Why are farmers protesting against new agriculture laws 4 reasons of biggest resentment and agitation of farmers

क्या है किसानों की सबसे बड़ी नाराजगी और आंदोलन का कारण, 4 खास बातें

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Farmers Protesting against New agriculture laws: देश भर में मोदी सरकार के खिलाफ किसान आंदोलन हो रहा है। वहीं राजधानी दिल्ली में भी किसानों का जमकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। कुछ जगह दो किसानों और पुलिस के बीच जमकर झड़प हुई। पंजाब और हरियाणा के किसान ‘दिल्ली चलो’ नारे के साथ दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं। अखिल भारतीय किसान संगठन ने बताया कि देश भर के किसान यह आंदोलन सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ केंद्र में बैठी मोदी सरकार उसके सहयोगी दलों के खिलाफ भी आंदोलन कर उसके तीन कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध (Farmers Protesting against New agriculture laws) दर्ज कर रही है। लेकिन सवाल ये है कि किसान आंदोल कर क्यों कर रहे हैं? हम आपको बताते हैं-

1) किसानों की सबसे बड़ी नाराजगी और आंदोलन का कारण
देश भर के किसानों की सबसे बड़ी नाराजगी और मोदी सरकार के खिलाफ उनका राष्ट्रव्यापी आंदोलन करने का सबसे बड़ा कारण है नया कृषि कानून। नए कृषि कानून के चलते न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के खत्म होने का डर है। देश भर के किसान अब तक अपनी फसलों को आस-पास की मंडियों में बेचते आए हैं। किसान जिन फसलों को आस-पास की मंडियों में बेचते आए हैं उसका न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी सरकार तय करती थी। वहीं इस नए किसान कानून के बाद सरकार ने कृषि उपज मंडी समिति से बाहर कृषि कारोबार को मंजूरी दे दी है। जिसके चलते अब किसानों को डर है की उन्हें उनकी फसलों का उचित दाम नहीं मिल पाएगा। (Farmers Protesting against New agriculture laws)

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2) नए कानून में मंडी की जगह अब कारोबारी सीधे किसानों से अनाज खरीदेंगे
किसान चाहते हैं कि सरकार ये कानून वापस ले। किसानों के विरोध प्रदर्शन का सबसे व्यापक असर पंजाब और हरियाणा में देखने को मिल रहा है क्योंकि ये ऐसे राज्य हैं जहां की मंडियों से सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व मिलता है। नए कानून से अब कारोबारी सीधे किसानों से अनाज खरीदेंगे। जिसके चलते कारोबारी मंडियों में दिए जाने वाले टैक्स यानी मंडी टैक्स से बच जाएंगे। इसका सीधा असर किसान की फसलों की कीमत के साथ-साथ राज्य के राजस्व पर भी पड़ने की आशंका है।

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3) सरकार और बिल के बीच असमंजस
वहीं मोदी सरकार सफाई दे रही है कि नए एग्रीकल्चर कानून के बावजूद वह एमएसपी जारी रखेगी और देश में कहीं भी मंडियों को बंद नहीं किया जाएगा। सरकार ये बात सिर्फ कह रही है लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक नए कानून में उसने इन बातों को जोड़ा ही नहीं है। इससे सरकार का न सिर्फ दोहरा चरित्र सामने आया है बल्कि देशभर के किसानों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है और एक असमंजस की स्थिति बन गई है।

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4) तो देशभर में खत्म हो जाएगी अनाज मंडी, व्यापारियों के हवाले होगा किसान
सरकार ने नए किसान कानून में जिस व्यवस्था को जोड़ा है उसमें कारोबारी किसान से मंडी के बाहर अनाज खरीद सकते हैं। अब तक मंडी में किसान से अनाज की खरीद पर व्यापारी को 6 से 7 प्रतिशत का टैक्स देना होता था। वहीं मंडी के बाहर अनाज की खरीद पर किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं देना होगा। इससे आने वाले समय में मंडियां पूरी तरह से खत्म हो जाएंगी और किसान सीधे तौर पर व्यापारियों के हवाले होगा। उसे उनकी फसल पर तय दाम से ज्यादा या कम भी मिल सकता है।

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बता दें कि किसान आंदोलन के चलते दिल्ली हरियाणा की पुलिस ने चौकसी बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अतिरिक्त 12 कंपनियों की फोर्स बाहर से बुलाई गई है। इनमें सीआरपीएफ और आरएएफ के जवान शामिल हैं। वहीं फरीदाबाद के जिलाधीश यशपाल यादव ने जिले में धारा-144 लागू कर दी है।

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