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बेरोज़गारी के सवाल पर योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को ही ठहरा दिया ज़िम्मेदार

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न्यूज़डेस्क।। देश में बेरोज़गारी की समस्या का समाधान किसी सरकार के पास दिखाई नहीं देता। योग्य और शिक्षित युवाओं को भी उनकी योग्यता के अनुसार नौकरियां नहीं मिल रही हैं। हाल ही में जारी हुए CSDS के सर्वे में यह बात सामने आई थी कि भारत में अधिकतर युवा सरकारी नौकरी चाहते हैं। लेकिन सरकार है कि इन नौकरियों पर कुंडली मार कर बैठ गई है और बेरोज़गारी की समस्या के लिए युवाओं की योग्यता पर ही सवाल खड़े कर रही है। उत्तर प्रदेश के रोज़गार मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने विधानसभा में जवाब देते हुए कहा था कि राज्य में 21 लाख से ज़्यादा बेरोज़गार युवा हैं।

रोज़गार है लेकिन हमारा युवा योग्य नहीं

हाल ही में एक निजी चैनल के कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जब बेरोज़गारी पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सरकार के पास बहुत नौकरियां हैं लेकिन हमारे युवा इसके योग्य नहीं है। योगी ने कहा 1 लाख 37 हज़ार शिक्षकों की भर्ती की जानी है लेकिन ऐसे योग्य उम्मीदवार ही नहीं जो परीक्षा पास करें और नौकरी करें। पुलिस विभाग में 1 लाख 60 हज़ार पद खाली हैं लेकिन योग्य उम्मीदवार नहीं है। अब समझ यह नहीं आता कि योगी जी की योग्यता का मापदंड क्या है? जो हमारे युवा दिन रात एक कर सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं क्या वो सभी अयोग्य हैं। और युवा अगर अयोग्य है, तो खराबी भी तो आपके शिक्षा तंत्र में होगी। उसका कौन जिम्मेदार है?

चपरासी की नौकरी के लिए PHD धारक के आवेदन

हाल ही में उत्तरप्रदेश में चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन मांगे गए जिसमें ज़रूरत थी पांचवी पास उम्मीदवार की, 62 पदों की लिए आवेदन आये कुल 93000 जिसमें 3700 PHD धारक, 50 हज़ार ग्रेजुएट, 28 हज़ार पोस्ट ग्रेजुएट लोगों ने आवेदन दिया। अब बताइये योग्यता की कहाँ कमी है। क्या हमारे ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट छात्र किसी काम के योग्य नहीं है? तो फिर थोक के भाव मोटी-मोटी फीस लेकर डिग्रियां क्यों बांटी जा रही है? दंगाई बनाने के लिए? या मंदिर यहीं बनेगा के नारे लगाने के लिए?

नितिन गडकरी ने माना नहीं है नौकरियां

बेरोज़गारी से जूझ रहे लोगों लगता है शायद आरक्षण उनकी समस्या दूर कर देगा। जब मराठा आरक्षण की मांग हुई तो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने साफ कह दिया था आरक्षण लेकर क्या करोगे नौकरियां तो है ही नहीं। जब से डिजिटल इंडिया हुआ है बैंकिंग, रेलवे, आईटी हर क्षेत्र में नौकरियां घटी हैं। तो सरकार के मंत्री खुद मान रहे हैं नौकरियां नहीं है।

ऐसे विकास का क्या फायदा?

भारत की जीडीपी ने 8.2% की छलांग लगाई है। अच्छी बात है लेकिन ऐसी तरक्की किस काम की जिसमें ऊर्जा से भरे नौजवानों के पास करने को कोई काम ही न हो।लोगों के घर कैसे चलेंगे? युवा जो अपनी शिक्षा लोन लेकर पूरी कर रहा है उनका क्या होगा? परिवार में एक एक व्यक्ति का रोज़गार चार लोगों के चहरे पर खुशी लाता है उनके सपनों को पंख लगते हैं वो आगे बढ़ते हैं। अच्छे दिन का एक ही फार्मूला होता है एक अच्छा रोज़गार। लेकिन सरकार के लिए शायद यह सिर्फ नारा है।

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