पेट्रोल’ की बढ़ती कीमतों की वजह से छोड़ना पड़ा था ‘गांधी’ जी को घर!

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लेख-प्रशांत मिश्रा

नोट: इस कहानी के पात्र व घटनाएँ पूर्ण रूप से यथार्थ हैं और आपकी निजी ज़िंदगी के बेहद करीब भी।

यह कहानी बहुत सामान्य है ठीक उसी तरह जिस तरह किसी बच्चे का नाम ‘पेट्रोल’ रख देना या पेट्रोल की वजह से गांधी जी का घर छोड़ देना। इस कहानी का ‘नायक’ या यूं कहें ‘खलनायक’ है ‘पेट्रोल’ जो एक सामान्य परिवार में पैदा हुआ था। जैसा कि एक सामान्य परिवार में होता है नए सदस्य के आने पर घरवालों में भयंकर खुशी होती है। ठीक उसी तरह इस घर में भी जब ‘पेट्रोल’ आया तब उसके माँ-बाप ने बड़ी खुशी से उसका नाम रखा ‘पेट्रोल’। पेट्रोल को लेकर उसके माँ-बाप बड़े-बड़े सपने देख रहे थे। ‘पेट्रोल’ के आने से सबसे ज़्यादा खुश थे उसके भाई-बहन। पेट्रोल से एक ही दिन बड़ी बहन जिसका नाम था ‘मोटरसाइकल’ और बड़ा भाई ‘युवा’, दोनों ही पेट्रोल के आने से भारी खुश थे कि अब ये करेंगे वो करेंगे, यहाँ चलेंगे वहाँ चलेंगे, पर उनको क्या पता था कि समय और महंगाई के चलते पेट्रोल किस तरह से उनके गले की फांस बनता जाएगा।

पेट्रोल का कद बढ़ता गया और घरवालों की जेब खाली होती गई

पेट्रोल की एक खासियत थी कि उसका कद ‘इंच’ या ‘फुट’ में नहीं बल्कि रुपये में बढ़ता था और जैसे-जैसे पेट्रोल का कद बढ़ता वैसे-वैसे घरवालों की चिंता भी विकराल रूप लेने लगी, पेट्रोल के ऊपर होने वाला खर्च दिन पर दिन अनवरत बढ़ने लगा। शुरू-शुरू में कभी पिताजी अपने खर्चे में कटौती करते, कभी माताजी 1-2 किलो आलू-प्याज कम खरीदतीं तो कभी भाई ‘युवा’ अपने खाने-पीने (चाय-सिगरेट) के पैसे में कटौती करता। ऐसे ही न जाने कितने दिन गुज़र गए और सब लोग अपने खर्चों में कटौती कर पेट्रोल का भरणपोषण करते रहे पर पेट्रोल आय दिन महंगा, और महंगा होता चला गया जिसकी वजह से घर के सभी लोग परेशान रहने लगे।

एक दिन ‘पड़ोस’ से खबर आई कि ‘पेट्रोल’ का कद अचानक 1.50 रुपया बढ़ गया है और जल्द ही 2 रुपये तक पहुँच जाएगा। यह खबर सुनते ही पिताजी सोच में पड़ गए कि पेट्रोल पर होने वाला खर्चा अभी और बढ़ेगा! इस सदमे ने पिताजी को अंदर तक झंझोड़ दिया और उन्हें दिल का दौरा पड़ गया, पिताजी अस्पताल में भर्ती हो गए। परिवार पर जैसे मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा और इन सब के चलते पूरे महीने का बजट गड़बड़ा गया और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। दोनों भाई-बहन भी उदास रहने लगे और पेट्रोल के प्रति उनके मन में गुस्सा रहने लगा। पेट्रोल इस बात को बिलकुल नहीं समझ पा रहा था कि पूरा परिवार उसकी वजह से परेशान है।

जब ‘मोटरसाइकल’ को बेचने की नौबत आ गई थी

पेट्रोल का कद और उसका खर्च बढ़ता ही जा रहा था जिसकी वजह से घर में कलेश रहने लगा। पिताजी जब हॉस्पिटल से घर आए तो उनकी भी दवाओं में पैसा बहुत ज़्यादा खर्च होने लगा, पूरा घर दाने-दाने का मोहताज हो गया। ऐसे में परिवार ने मजबूरी में बहन ‘मोटरसाइकल’ की शादी का फैसला लिया जिससे घर से एक सदस्य कम हो, भाई युवा इस बात से बहुत दुखी था और ‘पेट्रोल’ से खासा नाराज़ भी था क्योंकि उसकी वजह से बहन ‘मोटरसाइकल’ के घर से जाने की नौबत आ गई थी।

अगले दिन जब सुबह सब उठे तो परेशान थे कि आज मोटरसाइकल घर छोड़ के जाने वाली है पर अचानक पड़ोस से खबर आती है कि पेट्रोल का कद 50 पैसे हो गया है। इस खबर ने जैसे सारे मुर्दा परिवार में जान फूँक दी हो, पूरा परिवार खुशी से नाच उठा और मोटरसाइकल को बेचने का फैसला टाल दिया। पेट्रोल की उस दिन खूब खातिरदारी की और पूरे परिवार ने उसे खूब लाड़ किया।

जब आपने फुल टैंक कराया हो और दोस्त ‘मोटरसाइकल’ ले जाए

पेट्रोल का कद कम होने की वजह से परिवार खुशियाँ माना ही रहा था कि अचानक युवा का एक दोस्त उससे मिलने आया, दरअसल मोटरसाइकल और युवा का दोस्त एक-दूसरे से प्यार करते थे। युवा इस बात को जानता था पर उसके माता-पिता नहीं जानते थे। युवा का दोस्त मोटरसाइकल को कहीं ले जाना चाहता था युवा असमंजस में पड़ गया कि इतने दिनों से पेट्रोल पर इतना खर्च किया है और दोस्त को मना भी नहीं कर सकता। युवा ने दिल पर पत्थर रख कर मोटरसाइकल को दोस्त के साथ भेज दिया और पेट्रोल को भी साथ जाने दिया, पूरे दिन युवा को बेचैनी रही, वो समझ नहीं पा रहा था कि आखिर माता-पिता को यह बात कैसे बताए।

शाम को जब युवा का दोस्त मोटरसाइकल वापस लेकर आया तो युवा ने देखा कि पेट्रोल पूरी तरह से सूख चुका है, बहुत कमज़ोर हो गया है। युवा बहुत परेशान हो गया उसे टेंशन होने लगी कि पेट्रोल कि यह हालत माता-पिता को कैसे बताएगा पर क्या करे बताना तो पड़ेगा। शाम को जब उसने यह खबर पिताजी को बताई तब ही अचानक पेट्रोल का कद सीधा 3 रुपया बढ़ गया और इस सदमें से पिताजी को फिर से दिल का दौरा पड़ गया।

जिस तरह से कहानी चली आ रही है आप सोच रहे होंगे कि यह कहानी पूर्ण रूप से काल्पनिक है पर न तो यह कहानी काल्पनिक है और न ही इसके पात्र, इस कहानी में गांधी जी भी हैं।

क्यों गांधी जी ने पेट्रोल की वजह से छोड़ दिया था घर?

मोटरसाइकल को बेचने का फैसला घर पर भारी पड़ा और पिताजी को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जिसकी वजह बाकी जो थोड़ी बहुत जमा पूंजी थी वो भी इलाज में खर्च हो गई। बहन ‘मोटरसाइकल’ को अगले ही घर निकाला दे दिया। भाई ‘युवा’ हताश हो गया और सोचने लगा कि किस तरह से पेट्रोल ने उसका घर बर्बाद कर दिया।

जब पिताजी को होश आया तो घर-बार उनके इलाज में बिक चुका था, मोटरसाइकल को घर छोडना पड़ा था और ‘युवा’ अवसाद का शिकार हो गया। हॉस्पिटल से पिताजी को डिस्चार्ज कराते वक्त जब युवा मेडिकल पर गया तब 10 रुपये कम पड़ रहे थे, युवा ने अपनी सारी जेबें छान मारीं तब जाके कहीं उसे एक 10 रुपये का नोट मिला जिसमें छपे गांधी जी उसे मुंह चिढ़ा रहे थे, युवा ये देख कर थोड़ा मुस्कुराया और बोला “लो भैया ये आखिरी नोट है, बाय-बाय गांधी जी”।

इस तरह से गांधी जी ने युवा और उसके परिवार का घर छोड़ दिया। इस कहानी का आपसे उतना ही जुड़ाव है जितना इस कहानी में गांधी जी का है और हर उस आम परिवार का जो पेट्रोल पर रोज़ बढ़ती कीमतों की वजह से परेशान रहते हैं। क्या आप भी पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान हैं?

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