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फेलोशिप में वृद्धि के लिए क्यों हर बार सड़कों पर उतरते हैं रिसर्च स्कॉलर?

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कोमल बड़ोदेकर | नई दिल्ली, 3 नवंबर 

नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट/NET), ग्रेजुएट एप्टीट्यूट टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट/GATE) सहित कई अन्य परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले युवाओं को यूजीसी सहित कई अन्य एजुकेशन फंडिग एजेंसी से मिलने वाली फेलोशिप बीते चार वर्षों से नहीं बढ़ी है। बीते चार सालों में महंगाई का स्तर भले ही कई गुना बढ़ गया हो लेकिन ये रिसर्चर आज भी पुराने मानदेय और भत्ते पर अपना गुजारा कर रहे हैं।

फेलोशिप के तहत मिलने वाली राशि और भत्ता सहित अपनी तमाम मांगों को लेकर देशभर के कई रिसर्च फेलो लैब और इंस्टिट्यूट से निकल सड़कों पर उतर आंदोलन करने के लिए मजबूर हैं। हांलाकि यह पहला मौका नहीं है जब देश भर के लाखोंं जूरनियर रिसर्च फेलो और सीनियर रिसर्च फेलो मानदेय बढ़ाने के लिए इस तरह अपनी आवाज बुलंद कर रहे हो।

इससे पहले फेलोशिप के तहत मिलने वाली राशि और भत्ता बढ़ाने के लिए साल 2014 में भी कुछ इसी तरह हजारों रिसर्च फेलो ने आंदोलन कर सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया था। शायद यही कारण है कि सरकार अब तक ऐसी कोई पॉलिसी नहीं ला पाई है जिससे बिना आंदोलन के ही इन रिसर्चर्स की आवाज सुनी जाए।

दिल्ली में आंदोलन करते हुए रिसर्च स्कॉलर्स।

इस मामले में ग्राउंड रिपोर्ट से बातचीत करते हुए सोसायटी ऑफ यंग साइंटिस्ट के अध्यक्ष और पीएचडी स्कॉलर लाल चंद विश्वकर्मा ने बताया कि हम अपनी तमाम समस्याओं को लेकर 29 अगस्त 2018 को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से मिले। इस दौरान डॉ. हर्षवर्धन ने फंड बढ़ाने पर सहमति जताई, साथ ही नियम कानून कायदों की सीख देते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत प्रोफेसर आशुतोष शर्मा (Secretary to the Government of India, Department of Science and Technology) से मुलाकात करने को कहा।

12 सितंबर 2018 को प्रोफेसर आशुतोष से मुलाकात कर रिसर्च फेलो ने अपनी समस्याओं को बताते हुए कहा कि, देश भर के तमाम जेआरएफ और एसआरएफ को मिलने वाला मानदेय और भत्ता कम है। ये मानदेय और भत्ता हर वर्ष 15 फीसदी के हिसाब से हर चार साल में बढ़ता है। जबकी अब चार साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद फेलोशिप की रकम अब तक नहीं बढ़ पाई।

खास बात यह है कि डीएसटी सेक्रेटरी आशुतोष शर्मा से मुलाकात के बाद रिसर्च फेलो के लिए सरकारी दफ्तर में चक्कर काटने का सिलसिला शुरू हो गया। सही भी है। होना भी चाहिए। प्राइमरी शिक्षा की पोल खोलते सरकारी स्कूलों से सभी वाकिफ है अब देश को भी यह पता चलना चाहिए कि हायर एजुकेशन तक पहुंचने वाले चंद युवा कैसे सरकारी तंत्र के आगे ‘मुसद्दीलाल’ बन जाते हैं।

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बहरहाल, लैब, विश्वविद्यालयों, इंस्टिट्यूशंस में रिसर्च कर रहे फेलो इन दिनों मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी के गोल-गोल चक्कर काटने को मजबूर हैं। एमएचआरडी ज्वाइंट सेक्रेटरी मनोज केजरीवाल, एडिशनल सेक्रेटरी सुखबीर सिंह संधू के दफ्तर में 10 से भी अधिक बार चक्कर काटने के बावजूद बात नहीं बनीं। यूजीसी सेक्रेटरी प्रोफेसर रजनीश जैन के दफ्तरों में कई बार मत्था टेका लेकिन प्रोफेसर रजनीश साहब ने इन रिसर्च फेलो को एक बार फिर एमएचआरडी का रास्ता बता दिया।

दिल्ली में आंदोलन करते रिसर्च स्कॉलर्स।

आलम यह है कि रिसर्च फेलो भी शायद यह समझ गए हैं कि ये लोकतंत्र है जहां बिना आंदोलन के शायद पत्ता भी नहीं हिलता। वैसे कई आंदोलकारी सालों से गला फाड़ रहे हैं, लेकिन उम्मीद है कि 2011 में हुए अन्ना आंदोलन की तरह इन रिसर्च फेलो का आंदोलन भी मोदी सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने में सफल हो।

बीते दिनों पुणे स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन और रिसर्च (Indian Institute of Science, Education and Research/IISER) और काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रीयल रिसर्च (Council of Scientific & Industrial Research/CSIR) के अंतर्गत आने वाली नेशनल केमिकल लेबोरेटरी (National Chemical Laboratory/NCL) के छात्र लैब से निकल पोस्टर लिए सड़कों पर उतरें।

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पुणे स्थित IISER के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए रिसर्च स्कॉलर्स। फोटो साभार, इंडियन एक्सप्रेस

IISER के रिसर्च फेलो सचिन ने ग्राउंड रिपोर्ट से बातचीत में कहते हैं कि, सरकार अब तक ऐसी पॉलिसी नहीं बना पाई है जिसमें रिसर्च फेलो के लिए आवंटित फंड की राशि बढ़े। हम हर बार सड़कों पर उतरते हैं। साल 2006, 2010, 2014 में फेलोशिप की रकम बढ़ाई गई थी। साल 2018 में समय निकल गया है लेकिन अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। यह भी तय नहीं है कि फेलोशिप के तहत मिलने वाला रुपया इस महीने आएगा कि नहीं। कभी ये रुपया छ महीने में आता है तो कभी साल भर में मिलता है।

रिसर्च फेलो की प्रमुख मांग-
1) जेआरएफ, एसआरएफ, पीएचडी कर रहे लोगों की फेलोशिप की रकम 15 फीसदी प्रतिवर्ष के हिसाब से 60 फीसदी बढ़ाई जाए। क्योंकि यह हर चार वर्ष में एक बार बढ़ती है।

2) फेलोशिप के तहत मिलने वाली यह रकम हर महीने समय पर आए, क्योंकि अब तक यह रकम कभी तीन महीने, छह महीने या कभी 8 महीने गुजर जाने के बाद मिलती है।

3) सरकार वेतन आयोग के तहत ऐसी गाइडलाइन बनाए जिससे यह तय हो कि फेलोशिप के तहत करने वाले रिसर्चर्स को हर महीने समय पर फेलोशिप की रकम मिले।

साल 2014 में बढ़ी थी 55 फीसदी फेलोशिप
नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (NET), ग्रेजुएट एप्टीट्यूट टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) उत्तीर्ण युवाओं को यूजीसी की ओर से दिए जाने वाली फेलोशिप में पिछली बार करीब 55 फीसदी वृद्धी की गई थी। यूजीसी ने उच्च शिक्षा के लिए मिलने वाली करीब 15 फेलोशिप और स्कॉलरशिप की राशि को 55 प्रतिशत तक बढ़ाया और इसे 1 दिसंबर 2014 से लागू किया था।

2014 में लागू किए गए नए नियम के मुताबिक जहां जेआरएफ और एसआरएफ छात्रों को क्रमश: 16 हजार और 18000 रुपये प्रतिमाह मिलते थे वहीं अब इन्हें क्रमश: 25000 और 28000 रुपये मिल रहे हैं। इसके साथ ही  20 फीसदी आवास भत्ता इसके अतिरिक्त सुनिश्चित है।

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बेसिक साइंटिफिक रिसर्च (बीएसआर) के लिए पहले और दूसरे साल में 16,000 रुपये को बढ़ाकर 24,800 रुपए प्रतिमाह किया गया है। जबकी तीसरे, चौथे और पांचवे साल में मिलने वाली 18,000 रुपये प्रतिमाह फेलोशिप की जगह 27,900 रुपए प्रति माह सुनिश्चित है।

इसी तरह एमई, एमटेक और एमफार्मा के लिए गेट या जीपेट उत्तीर्ण छात्रों को 8000 रुपये की जगह 12,400 रुपए प्रतिमाह फेलोशिप मिल रही है। लेकिन छात्रों का आरोप है कि यह फेलोशिप समय के साथ बढ़नी चाहिए और जो फेलोशिप मिल रही है वह भी समय से नहीं मिल रही है।

इन फेलोशिप की राशि में हुई थी वृद्धि
साल 2014 में सरकार ने एमेरिट्स फेलोशिप, पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप (पीडीएफ) फॉर अन्एम्प्लायड वूमेन, एस. राधाकृष्णन पीडीएफ इन ह्यूमिनिटीज एंड सोशल साइंसेज,स्वामी विवेकानंद और इंदिरा गांधी एकल बालिका छात्रवृत्ति, जेआरएफ, एसआरएफ, जेआरएफ, पीडीएफ फॉर एससी/एसटी, पीजी स्कॉलरशिप फॉर प्रोफेशनल स्टडीज एसटी/एससी, गेट, जीमेट उत्तीर्ण, बेसिक रिसर्च फेलोशिप, डॉ.डीएस कोठारी पीडीएफ और बीएसआर फैकल्टी फेलोशिप के तहत मिलने वाली धनराशि में बढ़ोत्तरी की थी।

अब आगे क्या?
वर्तमान में देशभर में करीब एक लाख से अधिक रिसर्च फेलो है। फेलोशिप की रकम में वृद्धी छ महीने पहले ही हो जानी थी लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया है। सोसायटी ऑफ यंग साइंटिस्ट के अध्यक्ष और पीएचडी स्कॉलर लाल चंद्र विश्वकर्मा कहते हैं कि फेलोशिप आंदोलन करने के बाद ही बढ़ती है। सरकार को पता है कि ये लोग आंदोलन करने आएंगे उसके बाद ही इनकी बात सुनी जाएगी। लाल चंद ने साफ कहा है कि अगर दिसंबर तक हमारी मांगे पूरी नहीं होती है तो जनवरी में सरकार के खिलाफ ‘हल्ला बोल’ होगा।

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