बहुत हुई महंगाई की मार, 30 रुपये प्रति लीटर वाला पेट्रोल-डीजल कैसे पहुंचा 80 के पार, यहां समझें

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नई दिल्ली, 11 सितंबर। देश भर में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर संग्राम मचा हुआ है। मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने में विफल साबित हो रही है। वहीं विपक्षी दल इसका तीखा विरोध कर रहे हैं। बीते दिन 10 सितंबर को इसके विरोध में भारत बंद किया गया। लेकिन बढ़ा सवाल यह है कि आखिर क्या कारण है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमते अचानक इतनी तेजी से हर दिन बढ़ रही है। आखिर क्या कारण है कि 30 रुपये प्रति लीटर मिलने वाला पेट्रोल और डीजल 80 रुपये प्रति लीटर से भी महंगा बिक रहा है।

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दरअसल, विश्व में इस वक्त क्रूड आयल यानी कच्चे तेल की कीमते बीते कई दिनों में बढ़ी है लेकिन यह एक मात्र वजह नहीं है जिससे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान पर पहुंची हो। उदहारण के तौर पर देखें तो 10 सितंबर 2018 को कच्चे तेल की कीमत 4,883 रुपये प्रति बैरल है। एक बैरल में 159 लीटर होते है। इस लिहाज से देखा जाए तो भारत में आयात होने वाले तेल की कीमत मात्र 30.71 रुपये है, लेकिन बावजूद इसके देश में पेट्रोल की कीमत 80 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई है।

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भारत में पेट्रोल और डीज़ल के दामों के आसमान छूती कीमतों का सबसे बड़ा कारण है उस पर लगने वाले नाना प्रकार के टैक्स। बता दें कि पेट्रोल-डीजल उन चीजों में शामिल है जिसमें केन्द्र और राज्य सरकार मोटा टेक्स लगाकर जनता की जेब को चपत लगाती है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक हम जिस कीमत पर पेट्रोल खरीदते हैं उसका सिर्फ 48 फीसदी उसका निर्माण मूल्य होता है जबकि बाकि का पूरा हिस्सा सरकार का टैक्स होता है।

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भारत में विदेशो से आयत किये गए क्रूड ऑइल को रिफाइनरीज में पहुंचा कर प्रोसेस किया जाता है। इसके बाद इसे पेट्रोल पंपों तक पहुंचाया जाता है। इसमें लगने वाली लागत कुछ इस प्रकार है। एंट्री टैक्स, रिफाइनरी प्रोसेसिंग व अन्य ऑपरेशन कॉस्ट मिलकर पेट्रोल पर 3.68 रुपये और डीजल पर 6.37 रुपये प्रति लीटर की अतिरिक्त लागत आती है।

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इसके बाद ऑइल मार्केटिंग कंपनियों की मार्जिन, फ्रेट कॉस्ट और ढुलाई मिलाकर पेट्रोल पर 3.31 रुपये और डीजल पर 2.55 रुपये प्रति लीटर जोड़े जाते है। इस तरह से पेट्रोल के दाम अब 37.70 रुपये जबकि प्रति लीटर और डीजल के 39.63 रुपये होते है।

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वर्तमान में केन्द्र में बैठी मोदी सरकार फिलहाल पेट्रोल पर 19.48 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 15.33 रुपये प्रति लीटर का एक्साइज टैक्स वसूल रही है। इस ड्यूटी के लगने के बाद पेट्रोल की कीमत 37.70 रुपये से बढ़ कर 57.18 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 39.63 रुपये से बढ़ कर 54.96 रुपये पार हो जाती है। लेकिन फिर भी पेट्रोल 80 के पार कैसे पहुंच गया।

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दरअसल ये टैक्स केन्द्र सरकार ही नहीं बल्की राज्य सरकार भी वसूलती है। राज्य सरकारें इन कीमतों पर 20 से 30 फीसदी तक भारी भरकम टैक्स लगाती है लेकिन महाराष्ट्र सरकार 40 और मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार 35 फीसदी तक कर वसूल करती है। जबकी गोवा सरकार इन कीमतों सबसे कम महज 18 फीसदी टैक्स लगाती है। इन सबके बावजूद भी डीलरों का कमीशन होता है जो प्रति लीटर 3 रुपये से 4 रुपये तक होता है।

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यह कारण है कि 30 रुपये बिकने वाला पेट्रोल पहले 37 फिर केन्द्र सरकार के टैक्स के बाद 58 फिर राज्य सरकारों के टैक्स और डीलरों की कमीशन खोली के चलते 80 रुपये प्रति लीटर से भी ज्यादा महंगा हो चुका है। अगर केन्द्र और राज्य सरकार इस पर लगने वाले टैक्सों पर थोड़ी राहत दे दें तो पेट्रोल 60 रुपये प्रति लीटर तक बिक सकता है।

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