वेब सीरीज़ सेंसरशिप की मांग ज़ोरों पर

क्या वेब सीरीज़ अश्लीलता परोसने का साधन बनती जा रही हैं?

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कोरोना काल में सोशल मीडिया विरोध जताने का और भी सहज माध्यम बन गया है। एक दौर था जब दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर तमाम तरह के विरोध प्रदर्शन देखने को मिलते थे। इसमें कई लोग तरह-तरह की मांगों को लेकर जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन किया करते थे। खैर कोरोना के आगमन से पहले ही जंतर मंतर पर प्रदर्शन का अधिकार छीन लिया गया था। लेकिन एक लोकतांत्रिक देश में आवाज़ ज्यादा देर तक दबाई नहीं जा सकती। सोशल मीडिया ने इसे और पुख्ता किया है। आए दिन ट्विटर पर नए-नए हैशटैग के माध्यम से लोग नए-नए मुद्दों पर अपनी आवाज़ बुलंद करते रहते हैं। हाल ही में ट्विटर पर एक ट्रेंड देखने को मिला #CensorWebSeries यहां कई लोग भारत में बनने वाली वेब सीरीज़ को सरकार द्वारा नियंत्रित करने की मांग कर रहे थे। उनका मानना है कि वेब सीरीज़ से समाज के युवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है।

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कुछ इस तरह के पोस्टर के माध्यम से कहा जा रहा था कि भारत में बनने वाली Web Series अश्लीलता परोस रही हैं साथ ही इससे भारतीय संस्कृति को खतरा है।

इस ट्रेंड पर किए गए कुछ ट्वीट पर नज़र डालते हैं-

इन सभी ट्वीट में भारतीय वेब सीरीज़ में दिखाई जाने वाली अश्लीलता को समाज के लिए खतरनाक बताया गया है। इन सीरीज़ से समाज पर बुरा असर पड़ रहा है। देश का युवा सिगरेट, दारू और गांजे के नशे की लत का शिकार हो रहा है। महिलाओं से होने वाले अपराध भी इन सीरीज़ की वजह से समाज में बढे़ हैं।

वेब सीरीज़ ने कैसे बदला भारतीय सिनेमा?

WEB SERIES का ट्रेंड पिछले कुछ समय में बढ़ा है। नेटफ्लिक्स, एमेज़ॉन प्राईम, ऑल्ट बालाजी, जी 5 जैसे OTT प्लैटफॉर्म पर वेब सीरीज़ की भरमार है। वेब सीरीज़ डिजीटल प्लैटफॉर्म पर चलने वाला सिनेमा का एक नया फॉर्मेट है जिसमें 8 या 10 एपीसोड में कहानी कही जाती है। खास बात यह है कि इन्हें सेंसर बोर्ड से पास नहीं करवाना होता। पिछले कुछ सालों में देश का युवा तेज़ी से डिजीटल माध्यमों की तरफ बढ़ा है। अब लोग टीवी पर सालों तक चलने वाले धारावाहिक की जगह 8 से 10 एपीसोड की वेब सीरीज़ देखना पसंद कर रहे हैं। पहले Web Series की पहुंच केवल स्मार्ट फोन उपभोक्ता या लैपटॉप चलाने वाले युवाओं तक ही थी। लेकिन अब स्मार्ट टीवी के आ जाने से यह सीरीज़ लोगों के ड्राईंग रुम तक पहुंच चुकी है। जहां लोग परिवार संग बैठकर डिजीटल माध्यमों पर रिलीज़ होने वाली फिल्में और सीरीज़ देख सकते हैं। कई वेब सीरीज़ ने तो इतनी सुर्खियां बटोरी की लोग इनके दीवाने हो गए। नेटफ्लिक्स का सेकरेड गेम्स और अमेज़न प्राईम का मिर्ज़ापुर इसमें शामिल है।

हालांकि वेब सीरीज़ पर लगने वाला अश्लीलता परोसने का इ्लज़ाम गलत भी नहीं है। सेंसर बोर्ड का अड़ंगा हटने और डिजीटल माध्यमों के प्रसार की वजह से कई ऐसे प्लैटफॉर्म विकसित हुए जिनका उद्देश्य ऐसी वेब सीरीज़ बनाना हो गया जिसमें सेक्स, अश्लीलता, नग्नता और फूहड़ भाषा की भरमार हो। इन वेब सीरीज़ पर अगर नज़र डाली जाए तो इनमें कहानी से ज्यादा जो़र फूहड़ता परोसने पर होता हैै। बॉलीवुड के बड़े-बड़े फिल्म निर्माता अब वेब सीरीज़ बनाने में अपनी रुची दिखा रहे हैं, क्योंकि वे मानते हैं इंटरनेट की पहुंच थियेटर और टीवी से अधिक हो चुकी है। यह माध्यम उन्हें कहानी कहने के लिए एक बड़ा कैनवास देता है जहां वो समाज की हकीकत को जस का तस दिखा सकते हैं। वहीं सिनेमा और टीवी पर सेंसर बोर्ड उनकी फिल्मों पर कैंची चला देता है।

धीरे-धीरे ही सही लेकिन समाज का एक तबका इन वेब सीरीज़ से खुद को असहज पाता है उन्हें लगता है कि यह समाज को बिगाड़ने का काम कर रही हैं। कई राजनेता भी इनपर पाबंदी की मांग कर चुके हैं। वेब सीरीज़ पर सेंसरशिप की मांग तेज़ हो रही हैं। ट्विटर पर चलने वाला यह ट्रेंड उसी का नतीजा है। दुनिया भर में सरकारें इंटरनेट पर पाबंदी या कंट्रोल की कोशिश में लगी हुई हैं। भारत में पोर्न साईट पर बैन पहले ही लगाया जा चुका है। लेकिन इंटरनेट को कंट्रोल करना अभी दूर की कौड़ी दिखाई देता है।

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