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क्या बीजेपी के नेताओं में असंतोष का फायदा उठा पाएगी कांग्रेस ?

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देश में कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन लगने से पहले मध्य प्रदेश में जमकर हुए सियासी ड्रामा और मात्र 15-20 दिनों में किस तरह सत्ता पलटी ,वो सभी ने देखा. राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की कांग्रेस आलाकमान से नाराज़गी के चलते उनके समर्थक 20 से अधिक विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर कमलनाथ सरकार गिरा दी. लेकिन कांग्रेस से बीजेपी में आए सभी नेताओं की परीक्षा अभी बाकी हैं क्योंकि सरकार बनाए रखने के लिए उपचुनाव में जीत जरूरी है..

ऐसे में सिंधिया के साथ बीजेपी में आए 22 विधायक और बाद में 3 अन्य विधायकों के इस्तीफे के साथ 2 सीटों पर दिवंगत हुए विधायको की वजह से खाली पड़ी 27 सीटों पर चुनाव कब होंगे इस पर अभी कोई ऐलान नहीं हुआ है लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि अक्टूबर नवंबर में चुनाव कराए जा सकते हैं. जिन 27 सीटों पर उपचुनाव होना है उनमें से 16 सीटें तो अकेले ग्वालियर चंबल क्षेत्र की हैं. वहीं कोरोना वायरस का संक्रमण भी इस इलाके में पिछले दिनों में काफी बढ़ा है.

शिवराज-सिंधिया के साथ आने से क्या आसानी जीत पाएगी बीजेपी?

ऐसे में क्या कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी के टिकट पर राज्यसभा सांसद बने ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर-चंबल संभाग में बीजेपी की नैया पार लगा पायेंगे? यह सवाल बीते 22 से 24 अगस्त तक हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया और बीजेपी के ‘मेगा शो’ के बाद मध्य प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा में है जिस शो में जुटी भीड़ को देखकर बीजेपी गदगद नजर आ रही है जबकि कांग्रेस की चिंता बढ़ी है..

गौरतलब है कि बीजेपी में शामिल होने के बाद सिंधिया, शनिवार को पहली बार किसी बड़े जलसे के लिए ग्वालियर पहुंचे थे. जहां ज्योतिरादित्य सिंधिया के कहने पर मध्य प्रदेश बीजेपी ने ग्वालियर-चंबल संभाग में सदस्यता अभियान चलाया था जिसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर-चंबल संभाग की उन सभी 16 सीटों का दौरा किया जहां उपचुनाव होना है और इस मेगा शो के बाद सिंधिया ने दावा किया है कि वो लगभग ग्वालियर-चंबल संभाग में 76 हजार 361 पुराने कांग्रेसियों को बीजेपी में शामिल करने में कामयाब रहे है.

वही दूसरी तरफ खबर ये भी है बीजेपी कांग्रेस के सभी पूर्व विधायकों को  अपने झंडे तले उपचुनाव लड़ाने जा रही है जिनके इस्तीफों से कमलनाथ की सरकार गिरी और बीजेपी की सरकार बनी . ऐसे में बीजेपी के पुराने नेताओ में भी असंतोष नजर आ रहा है .

क्या कहता है सीटों का गणित?

230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान में 203 सदस्य हैं और वहीं 27 सीटें खाली हैं, जिनके लिए उपचुनाव होना है. कांग्रेस 114 से घटकर 89 सीटें, बीजेपी के पास 107 और 7 अन्य विधायक हैं. कांग्रेस के 25 विधायकों ने इस्तीफा दिया है और फिलहाल उम्मीद है ये सारे 25 लोग बीजेपी के टिकट पर विधानसभा उपचुनाव लड़ेंगे. बीजेपी के 107 विधायक हैं और इसके अलावा 7 (BSP 2, SP 1, अन्य 4) का भी समर्थन हासिल है. आने वाले उपचुनाव में बीजेपी को बहुमत के लिए सिर्फ 9 विधायकों की जरूरत है. जबकि कांग्रेस को अगर बहुमत चाहिए तो उन्हें लगभग सभी सीटों में जीत हासिल करनी होगी…

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ग्वालियर चंबल संभाग की सीटों के समीकरण:

ग्वालियर-चंबल संभाग में जिन 16 सीटों पर उपचुनाव होना है, उनमें – ग्वालियर जिले की ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व और डबरा, मुरैना जिले में सुमावली, मुरैना, दिमनी और अम्बाह, भिंड में मेहगांव और गोहद, दतिया जिले में भांडेर, शिवपुरी जिले में करैरा और पोहरी, गुना में बमोरी और अशोक नगर जिले में अशोक नगर, चंदेरी और मुंगावली सीटें शामिल हैं..यहां जिन सीटों पर पिछले चुनाव में कांग्रेस जीती थी वहां से कई सारी सीटों पर बीएसपी ही दूसरे नंबर पर रही थी. मतलब दलित वोट बैंक इस इलाके में काफी अहमियत रखता है. राजनीतिक पंडित मानते हैं कि अगर उपचुनाव में बीएसपी सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करती है तो इससे सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को ही होने वाला है .

सिंधिया के बिना मुश्किल है कांग्रेस की राह

ग्वालियर-चंबल संभाग में कांग्रेस की राजनीति एक लंबे दौर से महल के इर्द गिर्द ही घूमती रही है , एक पूरा दौर रहा जब जब ग्वालियर-चंबल संभाग में कांग्रेस की पूरी राजनीति माधव राव सिंधिया के आसपास सिमटी रही. माधव राव सिंधिया के बाद कांग्रेस इस क्षेत्र में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूरा जिम्मा उठाया लेकिन यह पहला मौका होगा जब सिंधिया और महल की छाया से इतर कांग्रेस आने वाले उपचुनाव में अपने दम पर चुनावी रण में उतरेगी.

हालांकि कांग्रेसी दावा कर रहे हैं कि सिंधिया के जाने से पार्टी को कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है और सिंधिया को दगाबाज़ और गद्दार करार दे रहे है पर कांग्रेस में एक धड़ा यह भी मान रहा है कि सिंधिया के बिना कांग्रेस ग्वालियर-चंबल संभाग में कुछ भी नहीं कर पायेगी. कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे डाॅक्टर गोविंद सिंह ने तो खुलकर यह माना है कि सिंधिया का बीजेपी में चले जाना ग्वालियर-चंबल संभाग में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ायेगा..

वही कांग्रेस नेता के के मिश्रा ने कहा है कि ग्वालियर में सिंधिया वापस जाओ के नारे, हमारे दावे की हक़ीक़त अभी से बयां कर रहे हैं , उपचुनाव के बाद सिंधिया कहीं के नहीं रहेंगे . दरअसल सिंधिया का जहां-जहां दौरा हो रहा है कांग्रेस के कार्यकर्ता काले झंडे दिखाकर, नारे लगाकर, भीड़ इकट्टी करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं.

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क्या बीजेपी के नेताओं में असंतोष का फायदा उठा पाएगी कांग्रेस?

जिस तरह से कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई है और बीजेपी सत्ता में आई है तभी से कांग्रेस लगातार बीजेपी पर लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या का आरोप लगाती आयी है , ऐसे में उपचुनाव में कांग्रेस के पास मौका है कि वो बीजेपी को पटखनी दे और फिर से सत्ता में वापसी करे लेकिन राह इतनी आसान नहीं है. वैसे कमलनाथ अपना पूरा जोर लगा रहे हैं. राम मंदिर निर्माण के दौरान भी पूजा पाठ से लेकर हनुमान पूजा तक में वो काफी एक्टिव दिखे थे.

इतना ही नहीं बल्कि बीजेपी से नाराज लोगों से वो खुद मुलाकात कर रहे हैं, 22-24 अगस्त तक सिंधिया के मेगा शो। केनाफ बीजेपी के कई बड़े नेता खफा बताए जा रहे हैं ..जिसमें मध्य प्रदेश सरकार में फिलहाल गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम भी सामने आ रहा है वहीं कभी सिंधिया के राजनीितक प्रतिद्वंदी रहे पाने वाले तेजतर्रार इस मेगा शो में उनके साथ ही मंच साझा करने वाले जयभान सिंह पवैया ग्वालियर के तेवर भी अलग नजर आ रहे है.

पवैया ने एक ट्वीट करते हुए लिखा , ‘सांप की दो जीभ होती हैं और आदमी की एक, सौभाग्य से हम तो मनुष्य हैं . राजनीति में वक्त के साथ दोस्त और दुश्मन तो बदल सकते हैं, मगर जो सैद्धांतिक मुद्दे मेरे लिए कल थे वे आज भी हैं . जय श्री राम…’ इस ट्वीट से यह तो स्पष्ट है कि सिंधिया को पार्टी में मिल रही तवज्जो उनको बिल्कुल रास नहीं आ रही है. अब देखना होगा कि covid-19 के इस मुश्किल दौर में भी मध्य प्रदेश में जारी लगातार जारी सियासी घमासान के बीच उपचुनाव में ऊंट किस करवट बैठता है.

आयुष ओझा की रिपोर्ट

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