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Marburg virus : क्या है ‘मारबर्ग वायरस’ जिसकी चपेट में आए 90% लोगों की मौत हो जाती है !

मारबर्ग वायरस

दुनिया कोरोना वायरस (Corona virus) से आज भी लड़ रही है। भारत में प्रतिदिन हज़ारों केस मिल रहे हैं। वहीं, मंकीपॉक्स (Monkeypox) ने भी दस्तक दे दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंकीपॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। इसके साथ ही मारबर्ग वायरस (Marburg virus) के मिलने से हडकंप मचा हुआ है। लागोस के घाना (Ghana) में घातक वायरस मारबर्ग (Marburg virus) के दो मामले सामने आए हैं। यह वायरस अन्य के मुकाबले काफी घातक माना जा रहा है। आइये जानते हैं इस वायरस से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां।

क्या है यह (Marburg virus) मारबर्ग वायरस

इबोला परिवार (Ebola) का ही एक हिस्सा है मारबर्ग वायरस (Marburg virus)। इसके अधिकतर लक्षण इबोला वायरस (Ebola virus) जैसे ही होते हैं। वायरस को लेकर रिसर्च कर रहे अफ्रीकन वैज्ञानिक ओयेवाले तोमोरी का दावा है कि मारबर्ग अन्य वायरस के मुकाबले अधिक घातक है। इसमें औसत मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत है। कई मामलों में ये दर 88 प्रतिशत तक हो जाती है। यह वायरस गंभीर वायरल रक्तस्रावी बुखार का कारण बनता है।

मारबर्ग वायरस (Marburg virus) पहले सितंबर 2021 में गिनी में पाया गया था। इसका प्रकोप कई अफ्रीकी देशों में देखा जा चुका है, जिनमें एंगोला, कोंगो, साउथ अफ्रीका और युगांडा जैसेदेश शामिल हैं। मारबर्ग वायरस तेज़ी से फैलने वाला एक रक्तस्रावी बुखार है। इसके कारण बड़ी सख्या में मृत्यु भी देखी गई है, जो ज्यादातर दक्षिणी और पूर्वी अफ्रीका में हुई। जुलाई 2022 में फिर से एक बार इसके मामले सामने आने से हड़कंप मचा हुआ है।

कब और कहां से आया मारबर्ग वायरस ?

पहली बार 1967 में जर्मनी के मारबर्ग नामक शहर और बेलग्रेड, यूगोस्लाविया (अब सर्बिया) मे इस घातक वायरस को पाया गया था। इबोला परिवार से निकला ये घातक वायरस युगांडा से लाए गए कुछ बंदरों पर प्रयोगशाला में मारबर्ग को लेकर अध्धयन के दौरान फैल गया था। बंदरों पर अध्धयन कर कर रहे कुछ वैज्ञानिक इस वायरस की चपेट में आ गए।

मारबर्ग के अधिकतर मामले अफ्रीका में युगांडा, कांगो, केन्या, दक्षिण अफ्रीका और हाल में गिनी और घाना से सामने आए हैं। सीरोलॉजिकल अध्ययनों से पता चला है कि इस वायरस का संबंध फ्रूट बैट (चमगादड़ की एक प्रजाति) से है।

यह घातक वायरस कैसे फैलता है?

मारबर्ग वायरस ह्यूमन टू ह्यूमन फैल सकता है। किसी व्यकित के सीधे संपर्क में आने से ही आप इसकी चपेट में आ सकते हैं। बिस्तर, और इन तरल पदार्थों से दूषित कपड़े जैसी सामग्री से भी इसका प्रसार होता है।

स्किन की खरोंच या मेंब्रेन के संपर्क में आने से व्यक्ति खून या शरीर के अन्य द्रवों के संपर्क मे आने से आप संक्रमित हो सकते हैं। लेकिन, अब भी हम इसके बारे बहुत कुछ नहीं जान सके हैं। वैज्ञानिक लगातार इस वायरस को लेकर रिसर्च में जुटे हैं।

Marburg virus: क्या हैं लक्षण और कितना ख़तरनाक?

जब कोई व्यक्ति मारबर्ग वायरस से संक्रमित होता है, तो उसके 3 से 5 दिनों के अंदर ही उसे लक्षण महसूस होने लगते हैं।

  • तेज़ बुखार
  • गंभीर सिरदर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • बदन दर्द
  • तकलीफ व असहज महसूस होना

हालांकि, संक्रमण गंभीर होने लगता है तो मरीज़ को इसमें पीलिया, अग्नाशय सूजन, तेजी से वजन घटने, लिवर फेल होना, बड़े पैमाने पर रक्तस्राव तथा कई अंगों के सही से काम नहीं करने की समस्या होत सकती है।

इस बीमारी में औसत मृत्यु दर 50 प्रतिशत है और अधिकतम 88 प्रतिशत या न्यूनतम 20 प्रतिशत हो सकती है। इससे पता चलता है कि यह एक ख़तरनाक वायरस है। घाना में इससे संक्रमित हुए दो लोगों मौत हो गई। फिलहाल इसका इलाज नहीं है।

लेकिन शरीर में पानी की कमी नहीं होने देने के साथ प्रारंभिक देखभाल और लक्षण के आधा पर उपचार, बचाव की स्थिति में सुधार किया जा सकता है।

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