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क़ुतुब मीनार को विष्णु स्तंभ क्यों बताया जा रहा ?

क़ुतुब मीनार
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राजधानी दिल्ली में स्थित ऐतिहासिक धरोहर क़ुतुब मीनार (Qutub Minar) को लेकर भी विवाद शुरू हो गया है। दरअसल दिल्ली के साकेट कोर्ट में भगवान विष्णु और जैन तीर्थकर भगवान ऋषभदेव के नाम से क़ुतुब मीनार के अंदर पूजा-पाठ करने की इजाजत की मांग को लेकर एक याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 24 दिसंबर की तारीख दी है।

याचिका में किया गया दावा

यहां आपको बता दें कि कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में दावा किया गया है कि दिल्ली के पहले मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा 1192 में बनवाई गई। गाजियाबाद के अहिंसा खंड में रहने वाले वकील हरिशंकर जैन ने दिल्ली के साकेत कोर्ट में याचिका दायर की है।

साकेत कोर्ट में एक याचिका दायर कर कुतुब मीनार स्थित कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद पर सवाल खड़े किए गए हैं। इस याचिका में दावा किया गया है कि 27 हिंदू एवं जैन मंदिरों को तोड़कर इस मस्जिद को बनाया गया है। दावा किया गया है कि यह मस्जिद कुतुबुद्दीन ऐवक द्वारा उसी मलबे से बनाई गई थी, जो मंदिर को तोड़ने के बाद वहां पर मौजूद था।

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क़ुतुब मीनार है वैश्विक धरोहर

गौरतलब है कि महरौली स्थित कुतुब मीनार को वैश्विक ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा दिया गया है। कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है और इसका व्यास 14.32 मीटर है जो शिखर तक पहुंचने पर 2.5 मीटर रह जाता है। यह दुनिया की सबसे ऊंची मीनार है। इसमे कुल 379 सीढ़ियों का निर्माण कराया गया है।

साल 1199 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने ही इस ऐताहासिक धरोहर का निर्माण शुरू करवाया था। जिसे बाद में इल्तुतमिश ने पूरा कराया था। 1220 में इस मीनार का काम पूरा हुआ था। इसे प्राचीन भारत की वास्तुकला का नगीना कहा जाता है। बता दें कि कुतुब मीनार का ऊपरी हिस्सा बिजली गिरने की वजह से नष्ट हो गया था जिसे फिरोज़शाह तुगलक ने दोबारा बनवाया।

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