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किसान आंदोलन : किसानों की क्या हैं मुख्य मांगे ?

किसानों की मांगे
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किसानों की मांगे : केंद्र सरकार का प्रस्ताव ठुकराते हुए किसान संगठनों ने अपनी प्रमुख मांगों पर टस से मस न होने की बात कही। किसान संगठनों ने चेतावनी दी कि आंदोलन अब और तेज़ किया जाएगा। रोज़ बीजेपी के मंत्रियों का घेराव भी किया जाएगा।

कृषि संगठनों का क्‍या है आरोप?

कुछ किसान समूहों ने आरोप लगाया है कि अडाणी ग्रुप ऐसी फैसिलिटीज तैयार कर रहा है जहां अनाज स्‍टोर करके रखा जाएगा और बाद में उन्‍हें ऊंची कीमत पर बेचा जाएगा। वहीं, कंपनी ने अपने ताजा बयान में कहा है कि ‘वर्तमान मुद्दों के सहारे जिम्‍मेदार कॉर्पोरेट पर कीचड़ उछालने की कोशिश की जा रही है।’

मुकेश अंबानी और गौतम अडानी, दोनों की नजरें भारत के कृषि क्षेत्र पर हैं।  साल 2017 में अंबानी ने कृषि क्षेत्र में निवेश की अच्‍छा जताई थी। जियो प्‍लेटफॉर्म की फेसबुक के साथ पार्टनरशिप हुई है। जियोकृषि नाम का एक ऐप भी है जो खेत से प्‍लेट तक सप्‍लाई चेन तैयार करेगी।

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किसान को इस बात का डर है कि नई व्यवस्था में मंडी और एमएसपी (मिनिमम सपोर्ट प्राइस) प्रणाली ख़त्म कर दी जाएगी और सरकार उनसे गेहूं और चावल लेना बंद कर देगी। उन्हें अपना माल प्राइवेट कंपनियों और बड़े कॉर्पोरेट घरानों को बेचना पड़ेगा जो उनका शोषण कर सकते हैं। लेकिन केंद्र सरकार ने उन्हें यक़ीन दिलाया है कि ये प्रणाली चलती रहेगी और किसानों को चिंता करने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है।

किसानों की मांगे ?

  • किसानों की मांग है कि अगर कोई कृषक आत्महत्या कर लेता है तो उसके परिवार को केंद्र सरकार से आर्थिक मदद मिले।
  • किसान चाहते हैं कि 21 फसलों को MSP का लाभ मिले। फिलहाल किसानों को सिर्फ गेहूं, धान और कपास पर ही MSP मिलती है।
  • किसानों की मांग है कि इस आंदोलन के दौरान जितने भी किसानों पर मामले दर्ज हुए हैं, उन्हें वापस लिया जाए।
  • किसान चाहते हैं कि केंद्र द्वारा मानसून सत्र में पारित कराए गए तीनों कानून वापस लिए जाएं।
  • किसानों की मांग है कि मिनिमम सपोर्ट प्राइस यानी MSP हमेशा लागू रहे।
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किसान समुदाय को आशंका है कि केंद्र सरकार के कृषि संबंधी कानूनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और किसानों को बड़े औद्योगिक घरानों की ‘अनुकंपा’ पर छोड़ दिया जाएगा।

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