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उत्तर प्रदेश: ‘वादा किया था रामराज्य का, बना दिया गुंडाराज’

Vikram Joshi murder case: no ramrajya in uttar pradesh in yogi goverment
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यह फोटो हम यह बताने के लिए लगा रहे हैं कि जंगलराज क्या होता है? जंगल में न अदालत होती है, न कोई कानून। जो जितना ताकतवर है, वह अपने से कमजोर को, जिसे चाहे सताए।

महज पांच दिन पहले अमेठी से आईं मां-बेटी ने यूपी विधानसभा के ठीक सामने खुद को आग लगा ली थी। दोनों खुद की देह में आग लगाए विधानसभा के ठीक सामने दौड़ती रहीं लेकिन आम जनता की आवाज उठाने के लिए बनाई गई यह विशालकाय इमारत मां-बेटी के रत्ती भर भी काम न आ सकी।

priyanshu | Lucknow

जमीन विवाद में गांव के कुछ दबंग दोनों को सता रहे थे लेकिन एफआईआर के बावजूद पुलिस ने कुछ नहीं किया और तो और दबंगों की तहरीर पर पीड़िता के खिलाफ ही धारा 323, 452, 308 का मुकदमा दर्ज कर लिया। धारा 452 किसी को घर में घुसकर पीटने पर लगाई जाती है जबकि इस मामले में महिला को ही घर में घुसकर पीटा गया था।

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पीड़िता ने आज इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, उसकी बेटी अभी अस्पताल में है। मरने से पहले दिए गए बयान में महिला ने कहा था कि हमलावरों की पुलिस के साथ अच्छी साठगांठ के चलते उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही।

और इसी साठगांठ का नतीजा है कि आज एक पत्रकार ने भी दम तोड़ दिया। उन्हें उनकी बेटियों के सामने सिर में गोली मारी गई थी। घटना राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे पॉश इलाके गाजियाबाद की है।

पत्रकार विक्रम जोशी ने अपनी भांजी से हो रही छेड़छाड़ पर थाने में तहरीर दी थी लेकिन पुलिस ने न कोई कार्रवाई की और न ही किसी की गिरफ्तारी। गिरफ्तारी हो जाती तो अपने खिलाफ तहरीर से नाराज अपराधी सोमवार देर रात पत्रकार को गोली न मार पाते।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘अपनी भांजी के साथ छेड़छाड़ का विरोध करने पर पत्रकार विक्रम जोशी की हत्या कर दी गई। वादा था राम राज का, दे दिया गुंडाराज।’

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बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लिखा, ‘निर्भिक पत्रकार विक्रम जोशी के परिवार के साथ मेरी गहरी संवेदनाए हैं। देश में भय का माहौल पैदा किया जा रहा है। आवाज दबाई जा रही है और मीडिया को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। खौफनाक।’

गाजियाबाद के डीएम अजय शंकर पांडे ने बताया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विक्रम जोशी के परिवार को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और पत्नी को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है लेकिन इसे ही अपराध के बाद ‘लकीर पीटना’ कहा जाता है।

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लोग कह रहे हैं कि जो सरकार अपने पुलिसकर्मियों (विकास दुबे प्रकरण) को सुरक्षा नहीं दे पा रही है, वह आम जनता और पत्रकारों को सुरक्षा कहां से दे पाएगी। योगी सरकार लोगों की इस बात को अपने प्रति नरमी भी मान सकती है या खुद पर से लोगों का उठता भरोसा भी, लेकिन दोनों में से कोई एक।

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