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हाशिए पर बिहार में गेहूं लगाने वाला किसान, हज़ारों करोड़ का नुक़सान

बिहार का किसान

बिहार का किसान : पिछले दो सालों की बात करें तो बिहार ने हर साल 60 लाख मैट्रिक टन गेहूं से ज्यादा का उत्पादन किया है। इतने बड़े उत्पादन में से सरकार ने 2019 में सिर्फ 3 हजार टन और 2020 में महज 5 हजार टन गेहूं को MSP पर खरीदा है। राज्यमंत्री राबसाहब दानवे पाटिल जी संसद में बिहार को गौरवांवित महसूस करवाते हुए बताया था कि 2019 में बिहार के  554 और 2020 में 1002 किसानों को MSP का लाभ मिला है।

नीतीश सरकार ने कहा था कि वे किसानों से गेहूं  2 लाख टन से बढ़ाकर 2020 में 7 लाख टन MSP पर ख़रीदेंगे जबकि ख़रीदा कितना 1 प्रसेंट भी नहीं।

अहम बात- केंद्र सरकार की तरफ़ से FCI यानि फ़ूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, गेहूं चावल की MSP पर ख़रीद के लिए नोडल एजेंसी है। FCI के बिहार में 16 बड़े गोदाम हैं जिसमें से 14 अपने हैं और 2 गोदाम भाड़े पर लिए हुए हैं। जिनकी कुल क्षमता 302912 टन है यानि तीन लाख दो हज़ार नौ सौ बारह टन ।

सबसे बड़ा गोदाम गया में है जिसकी क्षमता 59092 टन है। जब इतनी क्षमता के गोदाम ख़ुद बिहार में है उसके बाद भी गेहूं की ख़रीद नहीं हो रही है। ऐसा भी नहीं है कि ये गोदाम ख़ाली पड़े हैं बस फ़र्क़ इतना है कि इसमें दूसरे राज्यों का गेहूं चावल रखा है।

इसकी वजह है बिहार में APMC नहीं है। मजबूत मंडी होगी तभी FCI गेहूं खरीद पाएगा। FCI हर किसान के खेत में जाकर इतने बड़े पैमाने पर गेहूं नहीं ख़रीद सकता। अगर मंडी व्यवस्था अच्छी होती तो FCI को गेहूं ख़रीदकर स्टोरेज करने में भी कम पैसे खर्चने पड़ते, ट्रांसपोटेशन बचता।

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दूसरा नीतीश सरकार का फेल्योर है. इतना ही नहीं सुशासन बाबू ने केंद्र सरकार को 2021 में गेहूं ख़रीद के लिए 2511 रुपये का प्रस्ताव भी दिया था. जब सरकारी ख़रीद नहीं करनी तो फिर ये प्रस्ताव किसके लिए दे रहे हो।

सोचिए उन लाखों किसानों का क्या हुआ होगा जिन्होंने 60 लाख मैट्रिक टन गेंहू का उत्पादन किया. किसे बेची होगी। क्या कोई भी किसान ये कह सकता है कि उसने अपने गेंहू को किसी बिस्कुट बनाने वाली, किसी आटा बनाने वाली कंपनी को MSP से ज्यादा के रेट पर बेची हो। बड़ी कंपनियों को भी ना सही तो किसी को तो बेची ही होगी क्या उसे गेंहू का वो भाव मिला जो उसे मिलना चाहिए था। गेंहू का एमएसपी 1925 है और आप पता कर लीजिए,  किसानों ने 1400- 1500 रुपये में अपनी गेहूं बेची है नहीं तो गूगल कर लीजिए आपको ख़बरें मिल जाएगी।

एक और बात कुछ मीडिया वाले कह रहे हैं कि बिहार की एग्रीकल्चर ग्रोथ हरियाणा पंजाब से अच्छी है वे फल सब्ज़ियाँ लगाते हैं. ये अच्छी बात है हरियाणा पंजाब को भी मोनोक्रॉप कम करके दूसरी फसलों पर ध्यान देना चाहिए. लेकिन उन किसानों का क्या जो बिहार में इतनी गेहूं लगा रहे हैं और सरकार इतने बड़े बड़े वादे कर रही है. क्यों बिहार सरकार गेहूं चावल की पैदावार पर रोक नहीं लगा देती । हजारों करोड़ का नुकसान बिहार के किसानों को सीधा सीधा हो रहा है। इसके जिम्मेदार कौन है ?

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Abhinav Goel की रिपोर्ट

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