विदेशी ज़मीन पर क्यों नहीं जीत पा रही टीम इंडिया?

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रिपोर्ट, राजीव पांडेय

लॉड्स टेस्ट में मिली शर्मनाक शिकस्त के बाद भारतीय क्रिकेटरों के तकनीक और आत्मविश्वास पर बहस छिड़ा हुई है। कुछ लोगों का कहना है कि भारतीय खिलाड़ी केवल घर के शेर हैं, तो कुछ मानते हैं कि भारतीय टीम को विदेशी पिचों पर कम खेलने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है ।

लगातार दो टेस्ट मैच हारने के बाद विराट कोहली की कप्तानी, खिलाड़ियों के प्रदर्शन और कोच रवि शास्त्री की कोचिंग पर सवाल खड़़े किये जा रहे है। क्रिकेट दिग्गजों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी टीम भारतीय टीम की जमकर आलोचना की जा रही है।

खराब दौर से गुजर रहे भारतीय कप्तान विराट कोहली ने इंग्लैंड में दो टेस्ट गंवाने के बाद प्रशंसकों से टीम का समर्थन करने की अपील की है। विराट ने कहा है कि उम्मीद है कि वे टीम का साथ नहीं छोड़ेंगे । विराट कोहली के आधिकारिक फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए संदेश में लिखा था, ”कई बार हम जीतते हैं और कई बार हम सीखते हैं। आप हमसे उम्मीद मत छोड़िए और हम वादा करते हैं कि आपको निराश नहीं होने देंगे।

पिछले दौरों पर भी मिली थी करारी हार

इंगलैंड की सरजमीं पर इस तरह हारना कोई नयी बात नहीं है। 2011 में पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम को 4-0 से क्लीनस्वीप का सामना करना पड़ा था। इस दौरे मैं भी सचिन तेंदुलकर ,वीरेंद्र सहवाग, वीवीएस लक्ष्मण तथा युवराज सिंह जैसे स्टार बल्लेबाज फ्लाप रहे थे। सिर्फ राहुल द्रविड़ ही बेहतरीन प्रदर्शन कर पाये थे।

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2014 का दौरा भी भारत के लिए बुरे सपने से कम न था। महेंद्र सिंह धोनी की अगुआई में भारत 5 मैचों की सीरीज में 3-1 से हार गया था । पहले दो मैचों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम अंतिम तीन मैच बुरी तरह से हार गयी थी।

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