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Van Rakshak: एक्टर धीरेंद्र ठाकुर से विशेष बातचीत, पढ़ें मधुबनी टू मुंबई वाया दिल्ली तक का सफर…

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Van Rakshak Film actor Dhirendra thakur Exclusivily on Ground Repor, Read Full Story of Van Rakshak Chiranjilal Dhirendra Thakur from Basopatti madhubani to Mumbai via Delhi on GroundReport.in

अभिनेता धीरेंद्र ठाकुर, फाइल फोटो।

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Komal Badodekar | New Delhi/Mumbai

आज हम आपको पवन कुमार शर्मा के निर्देशन में बन रही अपकमिंग फिल्म वन रक्षक के फॉरेस्ट गार्ड चिरंजीलाल यानी एक्टर धीरेंद्र ठाकुर से मिलवाने जा रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्ट ने एक्टर धीरेंद्र ठाकुर से फोन पर विशेष साक्षात्कर कर उनके फिल्मी अनुभव से लेकर उनके संघर्ष तक की कहानी और जीवन में आए उतार चढ़ाव जैसे कई मुद्दों पर बातचीत की। यहां पढ़ें फिल्म वन रक्षक के मुख्य अभिनेता धीरेंद्र ठाकुर से साक्षात्कार के कुछ अंश…

एक डंडे के भरोसे पूरे जंगल की रक्षा करता है फॉरेस्ट गार्ड –
बीते लंबे समय से रंगमच की दुनिया से जुड़े पेशेवर बिजनेसमेन और एक्टर धीरेंद्र ठाकुर फिल्म वन रक्षक में चिरंजीलाल का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि, मैंने न सिर्फ चिरंजीलाल जैसे फॉरेस्ट गार्ड का किरदार निभाया बल्कि उस किरदार को जिया और जाना है कि एक फॉरेस्ट गार्ड की जिन्दगी कैसी होती है। हाथ में सिर्फ एक डंडा लेकर उसे पूरे जंगल की सुरक्षा करनी पड़ती है। इस दौरान उसका सामना कभी भी जंगली जानवर से हो सकता है या कभी भी शिकारियों से पाला पड़ सकता है। सच कहूं तो इस किरदार को मैंने बहुत इंजॉय किया।

इसके आगे चर्चा करते हुए धीरेंद्र ठाकुर बताते हैं कि, पूरी कहानी में चिरंजीलाल के तीन फेज़ हैं… पहली में वह स्कूल का एक छात्र है जो हर साल पर्यावरण दिवस पर सिर्फ एक ही जगह बार-बार पेड़ लगाए जाने से नाराज़ रहता है। वह सवाल पूछता है कि पिछले साल जो पेड़ लगाया था वो कहां गया। इसी व्यवहार के चलते उसे कॉलेज से भी निकाल दिया जाता है। इसके बाद वह एक जनरल स्टोर चलाता है लेकिन ग्लोबल वॉर्मिंग जैसी की खबरों को सुन फॉरेस्ट गार्ड बनता है ताकि जंगलों की रक्षा कर सके।

शूटिंग के दौरान चोटिल हुए खून बहता रहा लेकिन फिर भी दिया शॉट
फिल्म वन रक्षक की शूटिंग हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में होनी थी एक सीन की डिमांड के चलते किसी पहाड़ी पर शूट करना था। फिल्म की यूनिट सहित धीरेंद्र ठाकुर भी पहाड़ी चढ़ रहे थे। इस दौरान उन्होंने जिस टहनी को पकड़ा था वह टहनी उखड़ गई। अचानक उनका बैलेंस बिगड़ा और वे करीब 20 से 25 फुट गिरते-फिसलते नीचे आ गिरे। इस दौरान उन्हें पैर और सर में गंभीर चोटे आईं और लगातार खून बहता रहा। इसके बावजूद भी उन्होंने अपने आपको शॉट के लिए रेडी किया। शॉट देने के बाद पूरी यूनिट में ये किस्सा चर्चा का केंद्र बना रहा।

मील का पत्थर साबित होगी वन रक्षक –
इन दिनों रोमांस, धमाल कॉमेडी और एक्शन से भरपूर फिल्में अन्य फिल्मों के मुकाबले ज्यादा पॉपूलर होती हैं। ऐसे में लीग से हटकर किसी खास सामाजिक और जन सरोकार वाले मुद्दे पर फिल्म बनाना वाकई हिम्मत-ऐ-काबिल है। इस मामले में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए पूरे विश्वास के साथ धीरेंद्र ठाकुर कहते हैं, यह मुद्दा मानव जाति को विनाश से बचाने के लिए है। हर एक को प्रकृति सरंक्षण के लिए आगे आना होगा और ग्लोबल वॉर्मिंग की गंभिरताओं को लोगों तक पहुंचाना होगा। इस फिल्म में निर्देशक, एक्टर से लेकर स्पॉट बॉय ने जी जान से काम किया है। हमें पूरी उम्मीद है कि यह फिल्म समाज में मील का पत्थर साबित होगी।

मधुबनी के छोटे से गांव बासोपट्टी से मुंबई पहुंचने तक का संघर्ष भरा सफर –
संघर्ष के मामले में मैं कोई अनोखा व्यक्ति नहीं हूं। अन्य लोगों कि तरह मेरे जीवन में भी उतार-चढ़ाव आए हैं। बिहार का एक जिला मधुबनी। मधुबनी के एक छोटे से गांव बासोपट्टी में जन्म हुआ वहीं बचपन बीता। काम की तलाश में दिल्ली पहुंचा और इस दौरान रंगमंच से जुड़ने का मौका मिला। एक लंबे वक्त के बाद फिर दिल्ली से मुंबई के लिए कूच किया। संघर्ष के शुरूआती दिनों में आर्थिक तंगी से काफी कुछ सीखने को मिला। फिर सबसे बड़ी दिक्कत भाषा की रही। ये मेरे जैसे अन्य लोगों के साथ भी होता है, लेकिन हमेशा आगे बढ़ने के लिए अंदर से एक आवाज़ आती रही और शायद यही कारण है कि बिहार के एक छोटे से गांव बासोपट्टी से मैं मुंबई पहुंचा हूं। हांलाकि अभी एक लंबा सफर तय करना है।

थिएटर एक क्लास है और सिनेमा उसे खूबसूरती से पेश करता है –
एक सवाल के जवाब में धीरेंद्र ठाकुर कहते हैं कि, थिएटर और सिनेमा दोनों में ही ज़मीन-आसमान का अंतर है। हांलाकि थिएटर और सिनेमा दोनों में ही समय की बाध्यता है, लेकिन सिनेमा में आप अपने आपको ज्यादा बेहतर तरीके से एक्सप्लोर कर पाते हैं क्योंकि थिएटर में जो एक बार हो गया हो गया लेकिन सिनेमा में आपके पास रीटेक के लिए समय होता है। एक ही चीज को हम अलग-अलग तरीके से कर पाते हैं। थिएटर एक क्लास है और सिनेमा कैमरों के जरिए उन चीजों को बेहद खूबसूरती से लोगों के सामने पेश करती है।

फिलहाल खुद की तलाश में हूं –
एक अन्य सवाल के जवाब में धीरेंद्र ठाकुर कहते हैं, हम जो आज हैं वो हम नहीं हमारी परवरिश होती है। मां से प्रेरणा मिली और बचपन में दादा से कई बाते सीखने को मिली। यही प्रेरणा और सीख हमें सभ्य और डाउन टू अर्थ बनाती है। जिस सभ्य समाज से, जिस देश से, जिस मिट्टी से हम आते हैं वो खुद-ब-खुद हमें सभ्य और शालीन बनाती है। हमारे अनुभव भले ही खट्टे-मीठे हों लेकिन हमें व्यवहार कुशल होना चाहिए। हम सपने बुनते हैं, सपने पूरे करते हैं। फिलहाल मैं खुद की तलाश में हूं।

वन रक्षक को विशेष तौर पर वैश्विक पटल के हिसाब से किया जा रहा है तैयार –
आम तौर पर रोमांस, धमाल, कॉमेडी और एक्शन से भरपूर फिल्में सुर्खियों का हिस्सा रहती हैं लेकिन बेहद कम मौके होते हैं जब खास तौर पर किसी सामाजिक मुद्दे जैसे ‘ग्लोबल वॉर्मिंग और प्रकृति के सरंक्षण’ पर बन रही फिल्म की चर्चा हो। कुछ ऐसे ही मुद्दे पर बन रही फिल्म ‘वन रक्षक’ इन दिनों चर्चा में हैं। बता दें कि, पवन कुमार शर्मा के निर्देशन में बन रही फिल्म वन रक्षक की शूटिंग हिमाचल में पूरी हो चुकी है। इस फिल्म को विशेष तौर पर वैश्विक पटल यानी इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह फिल्म साल 2020 में सिनेमा घरों में रीलिज़ होगी।

क्या कहती है फिल्म की कहानी –
JMK एंटरटेनमेंट के बैनर तले बन रही फिल्म वन रक्षक को हिंदी और हिमाचली भाषा में तैयार किया जा रहा है। इस फिल्म की कहानी लेखक जितेंद्र गुप्ता ने लिखी है। इस फिल्म की एग्ज़िक्युटिव प्रोड्यूसर और चीफ असिस्टेंट डायरेक्टर स्वेता दत्त के मुताबिक, ग्लोबल वॉर्मिंग और प्रकृति को सहेजने का संदेश देती फिल्म ‘वन रक्षक’ चिरंजीलाल नामक फोरेस्ट गार्ड की कहानी है। चिरंजीलाल बचपन से ही अपनी धरती मां से प्रेम करने वाला एक शख्स है। ये फिल्म इसके मुख्य किरदार यानी चिरंजीलाल के इर्दगिर्द घूमती नजर आती है।

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