किसान नेता राकेश टिकैत

राकेश टिकैत: वो किसान नेता जिसके आंसू मोदी सरकार के लिए सैलाब बन गए हैं

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गणतंत्र दिवस पर किसान ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा के बाद ऐसा लग रहा था कि अब किसान आंदोलन खत्म हो जाएगा। लाल किले पर उग्र भीड़ ने कब्ज़ा कर अपना झंडा क्या टांगा पूरे देश में किसान आंदोलन की आलोचना होने लगी। पिछले 70 दिनों से दिल्ली की तमाम बॉर्डर पर तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी धरना प्रदर्शन ठंडा पड़ने लगा था। किसान नेताओं पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। संयुक्त किसान मोर्चा के साथी साथ छोड़ कर जाने लगे थे। पुलिस द्वारा धर्ना स्थल खाली काराया जाने लगा था। प्रशासन द्वारा किसानों पर की जा रही कार्वाई से व्यथित भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत (Who is Rakesh Tikait) मंच पर रो पड़े। उनका यह वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया और अपने नेता के आंसू देख किसान दोबारा धरना स्थल पर लौटने लगे। शांत हो चुका आंदोलन एक बार फिर धधक उठा और पहले से भी बड़ा हो गया।

आईये जानते हैं कौन हैं किसान नेता राकेश टिकेत, जिनकी एक आवाज पर किसान जीने-मरने पर उतारू हो जाते हैं।

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राकेश टिकैत से जुड़ी दिलचस्प बातें-

  1. मुजफ्फरनगर जनपद के सिसौली गांव में 4 जून 1969 में जन्मे राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन के मुखिया हैं।
  2. वो जाने माने किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे हैं। राकेश कई वर्षों से किसानों के हित के लिए संघर्ष करते रहे हैं। वह लगातार किसानों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाते रहे हैं। इसके लिए वो 44 बार जेल भी जा चुके हैं।
  3. मध्य प्रदेश में भूमि अधिकरण कानून के खिलाफ हुए आंदोलन के चलते राकेश टिकैत को 39 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था।
  4. राकेश टिकैत वर्ष 1992 में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर नौकरी करते थे। 1993-1994 में राकेश टिकैत के पिता लाल किले पर आंदोलन कर रहे थे। सरकार ने राकेश टिकैत को आंदोलन खत्म कराने को कहा। इसके बाद उन्होंने सरकार का आदेश न मानने का फैसला किया और नौकरी छोड़ खुद भी आंदोलन में कूद गए।
  5. पिता महेंद्र सिंह टिकैत की कैंसर से मृत्यु के बाद राकेश टिकैत ने पूरी तरह भारतीय किसान यूनियन की कमान संभाल ली।
  6. राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता हैं और उनके बड़े भाई नरेश टिकैत अध्यक्ष।
  7. भारतीय किसान यूनियन की स्थापना 1987 में हुई थी।
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किस ओर जा रहा है किसान आंदोलन?

किसान आंदोलन अब धार पकड़ रहा है। हरियाणा की तमाम खाप पंचायतों ने किसान आंदोलन को समर्थन कर दिया है। पश्चिमी यूपी और हरियाणा में प्रभाव रखने वाले राकेश टिकैत किसान महापंचायतों में हिस्सा ले रहे हैं जहां से इस आंदोलन को धार मिलने की उम्मीद है। अंतर्राष्ट्रीय जगत से भी किसान आंदोलन को समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा अब राजनीतिक दलों को भी आंदोलन में शामिल होने की अनुमति दे दी गई है। इस स्थिति को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अब यह आंदोलन और बड़ा होने जा रहा है।

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