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विकास दुबे एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा ‘पूरी व्यवस्था दांव पर है’

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विकास दुबे एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। आज की सुनवाई में प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे ने इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाते हुए इसे सिस्टम की विफलता बताया है।

 
कोर्ट सरकार द्वारा बनाई गई समिति में एक सेवानिवृत्त SC जज और एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी को जोड़ना चाहती है। इस जांच से कानून का शासन मजबूत ही होगा और पुलिस का मनोबल नहीं टूटेगा। यह केवल एक घटना नहीं है जो दांव पर है, पूरी व्यवस्था दांव पर है।’ 

– चीफ जस्टिस, एसए बोबड़े

5 बड़ी बातें

01

चीफ जस्टिस ने इसे सिस्टम की विफलता बताया

मामले की सुनवाई कर रहे प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे ने इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाते हुए इसे सिस्टम की विफलता बताया है। कोर्ट ने विकास दुबे पर संगीन अपराधों में नाम दर्ज होने के बाद भी जमानत दिए जाने को लेकर हैरानी भी जताई।

02

यूपी सरकार का पक्ष तुषार मेहता ने रखा

यूपी सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विकास दुबे के खिलाफ 65 FIR दर्ज थी और वो पैरोल पर बाहर आया था, उसने हिरासत से भागने की कोशिश की थी। तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए मुठभेड़ को सही ठहराया।

03

हरीश साल्वे ने तेलंगाना एनकाउंटर से की तुलना

यूपी डीजीपी का पक्ष रखते हुए हरीश साल्वे ने कहा कि यह मामला तेलंगाना मुठभेड़ से कई मामलों में  अलग है। यहां तक कि पुलिसकर्मियों को भी मौलिक अधिकार है। क्या पुलिस पर अत्यधिक बल का आरोप लगाया जा सकता है जब वह एक खूंखार अपराधी के साथ लाइव मुठभेड़ में लगी हो? इसपर सीजेआई बोबडे ने कहा- आपने अपने जवाब में कहा है कि तेलंगाना में हुई मुठभेड़ और इसमें अंतर है लेकिन आप कानून के राज को लेकर ज़रूर सतर्क होंगे। CJI ने कहा कि ‘हैदराबाद और विकास दुबे एनकाउंटर केस में एक बड़ा अंतर है। वे एक महिला के बलात्कारी और हत्यारे थे। ये (दुबे और सहयोगी) पुलिसकर्मियों के हत्यारे थे। CJI ने कहा कि ये बिल्कुल साफ है कि तेलंगाना वाले मामले में आरोपी बिना हथियार के थे।

04

चीफ जस्टिस ने कहा ट्रायल होना चाहिए था

सीजेआई ने यूपी सरकार से कहा कि राज्य सरकार के रूप में वो कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार हैं और इसके लिए एक ट्रायल होना चाहिए था। CJI ने कहा कि कोर्ट सरकार द्वारा बनाई गई समिति में एक सेवानिवृत्त SC जज और एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी को जोड़ा जाए। सीजेआई ने कहा कि ‘इस जांच से कानून का शासन मजबूत ही होगा और पुलिस का मनोबल नहीं टूटेगा। यह केवल एक घटना नहीं है जो दांव पर है। पूरी व्यवस्था दांव पर है।’ 

05

विकास दुबे की ज़मानत पर सवाल

सीजेआई ने विकास दुबे को मिली जमानत पर भी हैरानी जताई। सीजेआई ने कहा कि ‘हमें इस बात से हैरानी है कि इतने आपराधिक मामले सिर पर दर्ज होने वाला व्यक्ति जमानत पर रिहा था और उसने आखिरकार ऐसा कर दिया। हमें सभी आदेशों की एक सटीक रिपोर्ट दें। यह सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।

पढ़िए विकास दुबे के बनने और यूपी पुलिस के हाथों एनकाउंटर में मारे जाने की पूरी कहानी

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