विकास दुबे का फर्ज़ी एनकाउंटर पुलिस का अंध समर्थन हासिल करने की कोशिश है

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योगी लम्बे समय से भाजपा में चल रही ब्राह्मण बनाम ठाकुर की राजनीति से जूझ रहे हैं। विकास दुबे की हत्या के बाद इलाके के सारे दबंग ब्राह्मणों के पास योगी के ठाकुरवाद के आगे सर झुकाने के अलावा कोई और विकल्प नही बचा है।

विकास दुबे की हत्या कर दी गयी है। इसके साथ ही यह साफ हो गया है कि योगी सरकार में गुण्डा राज है और यूपी में विधि द्वारा स्थापित व्यवस्था वेंटिलेटर पर है। विकास की लाश के साथ बहुत सारे राज भी दफन हो गए हैं। हम कभी नही जान पाएंगे कि अपने पूरे आपराधिक कॅरियर में विकास को किन-किन राजनेताओं का संरक्षण मिला।

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विकास के साथी जय बाजपेयी की गिरफ्तारी से यह भनक लगी थी कि जय विकास दुबे की काली कमाई को तमाम जगहो पर इनवेस्ट करता था।  ये लोग तमाम नेताओं के चुनाव को भी फाइनेंस करते थे। नेता, मंत्री से लेकर संतरी और ऊँचे पदो पर बैठे अधिकारियों तक उसके संबंघ बहुत मधुर थे। यही वजह थी कि जुर्म की दुनिया में दो दशक से ज्यादा उसका सिक्का चलता  रहा। विकास से पूछताँछ होती तो ये सारे  नाम सामने आने तए थे।

विकास की मौत कानून की मौत है। वह 8 पुलिसकर्मियों की हत्या का जिम्मेदार था। लेकिन याद कीजिए कि एनकाउंटर तो अजमल आमिर कसाब का भी नही किया गया था। उसे भी पूरी न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही फांसी हुई। मौका-ए-वारदात पर मौजूद सारे सबूत पुलिस की कहानी का मजाक उड़ा रहे हैं। एनकांटर वाली जगह की तस्वीरे देखे तो आप पाएंगे कि तेज बारिश में गाड़ी इतनी सफाई से पलटी है कि वहां डिवाइडर के पत्थरों को खरोंच तक नही लगी।

पूर्व आइएसए अधिकारी सूर्य प्रताप लिखते हैं कि-

“पहले विकास दुबे सफारी में सफर कर रहा था। बाद में उसने 30-40 पुलिस वालों से लड़ कर अपनी गाड़ी बदलवाई कि मुझे टीयूवी में बैठना है। कुछ मिनट बाद टीयूवी पलटी, विकास हथियार लेकर भागा और पुलिस ने जान पर खेल कर उसे मार गिराया। आप क्रोनोलॉजी समझिये। गाड़ी इतने सलीके से पलटी गयी है कि चश्मदीद भी बोल रहे है कि प्लांटेड है।”

विकास के पैर में रॉड पड़ी थी और वह लंगड़ा कर चलता था। इसका मतलब वह भाग नही सकता था। पुलिस के मुताबिक उसे भागते वक्त गोली मारी गयी जो उसके सीने में लगी। तो क्या वह रिवर्स गियर में यानि उल्टा भाग रहा था? 

बुधवार को विकास दुबे के एक मरियल से दिखने वाले साथी प्रभात मिश्रा के एनकाउंटर की कहानी भी लगभग ऐसी ही थी। उसे फरीदाबाद से कानपुर ला रही पुलिस की गाड़ी पंक्चर हो गयी। इस बीच वह पुलिस के दरोगा से पिस्तौल छीन कर भागा। पुलिस को मजबूरन गोली चलानी पड़ी और बदमाश मारा गया।

आज सुबह विकास दुबे को ला रही गाड़ी भारी बारिश में पलट गयी और विकास दुबे पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स के सिपाही से हथियार छीन कर भागा। इन घटनाओं के बाद सवाल यह है कि क्या बदमाशों को पुलिस से बेहतर ट्रेनिंग मिलती है जो वो पुलिस के जवान से हथियार छीनकर भाग जाते है। क्या पुलिस विभाग को अपनी गाड़ियां और ड्राइवरों को बदलने की जरूरत है।

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विकास की गाड़ी के साथ एसटीएफ की एक एसयूवी भी चल रही थी फिर भी लंगड़ा विकास भागा। इन गाड़ियों के पीछे मीडिया की गाड़ियां भी लगी हुई थी जिन्हे मुठभेड़ वाली जगह से कुछ किलोमीटर पहले ही अलग-अलग चेक पोस्ट और टोल प्लाजा में रोक दिया गया।

सोशल मीडिया और ट्विटर पर मौजूद हजारों यूजर इस फर्जी हत्याकांड पर सवाल उठा रहे है। ट्विटर पर हैश टैग फेक एनकाउंटर टाप ट्रेंड में था और शाम 4 बजे तक इस बारे में 64 हजार से ज्यादा ट्वीट किये जा चुके थे। 

इस कथित एनकाउंटर के जरिये योगी आदित्यनाथ ने एक तीर से कई निशाने साधे है। योगी लम्बे समय से भाजपा में चल रही ब्राह्मण बनाम ठाकुर की राजनीति से जूझ रहे हैं।  विकास दुबे की हत्या के बाद इलाके के सारे दबंग ब्राह्मण छत्रपो के पास योगी के ठाकुरवाद के आगे सर छुकाने के अलावा कोई और विकल्प नही बचा है।

इसके अलावा विकास दुबे को संरक्षण देने वाले नेताओं को भी संदेश मिल चुका है। ऐसा बिल्कुल भी नही है कि इस फर्जी एनकाउंटर के बाद यूपी में अपराध खत्म हो जायेगा लेकिन अपराध की जाति जरूर बदल जायेगी। हम कुलदीप सेंगर, चिन्मयानन्द और राजा भैया वाले मामले में देख चुके है कि अपराधी अगर मुख्यमंत्री का सजातीय है तो पुलिस प्रशासन उसके आगे नतमस्तक है।

सेना और पुलिस के समर्थन के बिना कोई भी सत्ता निरंकुश नही हो सकती। विकास के फर्जी एनकाउंटर की मौन सहमति देकर योगी ने पुलिस का अंध समर्थन हासिल करने की कोशिश की है।

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2014 में केन्द्र की सत्ता हासिल करने के बाद से भाजपा नेताओं के बयानों पर गौर करें तो ये लोग हमेशा सेना और पुलिस पर सवाल उठाने वालो को कोसते रहे है। गुरूवार को मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी विपक्ष को पुलिस के दावों पर सवाल उठाने के लिये कोसा था।

मध्यप्रदेश पुलिस का कहना था कि उसने विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया है। उस समय कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि विकास दुबे का पकड़ा जाना स्क्रिप्टेड है और मघ्यप्रदेश भाजपा के ही एक वरिष्ठ नेता का इसमे हाथ है।

बताया जाता है कि यह नेता ब्राह्मण है औैर विकास दुबे को संरक्षण देते रहते थे। उनका विधानसभा क्षेत्र यूपी की सीमा से सटा हुआ है और महोदय शिवराज सिंह चौहान में मंत्री भी है। इन दबंग नेता का अपने इलाके से सटे हुए यूपी के इलाको में भी अच्छा प्रभाव रहा है लेकिन विकास दुबे के मारे जाने के बाद इनकी ब्राह्मण वर्चस्व वाली राजनीति को तगड़ा झटका लगा है।

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इस फर्जी एनकाउंटर के साथ ही योगी ने दिखा दिया है कि कानून का राज उनके लिये कोई मायने नही रखता। योगी राज मे होने वाले एनकाउंटरो पर पहले भी सवाल उठते रहे है। सत्ता के लिये हत्या का यह खेल बेहद खतरनाक है।

इस मामले की न्यायिक जाँच नही होती तो यह मानने के अच्छे-भले कारण है कि कल बन्दूक की गोली कही और भी चल सकती है। विकास को उसके गुनाहो की सजा मिलनी चाहिये थी। उसे फाँसी होनी चाहिये थी लेकिन न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद। पुलिस का काम सजा देना नही होता। यह काम न्यायालय का है जिसका अतिक्रमण किया गया है।

ये लेख कानपुर से स्वतंत्र पत्रकार अमितेश अग्निहोत्री ने लिखा है ।

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