US President Power and function

US President Power and function : अमेरिका का राष्ट्रपति कितना ताकतवर होता है ?

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US President Power and function : दुनिया का सुपरपॉवर मुल्क अमेरिका को माना जाता रहा है। वर्तमान समय में सम्पूर्ण विश्व की निगाहे अमेरिका में चल रहे राष्ट्रपति चुनाव पर टिकी हुई हैं। 3 नंवबर को वोटिंग और 4 को चुनावी नतीजों का ऐलान होना है। रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रम्प और डेमोक्रेट पार्टी के जो बाइडेन मैदान में हैं। ट्रम्प जीतेंगे या बाइडेन मारेंगे बाज़ी ? आइये आज आपको बताते हैं कि अमेरिका का राष्ट्रपति कितना ताकतवर होता है ?

अमेरिकी राष्ट्रपति का पद विश्व में सर्वाधिक शक्तिशाली लोकतांत्रिक पद है । लॉर्ड ब्राइस के अनुसार यह दुनिया में महानतम पद है । मुनरो ने कहा था कि- “अमेरिकी राष्ट्रपति लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति द्वारा अब तक धारण की जाने वाली सत्ता की सबसे अधिक मात्रा का प्रयोग करता है ।”

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अमेरिकी राष्ट्रपति को विश्व का सबसे ताकतवर व्यक्ति माना जाता है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं हुआ कि उसके पास अनंत अधिकार हैं।

US President Power and function

  • अमेरिका में कोई भी व्यक्ति अधिकतम दो बार राष्ट्रपति बन सकता है। वहां हर चार साल बाद राष्ट्रपति चुना जाता है। देश का सर्वोच्च कूटनीतिक अधिकारी होने के नाते भी वह नए देशों को भी मान्यता दे सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति सरकार और राज्यों का भी प्रमुख होता है।
  • अमेरिका में तीन ताकतें एक दूसरे को नियंत्रण में रखती हैं। राष्ट्रपति लोगों माफ या नियुक्त कर सकता है लेकिन इसके लिए सीनेट की सहमति जरूरी है। लेकिन सीनेट की मंजूरी के बिना भी राष्ट्रपति अपने मंत्री और दूत नियुक्त कर सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो विधायिका एक्जीक्यूटिव्स पर नियंत्रण रखती है।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति अमेरिका सेना का कमांडर इन चीफ भी होता है, लेकिन युद्ध का घोषणा संसद ही कर सकती है। राष्ट्रपति कैसे संसद की मंजूरी लिये बिना हिंसाग्रस्त इलाकों में सेना भेज सकता है, इस बारे में बहुत साफ संवैधानिक निर्देश नहीं हैं। वियतनाम युद्ध के समय ऐसी ही संवैधानिक चुनौती सामने आई।
  • राष्ट्रपति किसी भी विधेयक पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर सकता है। यह उसका वीटो अधिकार है। लेकिन संसद भी दो-तिहाई बहुमत के साथ राष्ट्रपति के वीटो को पलट सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति भले ही किसी भी देश के साथ संधि कर ले, लेकिन उसे कानूनी मंजूरी सीनेट की दो तिहाई सहमति के बाद ही मिलती है। इसे “एक्जीक्यूटिव एग्रीमेंट्स” कहा जाता है।
  • राष्ट्रपति सरकारी कर्मचारियों को अपना काम करने के निर्देश दे सकता है। इस ताकत को “एक्जीक्यूटिव ऑडर्स” कहा जाता है। यह कानूनी रूप से बाध्य है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति निरंकुश हो जाए। अदालत और कॉन्ग्रेस ऐसे आदेश को खिलाफ कानून बना सकती है।
  • अगर राष्ट्रपति पद का दुरुपयोग करता है या कोई अपराध करता है, तो हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। लेकिन राष्ट्रपति को नियंत्रित करने के लिए कुछ इससे भी कड़े तरीके हैं। संसद के पास बजट अधिकार है। उसकी सहमति के बाद ही राष्ट्रपति के पास खर्च करने के लिए पैसा होगा।
  • अमेरिकी संविधान और सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति की ताकत का साफ जिक्र नहीं करते। यही वजह है कि एक और वीटो ट्रिक का विकल्प मिलता है। इसे पॉकेट वीटो कहा जाता है। खास परिस्थितियों में राष्ट्रपति विधेयक को “अपनी पॉकेट” में डाल सकता है। संसद इस वीटो को पलट नहीं सकती। अमेरिका में यह ट्रिक अब तक 1,000 से ज्यादा बार इस्तेमाल की जा चुकी है।
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