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कौन है हिमांशु कुमार जिनपर 16 आदिवासियों की हत्या का मामला उठाने पर लगा जुर्माना

वर्ष 2009 में छत्तीसगढ़ में कथित आदिवासी नरसंहार का मामला सामने आया था। जिसमें 16 आदिवासियों की मौत हो गई थी। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ( (Human rights activist Himanshu Kumar) ने कोर्ट में सीबीआइ जांच के लिय याचिका दायर की थी। अब 13 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने हिमांशु कुमार याचिका की खारिज करते हुए उनपर 5 लाख का जुर्माना लगा दिया। साथ ही कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वो पता लगाए कि क्या कुछ लोग चरमपंथियो या वामपंथी को बचाने के लिय अदालत का इस्तेमाल कर रहे हैं।

क्या है आदिवासी नरसंहार का पूरा मामला

छत्तीसगढ़ वर्षों से नक्सलवाद की चपेट में रहा है। वर्ष 2009 में यहां बड़े पैमाने पर नक्सल विरोधी (Anti-Naxal operations in Chhattisgarh) अभियान चला था। इसी दौरान दंतेवाड़ा के तीन गांव में (Chhattisgarh’s Dantewada district) 17 आदिवासियों की कथित तौर पर हत्या कर दी गई। मामला राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया। इस नरसंहार का आरोप सुरक्षा बलों पर लगा। कहा गया कि सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर गांव वालों की हत्या कर उन्हें नक्सली बता दिया। समाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार (tribal rights activist) ने इस नरसंहार में छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के खिलाफ CBI से जांच कराने के लिय सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी।

सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने इस नरसंहार को लेकर अदालत को बताया था कि सुरक्षा बलों ने 16 आदिवासियों की बेरहमी से हत्या कर दी। साथी ही महिलाओं के साथ रेप और लूटपाट को अंजाम दिया। उन्होंने 16 ग्रामीणओं की मौत के बाद अपनी तरफ से रिकॉर्ड किए गए बयानों के आधार पर याचिका दायर की थी। नरसंहार की ये सितंबर 2009 से अक्टूबर 2009 के बीच छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के गचनपल्ली, गोम्पड और बेलपोचा के इलाकों में घटी थी।

इस मामले में वर्ष 2010 में तब मोड़ आता जब अदालत के आदेश पर दिल्ली के एक जज ने याचिकाकर्ता हिमांशु कुमार के बयान दर्ज का आदेश दे दिया था।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल केंद्रीय गृह मंत्रालय के जरिए इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी। जिसमें कहा गया था कि जिला जज की एक रिपोर्ट कोर्ट रिकॉर्ड्स से गायब हो गई थी, जो सरकार को मार्च 2022 में मिली। जिसमे बताया गया कि छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में कुछ अज्ञात लोगों द्वारा आदिवासियों की हत्या कर दी।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिय आवेदन में दावा किया- याचिकाकर्ता का उद्देश्य वामपंथी चरमपंथियों को सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए निर्दोष जनजातीय पीड़ितों के तौर पर दिखाना है। सुरक्षा बलों पर लागए गए आरोप पूरी तरह से झूठे हैं, मनगढ़ंत हैं। साथ ही सरकार ने याचिकार्ता को झूठे सबूत पेश करने का आरोप लगाकर सज़ा देने की मांग की थी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस जेबी पारदीवाला ने हिमांशु कुमार पर 5 लाख का जुर्माना लगाते हुए रकम सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के पास जमा कराएं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जुर्माना जमा कराने के लिए चार हफ्तों का समय दिया है। कहा कि राशि जमा नहीं करने की स्थिति में हिमांशु कुमार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि केंद्र सरकार को भी याचिकाकर्ता पर मुकदमा चलाने की अनुमति दी जाए।

याचिकाकर्ता हिमांशु कुमार ने जुर्माना भरने से इंकार किया है। उन्होंने लिखा- इंसाफ मांगने की वजह से आज सुप्रीम कोर्ट ने मेरे ऊपर 5 लाख का जुर्माना लगाया है और छत्तीसगढ़ सरकार से कहा है कि वह मेरे खिलाफ धारा 211 के अधीन मुकदमा दायर करे। 2009 के नरसंहार में 16 आदिवासी मारे गए थे। एक डेढ़ साल के बच्चे का हाथ काट दिया गया था। मैंने इस मामले में इंसाफ की मांग की तो सज़ा दी गई। मैं कोई जुर्माना नहीं भरूंगा। जेल जाना पसंद है लेकिन जुर्माना देने का मतलब होगा कि मैं गलत था। मैं ऐसा नहीं करूंगा।

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