फसलों पर MSP

किसान अपनी फसलों पर MSP के लिए लड़ाई क्यों लड़ रहे हैं ?

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नीचे दी गई फोटो को देखिए ये पूरी कहानी आपको समझ आ जाएगी। सरकार जिस ओपन मार्केट की दुहाई दे रही है कि किसान अपनी फसलों को बेचकर मुनाफा कमा लेंगे उसका हाल कैसा है वो देखिए। किसान अपनी फसलों पर MSP के लिए लड़ाई क्यों लड़ रहे हैं ?

फसलों पर MSP के खेल को समझें

हरियाणा की होडल मंडी में गेंहू की कीमत पिछले 6 महीनों में-जून में 1850 तक गई। नवंबर तक आते आते 1650-1700 रुपये प्रति क्विंटल के दाम से डोल रही है।

जबकि पांच महीने बाद तो गेंहू को मंहगा होना चाहिए क्योंकि गेंहू के रखरखाव पर भी खर्चा है। ये हाल इस साल का नहीं है पिछले कई सालों से ऐसा ही है। यही हाल नरेला मंडी का है यही हाल पंजाब की खन्ना मंडी का है।

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अब आप ही बताइये कि कौन सा ऐसा प्राइवेट प्लेयर है जो किसानों की गेंहू को MSP रेट जो 1925 है उस पर खरीद लेगा । प्राइवेट प्लेयर खरीदेंगे तो जरूर लेकिन अपने रेट पर ही खरीदेंगे।  ओपन मार्केट में क्या किसान टिक पाएगा.. ओपन मार्केट गेंहू उगाने वालों को एक ही झटके में निगल जाएगी।

दूसरी बात पेट्रोल, डीजल, खाद सबसे दाम हर नए दिन बढ़ रहे हैं ऐसे में किसान को एक बेसिक सुरक्षा तो देनी ही होगी. इसी बेसिक सुरक्षा का नाम MSP है जिसकी मांग किसान कर रहे हैं ।

सरकार अगर लाइफ सेविंग ड्र्ग्स के रेट को कंट्रोल कर सकती है तो फिर कम से कम देश की तीन बड़ी फसलें, चावल, गेंहू, मक्के को भी कर सकती हैं जिससे लाखों किसानों का जीवन जुड़ा हुआ है।  किसान इस सरकार से चांद नहीं मांग रहे जो इतनी मुश्किल हो रही है।

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Abhinav Goel की रिपोर्ट

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