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SC कॉलेजियम की लगी मुहर तो सौरभ किरपाल होंगे देश के पहले समलैंगिक जज

Saurabh Kirpal to be first homosexual judge of India
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अक्टूबर 2017 में दिल्ली हाई कोर्ट के कॉलेजियम ने सीनियर एडवोकेट सौरभ किरपाल (Saurabh Kirpal) को जज के तौर पर नियुक्त करने की अनुशंसा की थी। एक साल बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इसे अपने संज्ञान में लिया। लेकिन कोई फैसला नहीं किया। अब तक चार बार उनकी नियुक्ति के लिए अनुशंसा की जा चुकी है, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका है। आखिर क्यों?

कहां अटकी है सौरभ किरपाल की नियुक्ति?

  • अगर सौरभ किरपाल को हाई कोर्ट का जज बनाने पर कॉलेजियम मुहर लगा देगा तो वो देश के पहले समलैंगिक जज होंगे।
  • सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सौरभ का नाम सरकार को भेजा है लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर आपत्ति दर्ज की है।
  • मार्च 2021 में चीफ जस्टिस बोबड़े ने कानून मंत्री रवी शंकर प्रसाद को पत्र लिखकर कहा कि सरकार सौरभ किरपाल को दिल्ली हाई कोर्ट के पर्मानेंट जज के रुप में नियुक्त करने पर अपना पक्ष रखे। पत्र में सरकार की ओर से हो रही देरी पर भी सवाल किया गया है।
  • सरकार की ओर से किरपाल की नियुक्ति पर कहा गया है कि उनके साथी दूसरे देश के नागरिक हैं, आईबी की इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक इससे देश की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
  • हालांकि इससे पहले भी कई जज रहे हैं जिनके जीवन साथी दूसरे देश के नागरिक रहे हैं। सरकार द्वारा दी जा रही दलील आसानी से गले नहीं उतरती।
  • सरकार द्वारा जताई गई आपत्ति के बाद अब यह फैसला चीफ जस्टिस बोबड़े को लेना है कि वो किरपाल को नियुक्त करते हैं या नहीं।
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क्या समलैंगिक व्यक्ति जज नहीं बन सकता?

सौरभ किरपाल मानते हैं कि उनकी नियुक्ति न होने के पीछे की मुख्य वजह उनका खुले तौर पर समलैंगिक होना है। वो कहते हैं कि एक वकील के तौर पर उनका करियर काफी सफल रहा है। जज के तौर पर नियुक्ति के लिए उनसे उनकी रज़ामंदी ली जा चुकी है। उनकी नियुक्ति से न्यायपालिका में विविधता आएगी।

सौरभ किरपाल, वरिष्ठ वकील

कौन हैं सौरभ किरपाल?

दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से फिज़िक्स पढ़ने के बाद किरपाल ने आक्सफोर्ड युनिवर्सिटी से कानून पढ़ा, मास्टर डिग्री कैंब्रिज युनिवर्सिटी से हासिल की। कुछ समय किरपाल जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र की सेवा में रहे। पिछले दो दशक से वो सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर पेश होते रहे हैं और मौलिक अधिकारों से संबंधित मामलों के पैरोकार रहे हैं।

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सौरभ किरपाल (Saurabh Kirpal) समलैंगिक हैं। भारत में समलैंगिकों को अधिकार दिलवाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है। उनकी सबसे बड़ी उपल्ब्धि नवतेज जोहर केस रहा, जिसके फैसले में आईपीसी की धारा 377 को खत्म कर दिया गया। यह धारा भारत में समलैंगिकता को अपराध बनाती थी।

सौरभ की LGBTQ+ समुदाय के लिए लड़ाई जारी है, दिल्ली हाई कोर्ट में सेम सेक्स मैरिज को लेकर उनकी याचिका पर सुनवाई लंबित है।

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