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दिल्ली की सड़कों पर आख़िर क्यों रात गुज़ारने को मजबूर हैं ये विकलांग परीक्षार्थी?

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Ground Report । Nehal Rizvi

2018 में रेलवे भर्ती बोर्ड के ग्रुप डी की परीक्षा में जिन विकलांगों ने लिखित परीक्षा पास कर ली था, वो सब अब तमाम राज्यों से हज़ारो किलोमीटर का सफ़र तय करके अपनी शिकायतों को लेकर दिल्ली के मंडी हाउस पर स्थित विकलांग व्यक्तियों के आयुक्त का कार्यालय आए हैं।

फ़ोटो साभार- सोशल मीडिया-सुशील महापात्रा

ये सभी परीक्षार्थी दिल्ली के विकलांग व्यक्तियों के आयुक्त का कार्यालय इसलिए आए हैं क्योंकि यहीं पर इन छात्रों ने शिकायत की है कि रेलवे उनके सवालों का जवाब नहीं दिया है। बुधवार को यहां रेलवे को अपना पक्ष रखना था मगर रेलवे की तरफ से कोई नहीं आया। छात्रों का यह समूह आयुक्त के दफ्तर के बाहर जमा हो गया। नारे लगाने लगा। इंसाफ मांगने लगा। कोई नहीं आया लेकिन ये किसी के भरोसे नहीं, अपने इरादे के भरोसे दिल्ली आए हैं।

फ़ोटो साभार- सोशल मीडिया-सुशील महापात्रा

मामला यह है कि रेलवे ने जब ग्रुप डी का रिज़ल्ट निकाला तो विकलांग श्रेणी में प्रदर्शन में शामिल छात्र पास हो गए। रिज़ल्ट में उनका नाम था और उनसे कहा गया कि आप सभी के दस्तावेज़ों की जांच होगी। ज़ाहिर है पास होने की खुशी किसी ने नहीं होगी। ये छात्र डाक्यूमेंट बनवाने में जुट गए। लेकिन कुछ दिन के बाद रेलवे इस परीक्षा में सीट बढ़ा देती है।

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फ़ोटो साभार- सोशल मीडिया-सुशील महापात्रा

रेल मंत्री आराम से सो रहे होंगे, मीडिया वाले भी आराम कर रहे हैं लेकिन दिल्ली की मंडी हाउस के सर्किल पर यह विकलांग युवा जाग रहे हैं। कोई 50 घंटे सफर करके आया है तो कोई 40 घंटे। थकावट बहुत है लेकिन नौकरी से बड़ी थकावट नहीं है। आंखों में नींद है लेकिन नौकरी की चिंता ने इनकी नींद उड़ा ली है। चयन होने के बावजूद भी यह आज बेरोजगार है। इन मे से कोई चल नहीं पा रहा है तो कोई देख नहीं पा रहा है।

फ़ोटो साभार- सोशल मीडिया-सुशील महापात्रा

रेलवे में ग्रुप D के लिखित परीक्षा में यह युवा सब पास हो गए थे। कहा गया था कि दुक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा लेकिन कभी बुलाया ही नहीं गया। दोबारा रिवाइज रिजल्ट आया तो इनका कहा गया कि आप रेलेक्ट नहीं हुए हैं। जिन्हें कोई कारण नहीं बताया गया।विकलांग कोर्ट में इन लोगों की केस चल रहा है। आज चौथी बार था जब रेलवे बोर्ड अपना पक्ष रखने के लिए कोर्ट नहीं पहुंचा।

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फ़ोटो साभार- सोशल मीडिया-सुशील महापात्रा

इनमें कई महिलाएं भी है जो अकेले बस और ट्रेन सफर करके दिल्ली पहुंची है। सोचिए अपने केस के लिए यह युवा 40 घंटे सफर करके दिल्ली पहुंचे लेकिन रेलवे बोर्ड दिल्ली में होते हुए भी हाज़िर नहीं हुआ। मीडिया वाले भी इनके समस्या दिखाने नहीं पहुंचे। बाकी सब आप समझ लीजिए। कल इनके नाम बदलकर कुछ रख लीजिए उनका समस्या का समाधान नहीं होने वाला।

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