मास्क लगाने से ऑक्सीज़न में कमी

मास्क लगाने से ऑक्सीज़न की कमी हो जाने वाली बात गलत है

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कोरोना महामारी की वजह से मास्क लगाना ज़रुरी हो गया है। लेकिन कई लोगों को इससे परेशानी होती है। कुछ दिन पहले की बात है जब एक व्यक्ति अपने दोस्त से कह रहे थे कि यार ये मास्क भी बड़ी मुसीबत है, लगाओ तो दिक्कत न लगाओ तो दिक्कत, वो आगे कहते हैं मैं कल वॉट्सएप पर पढ़ रहा था कि ज़्यादा देर मास्क लगाओ तो शरीर में ऑक्सीज़न की कमी हो जाती है। बताओ अब करें तो क्या करें?

इस तरह के भ्रामक मेसेज वॉट्सएप और सोशल मीडिया पर आते रहते हैं। मास्क से ऑक्सीज़न की कमी होने वाली बात का खंडन अमेरिका के विशेषज्ञों ने किया है। अमेरिकन लंग असोसिएशन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अल्वर्ट रिज्जो की मानें तो सांस लेने के लिहाज़ से मास्क से कोई साईडएफेक्टन नहीं है। यहां तक कि फेफड़ा रोग से लंबे वक्त तक पीड़ित रहा व्यक्ति भी बेहिचक मास्क लगा सकता है। अस्थमा के मरीज़ भी साधारण मास्क का उपयोग कर सकते हैं। अमेरिका के डॉ. मार्क लुइस ने इस बात को साबित करने के लिए एक साथ 30 मास्क लगाकर आठ घंटे तक काम किया। उन्होंने वीडियो ट्वीट कर बताया कि शरीर में तब भी ऑक्सीज़न का स्तर 98 प्रतिशत बना रहा।

कोरोना महामारी के बीच मास्क ज़रुरत बन चुका है। इसके प्रयोग से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। जब WHO ने कहा कि वायरस एक घंटे से भी ज्यादा देर तक वातावरण में रह सकता है तब से मास्क की अहमियत और बढ़ी है। अब बाज़ार में कई तरह के डिजाईनर मास्क उपलब्ध हैं। कपड़े से बने मास्क या क्लिनिकल मास्क सबसे ज़्यादा कारगर हैं। जबकि वाल्व वाले N95 मास्क उतने कारगर नहीं है। आप 8 घंटे मास्क इस्तेमाल करने के बाद उसे बदल दें या 20 सेकेंड तक साबुन से धोने के बाद धूप में सुखाकर उसका दोबारा उपयोग करें।

मास्क को लेकर कई तरह के जागरुकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। मास्क को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए कश्मीर के एक लोकल उर्दू अखबार ने अपने पहले पन्ने पर अपने पाठकों के लिए मास्क लगाकर भिजवाया और लिखा की मास्क ज़रुरी है।

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