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मुंबई का वो सनकी किलर जिसे अदालत ने बेगुनाह माना

मुंबई का वो सनकी किलर, जिसने 15 हत्याएं करने की बात कबूली और अदालत ने उसे बेगुनाह माना
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Ground Report | News Desk | इस दुनिया में ऐसे कई सीरियल किलर गुज़रे हैं जिनकी कहानियां सुनकर लोग आज भी सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। ऐसे बहुत से सनकी लोग भी गुज़रे हैं और आज भी पाए जाते हैं, जिनके लिए किसी की हत्या करना मानो कोई मज़ाक जैसा हो । बहरहाल, भारत में भी ऐसे कई सनकी हुए हैं। दुनियां भले ही उनको जान न सकी हो मगर उनके अपराध की कहानियां डर पैदा करती हैं। आइये आज आपको एक ऐसे ही सनकी सीरियल किलर की कहानी बताते हैं।

ये सनकी किलर किसी हॉलीवुड फिल्म का कोई हीरो नहीं, बल्कि असल जिंदगी का एक ऐसा विलेन है जिसने अपने सनकी पन के चलते लोगों की जान लेने शुरू कर दी। जी हां! बीयर मैन एक ऐसे सीरियल किलर का नाम है, जिसने दक्षिणी मुंबई में अपने आतंक से लोगों को खौफजदा कर दिया। इस हत्यारे के बारे में कहा जाता है कि ये पहले बीयर पीता और फिर अपने हत्यारे की तलाश कर उसे मार देता। मारने के बाद खाली बीयर की बोतल को उसकी लाश के पाश छोड़ जाता था। उस समय मुंबई में बीयर मैन की कहानियां चर्चा का केंद्र बनी रही।

उन 7 हत्याओं से सहम उठी मुंबई नगरी

बात अक्टूबर 2006 की है। रोज़ाना की तरह लोग मरीन लाइन स्टेशन से अपने-अपने कामों के लिए निकल रहे थे। तभी अचानक मरीन लाइन स्टेशन के फुटओवर ब्रिज पर एक आदमी की लाश देखी गई। पुलिस के मुताबिक़ ये लाश एक टेक्सी ड्राइवर की थी, जिसका नाम था विजय गौड़ था । पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार इस शख्स की हत्या पीट पीट कर की गई।

लगभग 2 महीने बाद 14 दिसंबर की सुबह चर्च गेट स्टेशन के पास एक और लाश मिली। इस लाश के पास से एक किंगफिशर बीयर की खाली बोतल भी पुलिस को मिली। इसी तरह से 13 जनवरी तक पुलिस को कुल मिलाकर 7 लोगों की लाश मिलीं। इसमें से ज्यादातर के कमर से नीचे कपड़े नहीं थे। ये सभी कत्ल चर्च गेट से मरीन लाइन रेलवे स्टेशन के आसपास किए गए थे।

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पहले कत्ल के बाद थोड़ी बहुत जांच पड़ताल की गई। इसके बाद ये मामला ठंडा पड़ गया, लेकिन 3 महीने में मिली 7 लाशों ने पुलिस को सकते में डाल दिया। इसी के साथ आसपास के लोगों में दहशत का माहौल पैदा हो गया।

चर्च गेट के पास मिल रही लाशों से लोगों में डर का माहौल बन गया था। उस इलाक़े का आस-पास लोगों ने जाना छोड़ दिया था । पुलिस के लिए क़ातिल को पकड़ना अब एक चुनौती बनता जा रहा था। मीडिया में भी ये ख़बर ज़ोर-शोर के साथ चलना शुरू हो चुकी थी। सरकारी महकमा भी अब अपनी हरकत में आ चुका था।

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बीयर की खाली बोतल से मिला बीयर मैन का नाम

इस हत्यारे का न नाम था, न ही कोई पहचान। ऐसे में दो लाश के पास से बीयर की खाली बोतल मिलने के कारण इसका नाम ‘बीयर मैन’ रख दिया गया। ये नाम वहां के अखबारों ने उस कातिल को दिया था। पुलिस ने कई बार ये पता लगाने की कोशिश की कि आखिर इन हत्याओं के पीछे कौन है। लेकिन बहुत छानबीन के बाद भी इस बारे में कुछ पता नहीं चल सका।

ऐसे में पुलिस ने अपनी जांच तेज कर दी। हत्यारे का पता लगाने और हत्याओं की गुत्थी सुलझाने के लिए मुंबई पुलिस ने 80 पुलिसकर्मियों को मिलाकर एक एसआईटी का गठन किया था।पुलिस ने मौका-ए-वारदात से भी सबूत इकट्ठा करने की कोशिश की, लेकिन उसे वहां बीयर की खाली बोतल के सिवाय कुछ नहीं मिला। असल में बीयर की ये खाली बोतल ही हत्यारे और मरने वाले के बीच का एकमात्र लिंक थी।

आखिरकार, 22 जनवरी 2007 को पुलिस ने पास के ही एक धोबी घाट से रविंद्र कांतरोल नाम के एक आदमी को शक के आधार पर धर दबोचा।  ये कहा गया कि इसने काला जादू करने के लिए लोगों की हत्याएं की हैं। लोगों को मारकर उनका खून मरीन लाइन के पास बने एक कब्रिस्तान में एक तांत्रिक द्वारा काला जादू के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

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आरोपी ने कबूली 15 हत्याओं की बात

फरवरी 2007 को हुए एक नार्को टेस्ट में आरोपी रविंद्र कांतरोल ने स्वीकार किया कि उसने 15 लोगों की हत्या की है। कांतरोल ने टेस्ट में स्वीकार किया कि वह नशे का आदी है। उसने चरस की लत के प्रभाव में आकर इन हत्याओं को अंजाम दिया। कांतरोल चरस लेने के बाद उग्र हो जाता और अपने शिकार की खोज में निकल जाता।

कांतरोल ने कहा कि वह कत्ल से पहले पीड़ितों से बियर पीने के लिए कहता, और उनके मना करने पर उनका यौन शोषण करता। कांतरोल के पकड़े जाने के बाद मुंबई पुलिस इस बात से बेखबर रही कि इन हत्याओं के पीछे आखिरी कातिल का क्या मकसद था। हालांकि कातिल का कहना था कि उसे खून से प्यार है।

बहरहाल, पुलिस ने रविंद्र कांतरोल को 3 हत्याओं के आरोप में जेल में डाल दिया। इसके बाद जनवरी 2007 में कोर्ट ने इसे एक कत्ल के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई। 17 सितंबर 2009 को सबूतों के अभाव में और पुलिस द्वारा पेश किए गए कई टेस्ट को अमान्य मानते हुए बंबई हाईकोर्ट ने कांतरोल को सभी आरोपों से बरी कर दिया। बंबई हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कांतरोल के खिलाफ फोरेंसिक रिपोर्ट मान्य नहीं हो सकती।

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