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और कारवां टूटता गया…

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न्यूज़ डेस्क।। अरविंद केजरीवाल ने जब आम आदमी पार्टी बनाई थी तब कई लोग उनके साथ चले थे। लेकिन आज वह कारवाँ टूटता नज़र आ रहा है। अन्ना हज़ारे के लोकपाल आंदोलन से जन्मी इस पार्टी ने स्वराज का सपना दिखाया तो कई लोग अपना कामकाज छोड़कर इनके संग आए लेकिन आज आम आदमी पार्टी की नींव तैयार करने वाले कई नेताओं ने पार्टी से अपना नाता तोड़ लिया है। किसी ने निजी कारणों को वजह बताया तो किसी ने पार्टी पर अपने लक्ष्य से भटकने का आरोप भी लगाया।

हाल ही मैं अचानक पत्रकारिता छोड़ आम आदमी पार्टी में आये आशुतोष ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वे निजी कारणों से इस्तीफा दे रहे हैं। अरविंद केजरीवाल के चहेते आशीष खेतान ने वापस वकालत के पेशे में लौटने की इक्षा जताते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले समाजसेवी योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और अजित झा को पार्टी विरोधी गतिविधियों का इल्जाम लगाकर पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था। राज्यसभा न भेजने पर उपजे विवाद के बाद कुमार विश्वास की स्थिति भी पार्टी में नगण्य हो गयी है। ये वो लोग हैं जिन्होंने आम आदमी पार्टी को शुरुवाती दौर में ऊर्जा दी थी।

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पार्टी छोड़ कर जाने या बर्खास्त कर दिए जाने वाले सदस्यों की लिस्ट इतनी ही नहीं है इससे पहले पार्टी का बड़ा चेहरा प्रोफेसर आनंद कुमार, शाज़िया इल्मी, कैप्टन जी आर गोपीनाथ, अशोक अग्रवाल, सुरजीत दासगुप्ता, मधु बाधुरी, नूतन ठाकुर, मौलाना मसूद काज़मी और मयंक गांधी भी पार्टी को अलविदा कह चुके हैं।

इस्तीफा देने वाले अधिकतर लोगों ने पार्टी के लक्ष्य से भटकने का आरोप लगाया। मयंक गांधी ने इस्तीफा देते हुए कहा था कि अरविंद केजरीवाल संगठन को बर्बाद करने में लगे हुए हैं।

संकेत साफ है आम आदमी पार्टी में अब एक ही व्यक्ति का निज़ाम चलता है। वे अपनी मर्ज़ी के मुताबिक लोगों को आगे बढ़ाते हैं और विरोधी आवाज़ों को बर्दाश्त नहीं करते। राज्यसभा चुनावों के दौरान आशुतोष और कुमार विश्वास को दरकिनार करके दो व्यवसायी को राज्यसभा भेजा गया। तब से पार्टी में अविश्वास की खाई बढ़ती जा रही है।