क्यों बनना चाहिए पश्चिमांचल एक अलग प्रदेश?

विचार । अंकुर सेठी

मैं पश्चिमांचल प्रदेश का हमेशा से समर्थक रहा हूँ। मैं उत्तर प्रदेश की बढ़ती जनंसख्या(21 करोड़) और इसके विशाल क्षेत्रफल को इसके पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण मानता हूँ।
आज वर्तमान में सारे संसाधन, बड़ी यूनिवर्सिटीज, AIIMS, स्टेडियम, एक्सप्रेस वे और बजट का बहुत बड़ा हिस्सा पूर्वांचल पर खर्च किया जा रहा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की दूरी भी 700 km से अधिक है। किसी भी योजना को देख लीजिए सबसे ज्यादा लाभ लेने वाले पूर्वांचल वासी मिलेंगे, लेकिन हमसे लगातर भेदभाव किया जा रहा है।


पश्चिमी उत्तर प्रदेश हमेशा से ही यूपी का वो हिस्सा रहा है जो उत्तर प्रदेश के राजस्व में बड़ा योगदान देता है।लेकिन हर सरकार इस क्षेत्र की अनदेखी में कोई कसर नहीं छोड़ती। जिसकी वजह से सारी बहुद्देश्यीय योजनाओं, परियोजनाओं का लाभ लखनऊ से पश्चिम की तरफ आ ही नहीं पाता है।


उत्तर प्रदेश की हालत रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा सभी में पिछड़ती जा रही है जिसका बड़ा कारण जनंसख्या विस्फोट है जो बेरोजगारी का कारण बन रहा है। अगर क्राइम की बात करें तो उत्तर प्रदेश इस सूची में टॉप पर है इसमें कोई शक नहीं है। उत्तर प्रदेश के विकास के लिए इसके 4 भाग होने जरूरी हैं। सौ से अधिक देशों से ज्यादा जनंसख्या केवल उत्तर प्रदेश में है, ऐसे में विकास की कामना करना मुश्किल है। इतनी बड़ी जनंसख्या में खुद भारत के 10 से ज्यादा राज्य बंटकर खुशहाली से रह रहे हैं। लेकिन मेरा मानना है कि पिस सिर्फ उत्तर प्रदेश ही रहा है। इसीलिए हमें अपना पश्चिमांचल चाहिए, हमे अपना हक चाहिए।

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आज 8 करोड़ से ज्यादा लोग पश्चिमांचल प्रदेश का सपना मन में रखते हैं, जिसके लिए सभी को एकजुट होकर आंदोलन करना होगा। यह प्रयास आसान नही है और सहयोग के बिना तो बिल्कुल नहीं। पश्चिमांचल बनाने के लिए संगठन बन चुका है, फेसबुक पेज, फेसबुक ग्रुप, ट्विटर से लेकर मीडिया सेल भी सक्रिय है।

नोट: ये लेख लेखक के निजी विचारो पर आधारित है।