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फ्रांस में लाए गए Anti separatism law का क्यों हो रहा विरोध ?

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फ्रांस में लाया गया वो नया क़ानून जिसकी दुनियाभर में चर्चा हो रही है। इस समय ये क़ानून दुनिया के लिए सबसे बड़ी खबर बन गया है। Reinforcing Republican Principles नाम का ये कानून फ्रांस के निचले सदन में पास हो चुका है

इस क़ानून को Anti Separatism Law भी कहा जा रहा है। हिंदी में इसका अर्थ है- धार्मिक कट्टरपंथी ताकतों और अलगाववादियों को रोकने के लिए लाया गया नया कानून।

सरकार का मानना है कि इस बिल के कानून बनने के बाद फ्रांस में चरमपंथ से लड़ने की सरकार की कोशिशें मजबूत होंगी। हालांकि विरोध करने वाले कह रहे हैं कि जिन उपायों की बात हो रही है वो मौजूदा कानूनों में शामिल हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इस बिल के पीछे राजनीतिक मंशा छुपी हुई है।

फ्रांस के इस नए की क़ानून की प्रमुख बातें

इस कानून के तहत अब पुलिस को अधिकार होगा कि वह फ्रांस के मस्जिदों और मदरसों को जब चाहे तब बंद कर सकती है।

मुस्लिमों के एक से ज्यादा विवाह या फिर जबरन विवाह करने को अपराध घोषित किया जाएगा।

शरिया क़ानून के मुताबिक़ कोई भी मुसलमान चार शादी कर सकता है। लेकिन अब फ्रांस ने इस पर रोक लगा दी है।

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सरकार के प्रतिनिधि ये सुनिश्चित करेंगे कि खेल कूद में किसी तरह का कोई लिंग भेदभाव न हो। जैसे लड़कियों के लिए अलग स्विमिंग पूल हो और लड़कों के लिए अलग फ्रांस की सरकार अब इसकी इजाजत नहीं देगी।

इस क़ानून में सैमुएल पैटी के नाम से एक प्रावधान जोड़ा गया है। इसके तहत अगर कोई व्यक्ति किसी सरकारी कर्मचारी और अधिकारी के ख़िलाफ़ उससे जुड़ी निजी जानकारियों को सोशल मीडिया पर शेयर करता है तो उस पर लगभग 40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा ।

अगर कोई व्यक्ति फ्रांस के किसी भी सरकारी अधिकारी या जनप्रतिनिधि को डराता है और उसे फ्रांस के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के ख़िलाफ़ जाने के लिए मजबूर करता है तो उसे 5 साल तक की जेल होगी और उस पर क़रीब 65 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

इस नए क़ानून के तहत फ्रांस के सभी धार्मिक संस्थानों को विदेशों से मिलने वाले चंदे की जानकारी सरकार को देनी होगी. अगर फंडिंग 8 लाख रुपये से ज़्यादा है तो उन्हें ये सरकार को बताना होगा और ऐसा नहीं करने पर फ्रांस की सरकार ऐसे धार्मिक संस्थानों को देश से मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद कर देगी।

जिन लोगों पर फ्रांस में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप होगा, ऐसे लोगों पर धार्मिक संस्थानों में हिस्सा लेने पर 10 साल के लिए बैन लगा दिया जाएगा।

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फ्रांस को ऐसा क़ानून क्यों लाना पड़ा ?

फ्रांस में पिछले 5 वर्षों में 10 बड़े आतंकी हमले हुए हैं और इन हमलों में 250 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं।

7 जनवरी 2015 को पेरिस में Charlie Hebdo के दफ़्तर पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में भी 12 निर्दोष लोग मारे गए थे।

Charlie Hebdo फ्रांस की एक वीकली मैगजीन है और उसके दफ़्तर पर ये हमला पैगम्बर मोहम्मद का विवादास्पद कार्टून छापने के लिए किया गया था।

13 नवम्बर 2015 को फ्रांस में सुनियोजित तरीके से कई आतंकवादी हमले हुए थे जिनमें 130 लोग मारे गए थे।

14 जुलाई 2016 को फ्रांस के नीस शहर में एक आतंकवादी ने भीड़ पर ट्रक चढ़ा दिया था जिसमें 84 लोग मरे थे।

3 अक्टूबर 2019 को एक आतंकवादी ने तीन पुलिस अधिकारियों और एक नागरिक की गोली मार कर हत्या कर दी थी।

 बिल का विरोध क्यों ?

फ्रांस में अब मुस्लिम समुदायों से जुड़े लोगों ने इस क़ानून का विरोध करना शुरू कर दिया है और उनका आरोप है कि इस कानून से उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सीमित हो जाएगा। इसके लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भी आलोचना हो रही है।

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फ्रांस की बड़ी विपक्षी पार्टियों में से एक नेशनल रैली ने इस कानून का विरोध किया है और इस पार्टी की प्रमुख Marine Le Pen ने कहा है कि मैक्रों सरकार द्वारा लाया गया क़ानून काफ़ी कमज़ोर है। यानी वो इस कानून की मूल भावना के खिलाफ नहीं है, बल्कि वो धार्मिक कट्टरता के ख़िलाफ़ और कड़ा क़ानून चाहती हैं।

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