APMC AND MSP

क्या है APMC और MSP, जिसे बचाने के लिए किसान कर रहे हैं आंदोलन?

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लाखों किसान एपीएमसी (APMC) यानी एग्रीकल्चर प्रोडक्ट मार्केट जिसे हम गल्ला मंडी या अनाज मंडी के नाम से भी जानते हैं और एमएसपी (MSP) यानी मिनिमम सपोर्ट प्राईस को बचाने के लिए पिछले डेढ़ महीने से दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानून APMC और MSP को खत्म कर देंगे।

क्या होती है APMC?

APMC (एग्रीकल्चर प्रोडक्ट मार्केट कमेटी) एक तरह का मार्केट बोर्ड होता है जो राज्य सरकारें स्थापित करती हैं। इसका उद्देश्य किसानों को फसल बेचते समय होने वाले वाले शोषण से बचाना होता है। मंडियां व्यापारियों और किसान के बीच काम करती हैं और किसानों को उनकी फसल का उचित भाव दिलवाती हैं। यह तय करती हैं कि किसी किसान को उसकी फसल तय भाव से कम में न बेचना पड़े।

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किसान जो भी अनाज उगाते हैं उसे बेचने के लिए मंडियों में लाया जाता है। यहां इसकी बोली लगाई जाती है। हर राज्य में अलग-अलग जगह पर मंडियां स्थापित की गई हैं। यहां खरीदी करने वाले व्यापारियों को लाईसेंस दिया जाता है। इन्हीं के ज़रिए फिर अनाज मॉल, थोक-खुदरा व्यापारियों तक पहुंचता है। इन्हें सीधे किसानों से खरीदी की अनुमति नहीं होती। किसानों से खरीदी का सारा कार्य मंडियों में होता है। यहां उन्हें सरकार द्वारा तय की गई एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य जितना या उससे अधिक भाव मिलता है।

MSP क्यों है ज़रुरी?

एपीएमसी एक्ट में किसानों को उचित मूल्य दिलवाने और सुगम खरीद बिक्री के लिए कई संशोधन हो चुके हैं लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे इसके अस्तित्व पर खतरा हो जाए। नए कानून में मंडियों के बाहर खरीद बिक्री के रास्ते खोल दिए गए हैं। इससे अब खरीद बिक्री के लिए किसानों को मंडी जाने की ज़रुरत नहीं होगी। किसानों को लगता है कि इससे मंडियां धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी। सरकार की तरफ से मिलने वाला सुरक्षित वातावरण खत्म हो जाएगा और किसान को जब कोई कम दाम में फसल बेचने को मजबूर करेगा तो कोई संस्था उसके साथ होने वाले शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने को मौजूद नहीं होगी। उसके पास शिकायत के लिए कोई मंच नहीं होगा।

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क्या होती है MSP?

एमएसपी फसल के लिए तय की गई एक न्यूनतम राशि होती है जो सरकार द्वारा तय की जाती है। इसमें किसान की फसल के बोवनी से लेकर कटाई तक के खर्च का मूल्यांकन किया जाता है। उसके बाद एक न्यूनतम मूल्य तय किया जाता है। अगर किसान की फसल इस मूल्य से कम में खरीदी जाती है तो सरकार उसकी भरपाई करती है।

तो क्या नए कानून से खत्म हो जाएंगी APMC और MSP?

सरकार द्वारा बारबार यह कहा जा रहा है कि मंडियां और एमएसपी जारी रहेगी। लेकिन नए कानून में दोनों इसके बने रहने का काई पुख्ता आश्वासन दिखता नहीं है। इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं कि किसानों के विश्वास की ग्यारंटी एपीएमसी और एमएसपी को लेकर नए कानून में पुख्ता इंतज़ाम क्यों नही किए गए।

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