सत्ताधीशों और पुलिस संरक्षण में पले सांप ने पुलिस को ही डस लिया?

The most wanted Vikas Dubey arrested by the Ujjain police, had arrived to see Mahakal.
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यूं तो इस धरती पर सैकड़ों तरह के ज़हरीले सांप पाए जाते हैं। उन्हीं ज़हरीले सांपों में कुछ ऐसे भी ज़हरीले सांप होते हैं, जिनका ज़हर दुनिया के धातक से धातक ज़हरो में से गिना जाता है। ये माना जाता रहा है कि कोई व्यक्ति अगर किसी सांप को पाल-पोसकर बड़ा करता है और उसे एक परिवार के सदस्य की तरह रखता है, मगर जब किसी रोज़ वही व्यक्ति उस सांप पर किसी कारण हमलावर होता है, तो सांप उस व्यक्ति को भी डसने में ज़रा सी भी देर नहीं करता है।

आप सोच रहे होंगे कि हम आपको सांप से जुड़ी कहानी क्यों बता रहे हैं ? दरअसल; इस घटना में सांप एक व्यक्ति के रूप में है, जिसने उसे ही पालने वालों को डस लिया है। इस घटना का संबंध उत्तर प्रदेश के कानपुर ज़िले के चौबेपुर थाना के बिकरू गांव का है। 3 जुलाई की रात जब पुलिस कुख्यात अपराधी विकास दुबे को पकड़ने उसके गांव पहुंची, तो विकास दुबे ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर एक शातिराना जाल बिछाया और पुलिस के आते ही उनपर अंधाधुंध फायरिंग कर 8 पुलिस कर्मियों को मौत के घाट उतार दिया।

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इस घटना के विषय में विस्तार से बात करने से पहले आपको उत्तर प्रदेश में 2017 में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आने के बाद भाजपा ने यूपी की कमान फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ को सौंपी थी। यूपी की कमान सांभलते ही सीएम योगी ने अपराधियों को ललकारते हुए कहा था कि, “अपराधी या तो अपराध छोड़ दें या उत्तर प्रदेश”।

सूबे की योगी सरकार ने 3 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर अपनी सरकार की तमाम ख़ूबियां गिनवाई थीं। बीते तीन वर्षों में जिन महात्वपूर्ण बिंदुओं को नहीं गिनवाया गया या अख़बारों ने प्रमुखता से नही छापा गया उनको हम बताते हैं।

यूपी में अपराध का वो काला सच जो अखबारों में नहीं छापा गया

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी देश भर में अपराध के आंकड़ों का ब्योरा रखने वाली संस्था है जो हर साल अपराध से संबंधित आंकड़े जारी करती है। इसी संस्था ने उत्तर प्रदेश में हुए कुछ अपराधों से जुड़े कुछ तथ्य सामने रखे हैं ।

कानून व्यवस्था पर योगी सरकार का दावा है कि उसने काफी सुधार किया है। लूट, डकैती व मर्डर की घटनाएं पिछले तीन साल में कम हुई हैं। वहीं बलात्कार के मामलों में भी कमी आई है। हालांकि एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि 2018 में यूपी में देशभर में सबसे अधिक बलात्कार के केस (59,445) दर्ज किए गए।

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योगी सरकार पिछले तीन साल में एनकाउंटर्स को लेकर भी चर्चा में रही। कुछ महीने पहले सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 3,599 एनकाउंटर हुए हैं जिसमें 73 अपराधी ढेर हुए जबकि 4 पुलिसकर्मी शहीद। इस दौरान पुलिस ने 8,251 अपराधी गिरफ्तार किए गए। वहीं एनएचआरसी की ओर से यूपी सरकार व पुलिस को दो बार नोटिस भी जारी किया गया।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2018 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश में IPC के तहत अपराध के 3,42,355 मामले दर्ज हुए। रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में राज्य में सबसे अधिक 4018 हत्याएं हुई। वहीं, उत्तर प्रदेश में 3946 रेप के मामले दर्ज हुए।

इन आंकडो को देखकर क्या कोई सरकार इस बात का जश्न मना सकती है कि उसने 3 वर्ष में सूबे के हालात को बदल दिया और अपराधियों द्वारा दिए जा रहे अंजाम में बीते 3 साल में भारी कमी आई। मगर असल में ऐसा दिखाई तो देता नहीं है ।

देश हो या कोई प्रदेश सत्ता के संरक्षण हासिल किए बग़ैर कोई अपराधी की हिम्मत नहीं हो सकती की वो पुलिस के जवानों के इतनी दर्दनाक तरीक़े से मौत के घाट उतार कर फरार हो सके। मगर कानून को जूते की नोक पर रखने वाला यूपी का एक माफिया विकास दुबे इस सरंक्षण के तहत हिम्मत पाने वाला वो अपराधी है।

विकास दुबे को सत्ताधीशों का संरक्षण था हासिल?

यूपी में इस अपराधी के वर्तमान पर बात करने से पहले इसके इतिहास पर कुछ रोशनी डालना भी ज़रूरी हो गया है। पिछले 2 दशको में यूपी के अंदर सरकार किसी की भी रही हो मगर माफिया डॉन विकास सबका करीबी और चहेता बनकर रहा है। यही वजह रही कि मुकदमों की संख्या 60 तक पहुँचने के बाद भी विकास दुबे की दबंगई पर कोई फर्क नही पड़ा।

शिवली विकास दुबे का गढ़ है जहां बैठकर उसने बीस साल तक कानपुर को मिर्जापुर बनाये रखा है। साल 2001 में भाजपा सरकार के राज्यमंत्री संतोष शुक्ला को शिवली थाने के अंदर ही गोलियों से भून कर विकास दुबे ने यूपी के आपराधिक जगत में जोरदार दस्तक दी। जब सरकार का मंत्री थाने के अंदर ही मारा जाए तो फिर बाकी लोगो की क्या बिसात। यह दुस्साहसिक घटना विकास दुबे के अपराधिक करियर में मील का पत्थर साबित हुई और वह केवल यूपी ही नही बल्कि देश की सबसे बड़ी खबर बन गया।

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वर्तमान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। संतोष शुक्ला की हत्या करने के बाद कई महीनों तक विकास फरार रहा। उसके सर पर पचास हजार का इनाम भी घोषित हो चुका था और कयास लगाये जा रहे थे कि पुलिस उसका इनकाउंटर कर देगी। तब सत्ता के करीबी एक नेता ने अपनी गाड़ी में बिठाकर उसको कोर्ट में आत्मसमर्पण करवाया था। वह ज्यादा दिन जेल में नही रहा और कुछ महीनों में ही उसकी जमानत हो गयी। इसके बाद संतोष शुक्ला हत्याकांड के गवाह एक-एक कर मुकरते गये। यहाँ तक कि जिस थाने में शुक्ला को गोली मारी गयी वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने विकास को पहचानने से इनकार कर दिया।

इस मामले में विकास को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए थी लेकिन हुआ कुछ नही। इतने बड़े नेता का दिन दहाड़े कत्ल करने के बाद भी विकास दुबे आजाद घूमता रहा क्योंकि उसके राजनैतिक आकाओं के लिये वह चिराग का ताकतवर जिन्न था और अपने आका की हर ख्वाहिश पूरी करने का दम रखता था।

वैसे ये अलग बात है कि ब्राहृमण राजनीति के बाहुबली बन चुके विकास दुबे ने मतभेद होने पर सजातीयों को भी नही बक्शा और अपने चचेरे भाई अनुराग पर भी जानलेवा हमला करवाया। बसपा सरकार में विकास दुबे ने जेल के अन्दर रहते हुए ही कई वारदातों को अंजाम दिया। विकास का जलवा सपा सरकार में भी कायम रहा और उस दौरान उसकी पत्नी ने सपा के बैनर तले घिमऊ से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा।

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मायावती की सरकार में विकास दुबे की बहुत अच्छी पैठ रही। उसने खुद को बसपा के सोशल इंजीनियरिंग वाले मॉडल में फिट कर लिया था। उसके रसूख का आलम यह था कि वह जेल के अंदर रहते हुए ही शिवराजपुर से नगर पंचायत का चुनाव भी जीत गया। इलाके की तमाम सड़को के किनारे लगे माननीय विकास दुबे के नाम वाले पत्थर यह बताने के लिये काफी है कि सूबे की राजनीति का अपराधियो से रिश्ता कितना मधुर रहा है। विकास एक बार जिला पंचायत का सदस्य भी रह चुका है।

इलाकाई सूत्र बताते है कि विकास दुबे भाजपा में अपने और अपने करीबियों के लिये टिकट की तलाश में था लेकिन सत्तारूढ़ दल के ही एक विधायक से खट-पट उसके गले की फांस बन गयी। अपने इलाके में विकास की पकड़ किस कदर मजबूत थी यह ऐसे समझा जा सकता है कि उसे अपने घर में पुलिस की दबिश की सूचना काफी पहले मिल गयी थी। उसे आशंका थी कि पुलिस उसका इनकाउंटर न कर दे इसलिये उसने आस-पास के इलाकों से बदमाश बुला लिये जो स्वचालित हथियारों से लैस थे।

पुलिस टीम पर हमला करने के लिए विकास दुबे ने बेहद ही शातिराना जाल बिछाया था

गांव के कुछ लोगों से बात करने पर ये बात पता चलती है कि उस रात पुलिस के आने से पहले ही विकास दुबे के घर को ओर जाने वाली सड़क को जेसीबी मशीन खड़ा करके बंद कर दिया गया । खंबों पर लगी लाइट्स भी बंद कर दी गई थीं। कुछ मकानों की छतों पर भी हलचल मालूम पड़ रही थी । कुछ लोग मुंह पर साफा भी बांधे दिखाई दे रहे थे, जो जल्दी और हड़-बड़ाहट में नज़र आ रहे थे ।

जैसे ही पुलिस विकास दुबे को पकड़ने उसके घर के पास पहुंची तो विकास ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। इसमें सीओ, तीन एसआई, चार कांस्टेबल शहीद हो गए थे। इसके अलावा, दो ग्रामीण, एक होमगार्ड और 4 पुलिसवाले घायल हो गए थे। विकास दुबे के घर तीन तरफ से सड़क आती हैं। तीनों तरफ की सड़कों पर तकरीबन सौ मीटर की दूरी पर इधर उधर खून-खून ही फैला हुआ था। देखने से पता चलता है कि किस तरह से पुलिसकर्मी खून से लथपथ होकर जान बचाने को इधर-उधर भागते रहे।

दुबे गैंग ने बड़ी साजिश की थी। वो पुलिसकर्मियों को मारकर शव जलाने के प्रयास में थे। इसीलिए एक के ऊपर एक रखकर शवों के ढेर लगा दिए थे। पुलिस की गाड़ियों को भी फूंकने की तैयारी थी। मगर तभी भारी पुलिस बल पहुंच गया और बदमाश फरार हो गए।

सूत्रों के मुताबिक जो कॉल डीटेल्स सामने आई हैं, उसे आधार पर ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि पुलिस की रेड होने वाली है, इस खबर को विकास दुबे तक किसी पुलिसवाले ने ही पहुंचाया है। हालांकि पुलिस महकमे का कोई भी अधिकारी इस पर बात नहीं कर रहा है। लेकिन सोर्सेज के मुताबिक शक के घेरे में एक दरोगा, एक सिपाही और एक होमगार्ड भी है। इन तीनों की कॉल डीटेल्स के आदार पर इनसे पूछताछ भी हुई है।

यूपी STF ने चौबेपुर SO विनय तिवारी को इस मामले में ग्रिल कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे पर FIR दर्ज करने के मामले में SO विनय तिवारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। चौबेपुर थानेदार विनय तिवारी पर विकास दुबे के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बारे में मुखबिरी का शक है। सूत्रों के मुताबिक जब पुलिस टीम विकास दुबे को गिरफ्तार करने पहुंची थी तो थानेदार विनय तिवारी दबिश में सबसे पीछे चल रहा थे। CO देवेंद्र मिश्रा और थानेदार विनय तिवारी में पटरी नहीं थी।

पुलिस ने विकास दुबे के पिता रामकुमार दुबे को भी हिरासत में ले लिया है। इसी के साथ विकास के सभी बैंक खातों को सीज कर दिया गया है। पुलिस विकास की सभी संपत्तियों की जांच कर रही है। चौबेपुर मुठभेड़ में चौबेपुर एसओ विनय तिवारी की भूमिका संदिग्ध मानते हुए आईजी रेंज कानपुर ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का ऑर्डर जारी कर दिया है।

पुलिस के चेहरे पर बदले की भावना और ग़ुस्सा साफ नज़र आ रहा है

कानपुर के चौबेपुर में हुई मुठभेड़ में शहीद पुलिस कर्मियों की शहादत का बदला लेने के लिए कानपुर प्रशासन ने कुख्यात अपराधी विकास दुबे के घर को चंद मिनटों में ही तहस नहस कर दिया। विकास के घर को उसी जेसीबी से तोड़ा गया जिसने गुरुवार रात को पुलिस की गाड़ियों का रास्ता रोका था। पुलिस ने लग्जरी कारों को भी नष्ट कर दिया है।

अब देखना है कि सत्ता के संरक्षण में पाला-पोसा गया ये अपराधी कब पकडा जाता है और क्या सज़ा पाता है । 60 से ज़्यादा मुक़दमों के बाद भी खुला घुमने वाला अपराधी सत्ता संरक्षण और पुलिस की सांठगाठ से ही शय पाता है । सत्ता और क़ानून मिलकर ही ऐसे अपराधी को जन्म देते हैं और पाल-पोसकर बड़ा भी करते हैं ।

कानपुर से नेहाल रिज़वी की ग्राउंड रिपोर्ट

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