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Porn फिल्मों को क्यों कहा जाता है ‘ब्लू फिल्म’?

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दुनिया भर में पोर्नोग्राफी (porn movies) का कारोबार कितना बड़ा है, इस तथ्य का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर में लोग नेट पर पोर्नोग्राफी देखने के लिए प्रत्येक सेकंड पर 3075.64 डॉलर ख़र्च करते हैं। इंटरनेट पर मौजूद पोर्नोग्राफी को लेकर बहुत सारे आंकड़े जुटाए गए हैं जिनमें कहा गया है कि इंटरनेट पर किसी समय के प्रत्येक सेकंड में कम से कम 28,258 यूजर्स पोर्नोग्राफी देख रहे होते हैं।

अगर हम पॉर्न फिल्मों के नाम की बात करें तों हर देश में इसको अलग-अलग नाम से जाना जाता है। पॉर्न एक कॉमन और सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। मगर पाकिस्तान, हिंदुस्तान, बांग्लादेश, नेपाल यानी लगभग पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में पोर्न फिल्मों (porn movies) को ‘ब्लू फिल्म’ के नाम से ही अधिक पुकारा जाता है।

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Porn फिल्मों को ‘ब्लू फिल्म’ ही क्यों कहा जाता है?

अब ऐसे में ज़हन में सवाल उठता है कि पोर्न फिल्मों को ब्लू फिल्म क्यों कहा जाता है? ‘ब्लू फिल्म’ नामकरण के पीछे पहली वजह यह बताई जाती है कि इन फिल्मों के पोस्टर ब्लू यानी आसमानी-नीले बैकग्राउंड के साथ बनाए जाते हैं। सच में ऐसा है तो फिर एक और सवाल कि यही रंग क्यों चुना जाता है? हालांकि यह तर्क सही नहीं है क्योंकि विज्ञान के अनुसार सबसे अधिक ध्यान खींचने वाला रंग लाल है।

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फिल्मों का वर्गीकरण भी पोर्न फिल्मों को ब्लू फिल्म कहे जाने की वजह हो सकता है। बताया जाता है कि एक समय सभी बी ग्रेड फिल्मों की पैकिंग नीले रंग के कवर में होती थी। पोर्न फिल्में भी इसी श्रेणी में शामिल होती थीं, इसलिए उनके पैकेट भी नीले रंग के हुआ करते थे। हालांकि इस कारण में भी कोई तुक नजर नहीं आता ।

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ये है इस नाम की तार्किक वजह

इनको ब्लू फिल्म कहे जाने की तीसरी वजह इन परिस्थितियों की उपज भी हो सकती है। शुरुआत में ऐसी फिल्में बहुत ही सीमित बजट के साथ दबे-छिपे ढंग से बनाई जाती थीं। रंगीन फिल्मों का दौर आने के बाद भी ये फिल्में काली-सफेद ही दिखाई देती रहीं क्योंकि ब्लैक एंड वाइट रील सस्ती होती थी। ऐसा माना जाता है कि बाद में पोर्न फिल्म निर्माताओं के ऊपर भी इन्हें रंगीन करने का दबाव आया होगा।

अब चूंकि उनके पास पर्याप्त बजट होता नहीं था तो इसलिए कुछ फिल्मकारों ने ब्लैक एंड वाइट रील के साथ ही कुछ प्रयोग कर उसे रंगीन बनाने की कोशिश की। और इस कोशिश में वे दर्शकों को काले और सफेद के साथ नीला रंग दिखाने में सफल हुए। इन फिल्मों में नीले रंग की स्पॉटलाइट का इस्तेमाल होता था इसलिए ये फिल्में ब्लू फिल्में कही जाने लगीं। बहुत हद तक यह कारण फिल्मों के इस नाम की एक तार्किक वजह लगती है।

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