भारत सरकार का हनी मिशन

क्या है हनी मिशन, कैसे प्रवासी मज़दूर बनेंगे इससे आत्मनिर्भर?

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देश में किसानों और शहरों से लौटे प्रवासी मज़दूरों को सरकार आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई प्रयास कर रही है। सरकार द्वारा शुरु किया गया हनी मिशन भी इसका हिस्सा है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने हनी मिशन के तहत प्रवासी मज़दूरों के लिए स्थानीय स्तर पर स्व-रोज़गार उपलब्ध करवाने के लिए हनी मिशन एक बड़ा कदम उठाया है।


केंद्रीय कृषि एवं कृषि कल्याण, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के अनुसार भारत ने विश्व के पांच सबसे बड़े शहद उत्पादक देशों में स्थान बनाया है। देश में शहद का उत्पादन 2005-06 की तुलना में 242 प्रतिशत बढ़ा है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दे रही है और सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत मधुमक्खी पालन को और बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

क्या है हनी मिशन?

  • इस मिशन के तहत आजीविका का अवसर प्रदान करने के लिए, 25 अगस्त, 2020 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर और सहारनपुर जिलों के 70 प्रवासी श्रमिकों को 700 मधुमक्खी बक्से वितरित किए गए।
  • ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आह्वान को बढ़ावा देते हुए, KVIC ने इन श्रमिकों की पहचान की थी और इन्हें मधुमक्खी पालन के लिए 5-दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया।
  • मधुमक्खी पालन गतिविधियों को संचालित करने के लिए उन्हें आवश्यक उपकरण-किट और मधुमक्खी-बक्से भी प्रदान किए गए हैं।
  • इसका मकसद भारत में शहद का उत्पादन बढ़ाना और लोगों को स्वरोज़गार उपलब्ध करवाना है।
  • वर्ष 2017 में हनी मिशन KVIC द्वारा शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत के शहद उत्पादन में वृद्धि करते हुए आदिवासियों, किसानों, बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को मधुमक्खी पालन में लगाकर  करके रोजगार सृजन करना है।
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश को शहद उत्पादन के लिए सबसे अनुकूल बाजारों में से एक के तौर पर चुना गया है क्योंकि इस पूरे क्षेत्र में वनस्पतियों की बहुतायत है और जिसमें विभिन्न प्रकार की फसलें भी शामिल हैं।
  • KVIC ने अब तक जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और असम में 1.35 लाख मधुमक्खी पालन के बक्से वितरित किए हैं।
  • इस कदम से देश भर में 13,500 लोगों को लाभ हुआ है और लगभग 8500 मीट्रिक टन शहद का उभी त्पादन किया गया है।

कैसे मिलता है योजना का फायदा?

अब ऐसी तकनीक आ गई है, इसके माध्यम से शहद निकालते समय मधुमक्खी मरती नहीं नहीं है बल्कि मोम और पॉलन भी बनता है। इससे न केवल किसान बल्कि बेरोजगार युवक भी इसे रोजगार के तौर पर अपना सकता है। मधुमक्खी पालन उद्योग की इकाई स्थापित करने के लिए अनुदान की शुरुआत की है। 10 बक्सों की इकाई शुरू करने पर 80 फीसदी अनुदान विभाग की ओर से दिया जाता है। शेष 20 फीसदी किसान को लगाना होता है। अनुमानित तौर पर मधुमक्खी पालन के 10 बॉक्स की इकाई में 35 हजार रुपए का खर्च आता है, इसमें सात हजार रुपए किसान को लगाना पड़ता है। 28 हजार रुपए विभाग की तरफ से मिलता है।

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