ChallengeAccepted मुहिम और इस्तांबुल कन्वेंशन में क्या रिश्ता है?

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

पिछले कुछ दिनों से इंस्ट्राग्राम पर महिलाएं ChallegeAccepted के साथ अपनी तस्वीरें शेयर कर रहीं हैं। खास बात यह है की तस्वीर ब्लैक एंड व्हाइट रहती है। इसमें womensupportingwomen, blackandwhitechallenge जैसे हैश टैग भी इस्तेमाल किया जा रहा है। अकेले ChallengeAccepted दुनियाभर में 65 लाख से अधिक बार पोस्ट किया जा चुका है। हैश टैग का इस्तेमाल करते हुए महिलाएं अपने साथियों को भी इस ट्रेंड में शामिल होने के लिए नोमिनेट कर रहीं हैं ।

कहां से शुरू हुआ ट्रेंड?

इस हैश टैग के ट्रेंड में आने का संबंध इस्तांबुल कन्वेंशन से जुड़ा है। जुलाई महीने में पोलैंड ने इस्तांबुल कन्वेंशन से निकलने की घोषणा कर दी है। दरअसल इस्तांबुल कन्वेंशन यूरोपीय देशों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा रोकने की एक साझा संधि है। 1990 के दशक में यूरोपीय देशों ने महसूस किया कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए एक संधि होना चाहिए। जिससे संधि को साइन करने वाले यूपोपीय देशों में ऐसी हिंसा रोकने के लिए कानूनी ढांचा मौजूद रहे।

लेकिन जैसे ही पोलैंड ने संधि को छोड़ने की घोषणा की, इसके खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया। उधर, तुर्की के भी एक मंत्री का बयान आया कि वो इस संधि को छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। जबकि तुर्की के ही इंस्ताबुल में यह संधि साइन की गई थी और तुर्की भी इसका हिस्सा बना था।

ऐसे में, हाल की इन घटनाओं के खिलाफ महिलाओं ने अपना विरोध जताने के लिए यह हैश टैग शुरू किया है। इस मुहिम में कई बड़ी सेलेब्रिटीज से लेकर आम महिलाएं अपनी तस्वीरें पोस्ट कर रही हैं।

इस ChallengeAccepted मुहिम पर सवाल भी उठाए जा रहे

वहीं, दूसरी तरफ इसकी आलोचना भी हो रही है। और ऐसी सोशल मीडिया मुहिम के प्रभाव पर सवाल उठाया जा रहा है। तर्क दिया जा रहा है कि ऐसे ऑनलाइन कैम्पेन का कोई औचित्य नहीं है। वहीं, बहुत से लोग इसे सेल्फ प्रमोशन बता रहे हैं। जिसमें महिलाएं सिर्फ अपनी फोटो पोस्ट करने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। और ऐसा कहने वालों में सिर्फ पुरुष ही नहीं महिलाएं भी शामिल हैं।

हालांकि यह भी सच है कि आज ऑनलाइन प्लेटफार्म हैरासमेंट का एक नया जरिया बन कर उभरें हैं। ऐसे में, अगर कोई सोशल मीडिया मुहिम किसी को खुशी देती है। साकारात्मकता लाती है। किसी को सशक्त महसूस कराती है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। ऐसे समय में जब दुनियाभर में महिलाओं के खिलाफ हिंसा में बढ़ोत्तरी हो रही है। एक छोटी सी उम्मीद की किरण भी बहुत लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकती है। एक मामुली सी दिखने वाली मुहिम भी कईओं की हिम्मत बन सकती है।

Written By Jagriti Rai, She is a Journalism Graduate from the Indian Institute of Mass Communication, New Delhi.

Ground Report के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।