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Corona: आखिर भारत से कोरोना की दवाई क्यों मांग रहा अमेरिका? जानिये…

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न्यूज़ डेस्क, ग्राउंड रिपोर्ट:
नरेंद्र मोदी सरकार ने दो प्रमुख दवाओं, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और पेरासिटामोल के सभी मौजूदा ऑर्डरों को क्लियर करने के लिए इन दोनों दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध को आंशिक रूप से हटाने का फैसला किया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दवा की तत्काल आपूर्ति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध करने के दो दिन बाद आया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 25 मार्च को इस दवा के निर्यात पर रोक लगा दी थी। हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को किसी भी मेडिकल पर मिलने वाली काफी सस्ती दवा है। हालांकि भारत में इसकी खरीद और उपयोग को गंभीर रूप से प्रतिबंधित किया गया था क्योंकि कोविड-19 के संक्रमण में इसे निवारक दवा बताया गया था।

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क्या है हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन?

अमेरिका के नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार क्लोरोक्वीन “फॉस्फेट एंटीमैलेरियल्स और एंबिसाइड्स” नामक दवाओं की श्रेणी में आता है जिसका उपयोग मलेरिया के इलाज में किया जाता है। साथ ही क्लोरोक्वीन फॉस्फेट का उपयोग कभी-कभी गठिया की बिमारी के लक्षणों को कम करने के लिए किया जाता है। सरकारें मानती हैं कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन टैबलेट्स एक निवारक यानी प्रिवेंटिव दवा के रूप में काम कर सकती है। अस्पतालों में फ्रंटलाइन पर काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मी और कोरोना वायरस के शुरूआती मरीज़ों की बीमारी को रोकने में भी ये टेबलेट मददगार साबित हो सकती है।

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क्या कोरोना होने से रोक सकती है हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन टेबलेट?

लेकिन हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन वास्तव में कोरोनवायरस का जवाब है या नहीं, इसका अभी तक कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। और इसके साइड इफेक्ट्स के बारे में भी कोई पुख्ता जानकारी अभी तक नहीं आयी है। व्हाइट हाउस के कोरोनावायरस सलाहकार डॉ एंथनी फौसी ने अमरीका के सीबीएस चैनल के “फेस ऑफ द नेशन” में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर कहा कि, “विज्ञान के संदर्भ में, मुझे नहीं लगता हम निश्चित रूप से यह कह सकते हैं कि यह काम करता है। मगर ऐसे मामले सामने आए हैं जो दिखा सकते हैं कि कोई प्रभाव हो सकता है। वहीँ कई मामले ऐसे भी हैं जहाँ इसका प्रभाव नहीं हुआ है। “

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इससे पहले, यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा था कि वे क्लोरोक्विन के उपयोग की जांच के लिए सरकार और रिसर्चर्स के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। “क्लोरोक्विन के उपयोग की जांच के लिए एफडीए अन्य सरकारी एजेंसियों और एकेडेमिक केंद्रों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस दवा का कोरोना शुरूआती मरीज़ों में लक्षणों को कंट्रोल करने पर भी रिसर्च हो रही है। ये दवा पहले ही मलेरिया और गठिया के इलाज के लिए मंज़ूर है।” एफडीए ने कहा। एफडीए का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा बार-बार हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन से कोरोनोवायरस का इलाज करने पर ज़ोर देने का जवाब था।
ट्रम्प के आग्रह में कुछ योग्यता हो सकती है, हालांकि इसे अभी भी उपचार के लिए मंजूरी नहीं मिली है। 16 मार्च को “बायोसाइंस ट्रेंड्स” में छपे एक रिसर्च पेपर में कहा गया, “कोरोनावायरस(COVID-19) तेजी से फैल रहा है, और चीन में वैज्ञानिक इसके प्रभावकारी इलाज के लिए दवाओं की खोज करने का प्रयास कर रहे हैं। क्लोरोक्विन फॉस्फेट, मलेरिया के उपचार के लिए एक पुरानी दवा है, जिसे चीन में COVID-19 से होने वाले निमोनिया के इलाज के लिए दिखाया गया है। ”

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न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, मिनेसोटा यूनिवर्सिटी में अध्ययन है जिसमें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का प्रभाव देखने के लिए कोरोनोवायरस रोगीयो के साथ रह रहे लोगों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दी जा रही है। जिससे समझने की कोशिश की जा रही है कि क्या यह संक्रमण को रोकने में मदद कर सकता है।