when shankaracharya swami swaroopanand saraswati said rss is not hindu

जब शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा था, RSS वाले हिंदू नहीं, वो वेदों को नहीं मानते!

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Ground Report News Desk | New Delhi

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती अपने विवादित बयानों के चलते अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। एक बार उन्होंने आरएसएस पर एक विवादित बयान देकर नई बहस को जन्म दे दिया था। मामला साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान का है जब शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने एक अपने एक बयान में कहा था आरएसएस वाले हिंदू नहीं हैं, वो वेदों को नहीं मानते हैं। इतना ही नहीं उन्होंने भोपाल सांसद प्रज्ञा ठाकुर पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि वह साध्वी नहीं हैं।

मामला बीते साल 9 मई 2019 का है जब एक टीवी न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा था “उनका एक ग्रंथ है विचार नवनीत, जो गोलवलकर का लिखा हुआ है। उन्होंने ये बताया है कि हिंदुओं की एकता का आधार वेद नहीं हो सकता। यदि वेद को हम हिंदुओं की एकता का आधार मानेंगे तो जैन और बौद्ध हमसे कट जाएंगे। वो भी हिंदू हैं।”

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इसके बाद शंकराचार्य ने कहा था, “वो ये मानते हैं कि जो वेदों के धर्म-अधर्म पर विश्वास रखता है वही हिंदू है। वेद-शास्त्रों में जो विधिशेध हैं। उनको जो मानता है उसी को आस्तिक माना जाता है, और जो आस्तिक होता है वही हिंदू होता है।”

वहीं अपने एक अन्य बयान में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सांसद प्रज्ञा ठाकुर पर भी निशाना साधने से नहीं चूके। उन्होंने सांसद प्रज्ञा ठाकुर पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे साध्वी नहीं हैं। अगर वे साध्वी होती तो अपने नाम के पीछे ठाकुर क्यों लिखती। साधू-साध्वी होने के मतलब है ऐसे व्यक्ति की सामाजिक मृत्यु हो जाना। साधू-संत को समाज से कोई मतलब नहीं होता वे पारिवारिक जीवन नहीं जीते, लेकिन प्रज्ञा के साथ ये सब चीजें लगी हुई हैं। इसलिए वे साध्वी नहीं हैं। प्रज्ञा को अपनी बात कहते समय भाषा पर संयम रखना चाहिए।

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गौरतलब है कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का ये बयान चुनाव से ऐन पहले आया था। इस बयान के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई थी। भोपाल से लोकसभा सीट के लिए कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह और बीजेपी की ओर से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर दावेदारी कर रहीं थीं। दोनों में ही खुद को बेहर हिन्दू साबित करने की होड़ लगी हुई थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिग्विजय सिंह शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं। उन्हें उनके सबसे करीबी लोगों में से एक माना जाता हैं। ये बयान सीधे तौर पर चुनावी ध्रुवीकरण के लिए सामने आया था लेकिन इसका फायदा नहीं हुआ और लोकसभा चुनाव में भोपाल की जनता ने प्रज्ञा ठाकुर को अपना सिरमौर चुना।