25 साल में 54 ट्रांसफ़र: जानिए कौन हैं निडरता से सरकार से सवाल करने वाले रि. IAS Surya Pratap Singh

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हर छोटे-बड़े मुद्दे पर अपनी बेबाक़ राय रखने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह(IAS Surya Pratap Singh) सरकार के निशाने पर बने रहते हैं। सरकार से लगातार सवाल करने वाले सूर्य प्रताप सिंह को सोशल मीडिया पर एक बेहद लोकप्रिय शख़्सियत हैं जिन्हें लोग काफ़ी पसंद करते हैं। हाल ही में ट्वीटर ने उनके अकाउंट को वैरिफाई करते हुए ब्लू टिक प्रदान किया है। रिटायर्ड आईएएस डॉ. सूर्य प्रताप की छवि एक तेज़तर्रार अफ़सर की रही है। बतौर आईएएस अधिकारी अपनी तेज़तर्रार छवि के चलते उनके 25 साल की सेवा में 54 ताबदले हुए। सर्विस के दौरान सूर्य प्रताप हमेशा अपने कार्यों के चलते चर्चा में बने रहे। रिटायर होने के बाद भी अपने तज़ुर्बे से वह बख़ूबी देश के प्रति अपनी सेवा कर रहे हैं।

कौन हैं पूर्व IAS Surya Pratap Singh

डॉ. सूर्य प्रताप सिंह(IAS Surya Pratap Singh) उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर के रहने वाले हैं और 1982 कैडर के IAS अधिकारी हैं। वे 4 साल पहले 2016 में VRS ले चुके हैं। आईएएस प्रताप शुरूआत से ही तेज़तर्रार और काफ़ी शिक्षा व्यक्तित्व के धनी हैं। अपनी क़ाबिलियत के दम पर उन्होंने MBA, MPhil, PhD, CPA, LIFA जैसी प्रमुख डिग्रियां हासिल की। उत्तर प्रदेश सरकार के ख़िलाफ लगातार लिखने, बोलने और हर छोटे-बड़े मुद्दों पर सवाल खड़ा करने के चलते उन पर 3 बार FIR हो चुकी है। वर्तमान में ट्राईबल आर्मी के साथ जुड़े हुए हैं और ट्वीटर पर सरकार के ख़िलाफ लिखना और सवाल पूछने के चलते चर्चा में बने रहते हैं।

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वर्तमान समय में भी वह बिना डरे बड़ी बेबाक़ी से अपनी बात सोशल मीडिया के माध्यम से रखते हैं। वह आदिवासी समुदाय, दलितों और पिछड़ो की आवाज़ बुलंद करने वाली संस्था ट्राइबल आर्मी से जुड़े हुए हैं। ट्राइबल आर्मी में वह उत्तर प्रदेश के आधिकारिक प्रवक्ता हैं। हाल ही में उनका ट्वीटर हैंडल वैरिफाई हुआ है। अपने सवालों से यूपी सरकार को घेरने का काम आज भी कर रहे हैं।

कब और किन मामलों को लेकर चर्चा का केंद्र बने

हाल ही में उन्होंने ट्विटर पर कोरोना की टेस्टिंग को लेकर एक पोस्ट लिखी थी, जिसके चलते उनके ख़िलाफ़ लखनऊ के हज़रतगंज कोतवाली में FIR दर्ज कर हो गई थी। जिस ट्वीट के चलते यूपी सरकार ने उनके ख़िलाफ मुक़दमा किया था। उस ट्वीट में सूर्यप्रताप सिंह ने लिखा था कि “क्यों इतनी तेज़ी पकड़े हो? क्या ईनाम पाना है? जो टेस्ट-टेस्ट चिल्ला रहे हो?” सूर्यप्रताप सिंह ने ये बात यूपी के मुख्य सचिव से कुछ जिलों के जिलाधिकारियों को लेकर कही थी।

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सवाल करना हमारा संवैधानिक आधिकार है। सूर्य प्रताप सिंह पर सवाल करना भारी पड़ गया। सूर्यप्रताप सिंह ने ट्वीट करते हुए यूपी के चीफ सेक्रेटरी से सवाल भी पूछा कि क्या स्थिति स्पष्ट करेंगे? यूपी का मतलब नो टेस्ट मतलब नो कोरोना।

इसी ट्वीट के रिप्लाई में ही सूर्यप्रताप सिंह(IAS Surya Pratap Singh) ने एक और ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था कि चीफ सेक्रेटरी ने उनकी बात को नकारा नहीं है। यदि सही है, तो ये राजनेताओं को ख़ुश करने के लिए कर्तव्यों से पलायन है। सूर्य प्रताप ने इसके बाद भी योगी सरकार और अधिकारियों पर कोरोना टेस्टिंग को लेकर लगातार कई और ट्वीट किए थे। बस इन्हीं ट्वीट के बाद उन पर मुक़दमा दर्ज हो गया ।

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हज़रतगंज थाने में उनके ख़िलाफ FIR हुई। धारायें लगीं 188 (यानी महामारी एक्ट 1897 का उल्लंघन), 505 (1)(b), 505 (2) (यानी शांति भंग करने की नीयत से भ्रामक जानकारी फैलाने), आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 56, और महामारी अधिनियम 1897 की धारा 3 के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया। अपने ऊपर हुई FIR के बाद सूर्यप्रताप सिंह ने कहा कि वो सिर्फ़ सवाल पूछ रहे थे। एक पूर्व नौकरशाह एक वर्तमान नौकरशाह से सवाल पूछ रहा था। FIR तो दर्ज कर लिया गया, सवालों के जवाब तो दे दीजिए।

इसके पहले अखिलेश यादव की प्रदेश सरकार में भी IAS सूर्यप्रताप सिंह मुखर होकर बोलते रहे हैं। 2015 में उत्तर प्रदेश में सपा सरकार में मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति का मामला IPS अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर ने उछाला। उस समय IAS सूर्यप्रताप सिंह ने खुलकर अमिताभ ठाकुर का साथ दिया था। अपनी मुखरता और सरकार से सवाल पूछने के चलते सूर्यप्रताप सिंह सस्पेंड कर दिए गए। इस मसले पर भी लंबी-चौड़ी बहस चली और बाद में सूर्यप्रताप सिंह ने ऐच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS के ले लिया।

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इसके अलावा सूर्यप्रताप सिंह ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे का रूट बदलने पर भी सवाल उठाए थे और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी UPPSC के चेयरमैन अनिल यादव की नियुक्ति पर भी सवाल सूर्यप्रताप सिंह ने उठाए थे।

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