हो सकते है।

चुनाव के लिए तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है, बंगाल चुनाव में मिली शिकस्त और राज्य में पंचायत चुनाव में मिली बड़ी हार से पार्टी सतर्क हो गयी है। लगभग दो हफ्ते पहले भाजपा की हाई लेवल मीटिंग हुई थी जिसमे राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ग्रह मंत्री अमित शाह और संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और राज्य के संगठन मंत्री सुनील बंसल न हिस्सा लिया था। योगी आदित्यनाथ की उस मीटिंग से गैर मौजूदगी की वजह से कई सियासी अटकलें लगायी जा रही थी।

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हाल ही में हुई मीटिंग में जेपी नड्डा, कई महासचिव और प्रभारी शामिल हुए जिसके बाद यूपी के प्रभारी राधा मोहन सिंह अचानक शनिवार देर शाम लखनऊ पहुंचे और पहुंचते ही उन्होंने पार्टी दफ्तर में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से मुलाक़ात की, जिसके बाद आज राधा मोहन ने राजयपाल से बैठक की और उन्हें एक लिफाफा सौंपा। इसके बाद सियासी गर्मी और बढ़ गयी, लेकिन मीडिया से बात करते वक़्त उन्होंने साफ़ कर दिया की ये चुनाव आदित्यनाथ की अगुआई में ही लड़ा जायेगा और मंत्रिमंडल का विस्तार भी नहीं होगा।

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कोरोना के मिसमैनेजमेंट के लिए तो सरकार की आलोचना हो ही रही थी पर गंगा में तैरते शवों ने भाजपा की पूरी छवि को धूमिल कर दिया था। उनके खिलाफ अपने ही दल में नाराज़गी तब बढ़ गयी जब उन्होंने बाकियों से पूछना या राय लेना बंद कर दिया खासकर कोरोना की दूसरी लहर के समय में। पिछले चुनाव में 300 से अधिक सीट जीतने पर 5 बार सांसद रहे आदित्यनाथ को कमान दी गयी थी क्योकि वह ही दल की हिंदुत्व वाली विचारधारा को आगे बढ़ाने में सबसे सक्षम नज़र आ रहे थे। बिहार से लेकर बंगाल के चुनाव में इन्हे स्टार प्रचारक बनाया गया था।

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