अस्थमा के मरीज़

अस्थमा के मरीज़ क्या करें क्या न करें ?

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अस्थमा के रोगियों की संख्या भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका में अस्थमा 65 या इससे अधिक वर्ष की आयु में करीब 4 से 13 फीसदी लोगों को प्रभावित करता है। आंकड़ों के अनुसार, 2050 तक अस्थमा रोगियों की संख्या तीन गुना अधिक हो सकती है। अस्थमा में मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।

दमा एक ऐसी स्थिति है, जो फेफड़ों में मौजूद छोटे वायु मार्ग यानी ब्रॉन्क्रियल्स को प्रभावित कर देती है। इसकी शुरुआत किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन ज्यादातर यह बचपन में ही शुरू हो जाता है। हर 10 में से एक बच्चा और हर 20 में से एक बालिग दमा से पीड़ित है।

अस्थमा के मरीज़ क्या करें

सूर्य नमस्कार और आसन : इनसे मरीज के शरीर में संतुलन आता है। जिन लोगों को साइनिसाइटिस यानी नजला और दमा का रोग है, उनमें नासिका छिद्र बंद होने की समस्या को यह दूर करता है। इनसे शरीर के लिए आवश्यक व्यायाम हो जाता है। शरीर के लिए आवश्यक ऊष्मा भी इनसे पैदा होती है। सूर्य नमस्कार से शरीर के भीतर इतनी ऊर्जा पैदा होती है कि इसका निरंतर अभ्यास करने वालों को बाहर की सर्दी प्रभावित नहीं कर पाती।

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प्राणायाम : दमा कई तरह के होते हैं। कुछ एलर्जिक होते हैं, कुछ ब्रोंकाइल होते हैं और कुछ साइकोसोमैटिक या मन:कायिक होते हैं। अगर मामला मन:कायिक है तो ईशा योग करने से यह ठीक हो सकता है। ईशा योग करने से इंसान मानसिक तौर से शांत और सतर्क हो जाता है और उसका दमा ठीक हो जाता है। अगर यह एलर्जी की वजह से है तो प्राणायाम करने से यह निश्चित तौर पर ठीक हो सकता है। ईशा योग में जो प्राणायाम सिखाया जाता है, उससे ब्रोंकाइल संबंधी दिक्कत कम हो जाती हैं।

अनुलोम-विलोम : अस्थमा होने पर सुबह-शाम खुली हवा में 15-15 मिनट का अनुलोम-विलोम करना चाहिए। दमे के रोगी यदि एक-एक घंटे पर बायीं नासिका को बंद कर सिर्फ दायीं नासिका से दो-तीन मिनट के लिए सांस लें और छोड़ें, तो फायदा होगा। एक बार में हमारी एक ही नासिका चलती है। दमे के अटैक के समय जो नासिका चल रही हो, उसे बंद कर देने से दमा जड़ से समाप्त हो सकता है। इस रोग में कुछ मुद्राओं जैसे अपानवायु मुद्रा, प्राण मुद्रा और सूर्य मुद्रा करना भी लाभकारी है।

भुजंगासन : पेट के बल लेटकर सांस भरते हुए कमर से ऊपर वाला हिस्सा आगे की ओर उठाएं। पैर आपस में मिले रहें। गर्दन को पीछे की ओर मोड़ें और कुछ पल इसी अवस्था में रखें। सांस को सहज हो जाने दें। कुछ देर रुकें, ताकि दबाव रीढ़ के निचले हिस्से पर पड़े। सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस आएं। गर्दन पीछे रखें और धीरे-धीरे पहले छाती तथा बाद में सिर को भी जमीन से लग जाने दें। प्रतिदिन भुजंगासन करके देखें, कुछ ही दिनों में फायदा नजर आने लगेगा।

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अदरक : डॉक्टरों का मानना है कि अदरक बेनाड्रिल दवाई की तरह ही काम करता है। यह फेफड़ों में सूजन को दूर करता है और ऑक्सीजन के प्रवाह को सुगम बनाता है। इसके लिए अदरक को पीसकर गरम पानी में मिला लें। थोड़ा सा शहद मिलाएं और पी लें।

अस्थमा के मरीज क्या न करें

अस्थमा के मरीजों को अंडा, गाय का दूध, मूंगफली, सोया, गेहूं, मछली, झींगा, ट्री नट्स को खाने से बचना चाहिए। इनके सेवन से उनके शरीर में अलर्जिक रिऐक्शन ट्रिगर हो सकता है, जो अस्थमा अटैक का कारण बनेगा। ऐसी स्थिति में यह भी संभव है कि सही समय पर अटैक कंट्रोल न हो तो अस्पताल ले जाने तक की नौबत आ सकती है।

मूंगफली ना खाएं

आपको बता दे कि आपको मूंगफली का सेवन अस्थमा के दौरान नहीं करना है। इससे आपको खांसी और सांस फूलने की समस्या ज्यादा हो सकती है। इसलिए जितना हो सके इससे बचकर रहे। ये आपके लिए नुकसानदेह है।

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दूध और उससे बने पदार्थ

दूध और दूध से बने पदार्थ दमा के साथ नहीं चल सकते। ज्यादातर लोगों में दमा की 60 फीसदी वजह दूध और दूध से बने पदार्थ ही होते हैं। अगर दमा के मरीज दूध और दूध से बने पदार्थों का सेवन करना बंद कर दें तो उनका आधा रोग तो तुरंत ही अपने आप ठीक हो सकता है।

ज्यादा नमक ना खाएं

अस्थमा से जूझ रहे मरीजों खाने में ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए। इस समय आपको हल्का नमक खाना है। इससे आपको आराम रहेगा। अगर आपने अधिक नमक का सेवन किया तो ये नुकसानदेह साबित हो सकता है।

डॉक्टर की सलाह

सबसे बेहतर यही होगा कि किसी भी पदार्थ का सेवन डॉक्टर से पूछकर और उनकी देखरख में ही करें। खासतौर पर अस्थमा से पीड़ित बच्चों को कुछ भी खिलाने से बचना चाहिए, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार के खाद्य पदार्थ से होने वाली एलर्जी से बचाया जा सके

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