Skip to content
Home » अशोक स्तंभ को लेकर हंगामा क्यों मचा है, जानिए क्या है पूरा विवाद

अशोक स्तंभ को लेकर हंगामा क्यों मचा है, जानिए क्या है पूरा विवाद

अशोक स्तंभ

दिल्ली में सेंट्रल विस्टा परियोजना का काम जारी है। नई संसद भवन का निर्माण किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने हालही में नई संसद की छत पर बनाए गए राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ का अनावरण किया। अब इस पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने मोदी सरकार पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ के शेरों का रूप बदलने का आरोप लगाया है। आरोपों को केंद्र सरकार ने बेबुनियाद बताते हुए अशोक स्तंभ के आकार का मसला बताया है। आइए आपको विस्तार से समझते हैं पूरा विवाद।

क्या है अशोक स्तंभ विवाद और जानकारों ने क्या है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बीते सोमवार को नए संसद भवन इमारत पर बन रहे अशोक स्तंभ का अनावरण किया था, जो 9500 किलो तांबे से बना है। ये 6.5 मीटर ऊंचा है। इससे पहले अभी तक यूपी के वाराणसी के सारनाथ में सबसे बड़ा अशोक स्तंभ लगा हुआ है। ये 250 ईसा पूर्व सम्राट अशोक महान द्वारा देशभर में बनाए गए अशोक स्तंभों की नकल है, जिनमें चार शेर होते हैं।

अशोक स्तंभ को लेकर तमाम विशेषज्ञों और जानकारों का कहना है कि शेर वास्तविक और ऐतहासिक अशोक स्तंभ के शेरों की तुलना में बिल्कुल अलग हैं। जानकारों का कहना कि  सारनाथ में स्थित वास्तविक शेर दयालु और राजसी वैभव वाले हैं। वही मोदी सरकार ने जिस अशोक स्तंभ का अनावरण किया है उसमें शेरों में एक आक्रामकता दिख रही है।

ओवैसी समेट अन्य पार्टियों ने सरकार को घेरा

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अशोक स्तंभ विवाद पर कहा कि पूर्वजों और देश का सबकुछ निगल जाने की आदमखोर प्रवृति का प्रतीक बताया। मोदी सरकार ने देश का अपमान किया है।

कांग्रेस के मीडिया प्रमुख जयराम रमेशन ने इस विवाज पर ट्वीट करते हुए कहा, ‘सारनाथ के अशोक स्तंभ में शेरों की प्रकृति को पूरी तरह से बदल दिया गया है। यह भारत के राष्ट्रीय चिह्न का निर्लज्ज अपमान है।’

असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मामले पर ट्वीट कर कहा, ‘संविधान- संसद, सरकार और न्यायपालिका की शक्तियों को अलग करता है। लोक सभा का अध्यक्ष लोक सभा का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सरकार के अधीन नहीं है। पीएम ने सभी संवैधानिक मानदंडों का उल्लंघन किया है। सरकार के प्रमुख के रूप में, प्रधानमंत्री को नए संसद भवन के ऊपर राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण नहीं करना चाहिए था।’

अशोक स्तंभ विवाद के बीच सरकार ने क्या कहा

इस बढ़ते विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ट्वीट कर सरकार का पक्ष रखते हुए लिखा , ‘यह अनुपात और दृष्टिकोण बोध का मामला है। कहा जाता है कि सौंदर्य आपकी आंखों में होता है। शांति और गुस्सा के साथ भी यही है। सारनाथ का अशोक स्तंभ 1.6 मीटर ऊंचा है और संसद की नई इमारत पर जिस राष्ट्रीय चिह्न को लगाया गया है, वह 6.5 मीटर लंबा है।’

क्या है मोदी सरकार का सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट

मोदी सरकार द्वारा राजधानी दिल्ली में सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत नए संसद भवन और कॉमन केंद्रीय सचिवालय समेत कई नई इमारतों का निर्माण किया जा रहा है। राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक के चार किलोमीटर लंबे राजपथ को विकसित और संवारा जाएगा। नए संसद भवन का कार्य इस साल पूरा होने की संभावना है। इश पूरी योजना पर लगभग 20,000 करोड़ रुपये का खर्च होने का अनुमान है।

Ground Report के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।

कौन हैं अमर्त्य सेन जिन्होंने भारत के मौजूदा हालात को ‘डरावना’ बताया!

मॉब लिंचिंग की शुरूआत कब और कहां से हुई ? ये राज्य अधिक प्राभावित !

%d bloggers like this: