मनदीप पूनिया

कौन है मनदीप पूनिया? जानिए उनकी पूरी कहानी

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बीते शनिवार सिंघु बॉर्डर से गिरफ़्तार किए गए पत्रकार मनदीप पुनिया दिल्ली की रोहिणी कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद बुधवार देर रात रिहा हो गए.

जेल से बाहर आकर मनदीप पुनिया ने कहा है कि वे पत्रकारिता के प्रति अपने कर्तव्य को निभाना पहले की तरह जारी रखेंगे. मनदीप पुनिया दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन को कवर कर रहे हैं.

दिल्ली पुलिस ने उन्हें बीते शनिवार सिंघु बॉर्डर से गिरफ़्तार कर लिया था. उन पर सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने, जान-बूझकर व्यवधान डालने और गै़र-क़ानूनी हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए गए थे. दिल्ली पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ भारतीय दण्ड संहिता की धारा -186, 353, 332 और 341 के तहत मुक़दमा दर्ज किया है.

मनदीप पुनिया को ज़मानत देते हुए कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि अभियुक्त को न्यायिक हिरासत में रखना उचित नहीं है. लेकिन पुनिया पहले ऐसे पत्रकार नहीं हैं जिन पर किसान आंदोलन कवर करते हुए एफआईआर हुई हो.इस समय राजदीप सरदेसाई जैसे वरिष्ठ पत्रकारों से लेकर युवा पत्रकारों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई हैं.ऐसे में ये सवाल उठता है कि भारत में पत्रकारिता करना कितना मुश्किल है.

मनदीप पूनिया पूरी कहानी को उनके मित्र और चर्चित लेखक श्याम मीरा सिंह ने बताई है। श्याम मीरा सिंह ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है कि मनदीप पूनिया एक फ्रीलांस पत्रकार है, उसने साल 2017-18 में IIMC (Indian Institute of mass communication) से पढ़ाई की. साल 2018 में मनदीप IIMC प्रशासन के खिलाफ ‘हॉस्टल’ की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे.

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तीन दिन तक चली उस भूख हड़ताल के बाद प्रशासन को पीछे हटना पड़ा और आने वाले बैच के लिए होस्टल देना पड़ा. आज उस हॉस्टल में 42 बच्चों को रहने के लिए जगह मिलती है. चूंकि मैं भी उनके साथ पढ़ा हूँ. हम दोनों क्लासमेट थे. मनदीप को मैं बहुत नजदीक से जानता हूँ. उसे पैसों का मोह नहीं है, IIMC से पढ़ने के बाद मनदीप ने बहुत जगह जॉब नहीं देखीं, उसने मीडिया में चुनिंदा जगहों को ही अपने काम के लायक समझा. वह मीडिया से निराश था ही कि

इसी बीच उसके पिता दुनिया छोड़कर चले गए, मीडिया की हालत देखकर मनदीप अपने गांव लौट गया और वहां जाकर खेती करने लगा. लेकिन खेती सिर्फ इसलिए की ताकि पेट भरता रहे और और जहां-तहां आंदोलनों की रिपोर्ट करने के लिए आने-जाने का किराया आ जाया करे. मनदीप ने खेती की लेकिन मीडिया नहीं छोड़ी, उसने उन ऑनलाइन पोर्टलों के लिए कम पैसों में लिखा जो जन पत्रकारिता कर रहे हैं. जो हर अत्याचार के खिलाफ मुखर होकर बोलते हैं.

मनदीप ने अंग्रेजी की प्रतिष्टित मैगज़ीन ‘CARAVAN’ के लिए भी एक से एक संवेदनशील रिपोर्ट लिखी, जिसमें छपना न जाने कितनों का सपना होता है. लेकिन बीते दो महीनों से वो केवल और केवल किसानों के मुद्दों पर लिख रहा है. वह आमतौर पर किसान आंदोलनों के टैंटों में ही सोता, वहीं खाता. और वहीं से किसानों पर हो रहे सरकारी अत्याचार के बारे में पल-पल की अपडेट देता रहा. कल भाजपा के गुंडे ‘स्थानीय लोगों’ के भेष में किसानों पर पत्थर बरसाने पहुंचे. मनदीप उस वक्त मंच के पास ही मौजूद था.

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चूंकि वह वहीं हरियाणा का ही रहने वाला है इसलिए आसपास के नेताओं, विधायकों, उनके चमचों और गुंडों को पहचानता है. उसने भाजपा के गुंडों को पहचान लिया. सुबह उसने फेसबुक पर लाइव करके उन सबके नाम ले लेकर उन्हें एक्सपोज किया और ये भी बताया कि वे भाजपा में किस पद पर हैं. स्वभाविक है जिन-जिन भाजपा नेताओं और गुंडों के नाम लिए गए मनदीप उनके निशाने पर आ गया.

मनदीप ने ये भी खुलासा किया कि उसने अपनी आँखों से देखा कि किस तरह पुलिस खड़े होकर भाजपा के गुंडों से निहत्थे किसानों पर पत्थर बरसा रही है. मनदीप ने ये सब बाकायदा सबूतों, फोटो और विडियो के आधार पर एक्सपोज किया. स्वभाविक है मनदीप पुलिस के भी टारगेट पर आ गया था. सुबह मनदीप ने विडियो बनाई और शाम को पुलिस ने सिंघु बॉर्डर से मनदीप को अरेस्ट कर लिया.

मनदीप जब तक सड़क पर था वह आप लोगों के लिए रिपोर्ट करता रहा. बिना कभी पैसों का लोभ लालच किए, पत्रकार से ज्यादा वो आप सब को अपना भाई और अपना परिवार मानता था, इसलिए खाली पेट पत्रकारिता की, मुझे पता है तंगहाली के दिनों में भी मनदीप ने कितनी अच्छी खबरें की हैं. और वो कैसे कैसे अपनी रात दोस्तों के यहां बिताया करता था, कैसे आर्थिक स्थिति से लड़ता था.

उसने जमीन पर अनाज बोया और उसी के पैसों से जमीन की पत्रकारिता की. मनदीप जब तक सड़क पर था तब तक उसने आपसे कुछ नहीं माँगा. आज वो जहां भी होगा, पता नहीं कैसा होगा, किस हाल में होगा, पुलिस उसके साथ क्या कर रही होगी, लेकिन उसके मन में एक उम्मीद जरूर होगी कि जिन लोगों के लिए वो सड़क पर खड़ा रहा, वे लोग उसके पिटने पर, उसके जेल जाने पर उसके साथ खड़े हुए और आखिर में वो पुलिस हिरासत से बाहर आया. अब आपको तय करना है कि उसने सही किया या ग़लत.

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