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क्यों लग रहा है फ्रांस पर इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने का आरोप ?

क्यों लग रहा है फ्रांस पर इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने का आरोप ?
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फ्रांस और उसके राषट्रपति इमैनुएल मैक्रो ( Emmanuel Macron ) के ख़िलाफ कई मुस्लिम देशों में ज़बरदस्त विरोध हो रहा है। दुनिया भर के मुस्लिम मुल्कों में फ्रांस के उत्पादों को बहिष्कार किए जाने की मुहिम तेज़ हो गई है। हालही में, फ्रांस में एक टीचर की नृशंस हत्या स्कूल के बाहर इसलिए कर दी गई थी क्योंकि उसने अपने स्टूडेंट्स को पैगंबर मोहम्मद के कार्टून दिखाए थे। बाद में पुलिस ने हत्यारे को गोली मार दी थी।

राषट्रपति इमैनुएल मैक्रो के विरोध का कारण बनी ये वजह

फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ( Emmanuel Macron) ने टीचर सैमुएल पैटी की हत्या को ‘इस्लामी आतंकवाद’ (Islamic Terrorism) करार देकर कहा कि ‘इस्लाम हमारा भविष्य हथियाने का इरादा रखता है, जो कभी नहीं होगा।’ इन घटनाओं के बाद से फ्रांस और मुस्लिम वर्ल्ड टकरा रहे हैं क्योंकि मैक्रों ने मोहम्मद के कार्टूनों को जारी रखने की भी बात कही। लेकिन, बात इससे कुछ और ज़्यादा है।

अरब देश ही नहीं, बल्कि तुर्की से लेकर पाकिस्तान तक फ्रांस की आलोचना कर रहे हैं और उस पर ‘इस्लामोफोबिया’ को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे हैं। फ्रेंच उत्पादों के बॉयकॉट के लिए सोशल मीडिया पर ट्रेंड चलाए जा रहे हैं और कई मुस्लिम देशों में इस पर अमल भी शुरू हो गया है।

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कुवैत के विदेश मंत्री ने फ्रेंच टीचर की हत्या की निंदा की लेकिन यह भी कहा कि इस पर राजनीति करते हुए नफरत और नस्लवाद फैलाना ठीक नहीं है। उधर, सऊदी अरब स्थित 57 देशों के इस्लामिक संगठन ने पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों की प्रैक्टिस की निंदा करते हुए कहा था कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर आप किसी धर्म की या ईशनिंदा नहीं कर सकते।

मैक्रों का ‘विवादस्पद’ बयान

इमैनुएल मैक्रों ने कहा, “इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो आज पूरी दुनिया में संकट में है। ये हम सिर्फ अपने देश में ही नहीं देख रहे।” मैक्रों की ‘संकट’ वाली टिप्पणी आपत्ति की वजह बनी है। लोगों का कहना है कि मैक्रों का बयान इस्लाम और कट्टर इस्लाम में फर्क नहीं करता है। कुछ लोग मैक्रों के ऐलान को धार्मिक स्वतंत्रता दबाने की कोशिश करार दे रहे हैं।

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आक्रामक तौर पर फ्रांस के प्रोडक्ट्स का बॉयकॉट

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में करीब 10 हजार से ज्यादा लोग रैली में शामिल हुए। कई अरब देशों ने फ़्रांस के सामानों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है. कुवैत, जॉर्डन और क़तर की कुछ दुकानों से फ़्रांस के सामान हटा दिए गए हैं। वहीं लीबिया, सीरिया और ग़ज़ा पट्टी में फ़्रांस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए हैं। फ़्रांस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ‘बहिष्कार की बेबुनियाद’ बातें अल्पसंख्यक समुदाय का सिर्फ़ एक कट्टर तबक़ा ही कर रहा है।

मुस्लिम देशों ने जिस तरह संगठित और आक्रामक तौर पर फ्रांस के प्रोडक्ट्स का बॉयकॉट किया, तो फ्रांस की मशीनरी को होश आया। फ्रांस के विदेश मंत्रालय और कूटनीतिज्ञों ने इस बॉयकॉट को वापस लिये जाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं, तो दूसरी तरफ, मैक्रों ने भी ट्विटर के ज़रिये यह संदेश दिया है कि वो ‘हेट स्पीच के पक्ष में नहीं हैं और मानवीय गौरव और यूनिवर्सल मूल्यों का समर्थन करते हैं।’

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