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#aresstbillgates: टीका परीक्षण और नसबंदी कर कई भारतीय आदिवासी लड़कियों की ज़िंदगी तबाह की, बिल गेट्स पर कई गंभीर आरोप!

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Bill Gates: भारत में इस समय जहां कोरोना महामारी असर बनाये हुए है, वहीं माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ( Bill Gates) ने भारत के साथ covid-19 वैक्सीन को बनाने वाली टेक्नोलॉजी शेयर करने से मना कर दिया है। bill gates ने वैक्सीन पेटेंट की टेक्नोलॉजी को शेयर करना बहुत महंगा बताया है। उनके खिलाफ ट्विटर और इंस्टाग्राम पर #arrestbillgates ट्रेंड कर रहा है।

क्यों हो रहा है यह ट्रेंडिंग #aresstbillgates

Bill Gates पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने स्वदेशी टीकों की जबरदस्ती टेस्टिंग करवाई है और नसबंदी करके कई भारतीय आदिवासी लड़कियों की ज़िंदगी तबाह दी।

कब हुई स्वदेशी टीकों की टेस्टिंग

2009 में, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (BMGF) नाम के एक NGO ने दुनिया के कुछ सबसे गरीब, सबसे कमजोर बच्चों के लिए एक वैक्सीन का ट्रायल किया। लेकिन लोगों को इससे होने वाले खतरों के बारे में जानकारी नहीं दी गयी। उन्होंने यह टेस्ट बिना किसी घोषणा के किया। इस टेस्ट के लिए उन्होंने न ही तो बच्चों को बताया और न ही उनके माता पिता को।

कहाँ हुई थी टेस्टिंग

टेस्टिंग खम्मम में हुई थी। उस समय खम्मम जिला पूर्वी राज्य आंध्र प्रदेश का एक हिस्सा था (2014 के बाद अब यह हिस्सा तेलंगाना में आता है)। यह जगह मुख्य रूप से ग्रामीण है और इसे भारत के सबसे गरीब और सबसे कम विकसित भागों में से एक माना जाता है।

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कौन रहता है खम्मम में

खम्मम कई जातीय जनजातीय समूहों का घर है। इसकी जनजातीय आबादी का लगभग 21.5% (लगभग 600,000 लोग) हैं। जैसा कि दुनिया भर के स्वदेशी लोगों के लिए आम है। खम्मम के आदिवासी समूह को शिक्षा के लिए जूझना पड़ता है। उनकी साक्षरता का स्तर पूरे क्षेत्र की तुलना में बहुत कम है।

ग्रेटगेमइंडिया इंडिया की रिपोर्ट क्या कहती है

ग्रेटगेमइण्डिया में पब्लिश हुई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2009 के समय खम्मम जिले में लगभग 14,000 लड़कियों को गार्डासिल का इंजेक्शन लगाया गया था।

Path project के लिए ली गई लड़कियों की उम्र 10 से 14 वर्ष के बीच थी और सभी कम आय वाले, आदिवासी परिवार से आई थीं। कई लड़कियां अपने परिवार के साथ नहीं रहती थीं। इसके बजाय वे आश्रम पाठशालाओं (सरकारी छात्रावास) में रहते थीं। जो उन स्कूलों के पास स्थित थे जिनमें बच्चे पढ़ते थे।

प्रोफेसर लिन्से मैकगोई का क्या कहना है

एसेक्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लिन्से मैकगोई ने बाद में कहा कि आश्रम के स्कूलों में लड़कियों को प्रोजेक्ट के लिए टारगेट किया गया था क्योंकि यह “शॉट्स के लिए माता-पिता की अनुमति लेने की जरूरत को दूर करने के लिए” एक रास्ता था।

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PATH Project को क्यों किया बन्द

मार्च 2010 में, समा के दोस्तों ने उभरती कहानियों के बारे में ज्यादा जानने के लिए खम्मम का दौरा किया। उन्हें बताया गया कि 120 लड़कियों को टेस्टिंग के बाद परेशानी हुई जिनमें मिरगी के दौरे, पेट में तेज दर्द, सिरदर्द और अजीब सा व्यवहार शामिल हैं।

बाद में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने PATH प्रोजेक्ट को बन्द कर दिया गया। इस पॉइंट पर भारतीय संसद में हेल्थ रिलेटेड स्थायी समिति ने मामले की जांच शुरू की।