“जम्मू कश्मीर में इंटरनेट का इस्तेमाल गंदी फिल्में देखने में होता था” यह कहना है नीति आयोग के सदस्य का…

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विचार | पल्लव जैन

नेता तो नेता देश के नीति निर्धारक अफसर भी अगर बे-सिरपैर की बात करने लगें तो चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं। Indianexpress की रिपोर्ट के मुताबिक वी. के. सारस्वत जो नीति आयोग के सदस्य हैं, एक कार्यक्रम के दौरान रिपोर्टर्स के सवालों का जवाब देते हुए कहते हैं-

ये जितने पॉलिटिशियन कश्मीर जाना चाहते हैं, वो किस लिए जाना चाहते हैं? वो जैसे आंदोलन दिल्ली की सड़को पे हो रहा है, वो कश्मीर में सड़कों पर लाना चाहते हैं। और जो सोशल मीडिया है, वो उसको आग की तरह इस्तेमाल करता है। तो आपको वहां इंटरनेट न हो तो क्या अंतर पड़ता है? और वैसे भी आप वहां इंटरनेट में क्या देखते हैं? क्या ई-टेलिंग हो रहा वहाँ? वहां गंदी फिल्में देखने के अलावा कुछ नहीं करते आप लोग।

वी के सारस्वत, सदस्य, नीति आयोग

सारस्वत जी यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि इंटरनेट बंद होने की वजह से कश्मीर को कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है। जबकि कई रिपोर्ट्स यह दावा करती हैं कि इंटरनेट न होने की वजह से कश्मीर में कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान हुआ है।

नीति आयोग देश के लिए नीतियां बनाने का काम करता है। योजना आयोग को ध्वस्त कर प्रधानमंत्री मोदी ने नीति आयोग खड़ा किया और वहां वी के सारस्वत जैसे विद्वानों को बैठाया ताकि वे देश को दिशा दिखा सकें। लेकिन इन विद्वानों की सोच से पता चलता है कि ये तो खुद दिशाहीन हैं।

इंटरनेट की उपलब्धता सुप्रीम कोर्ट के अनुसार मौलिक अधिकार है। डिजिटल इंडिया प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार नये भारत की नींव तैयार करेगा। अब शिक्षा से लेकर व्यापार तक हर चीज़ में इंटरनेट अहम रोल अदा करता है। हाँ इंटरनेट का इस्तेमाल लोग गंदी फिल्में देखने में भी करते हैं तो क्या बाक़ी देश में भी इस आधार पर इंटरनेट बंद कर देंगे?

एक तरफ डिजिटल इंडिया के गुणगान दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर सरकार को विरोध का डर। गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर इन नीति निर्धारकों के पास कोई प्लान हो न हो बे सिरपैर की बात करने को बहुत समय है।

सरकार के मंत्रियों और नेताओं ने तो मानों हास्य सम्मेलन आयोजित किया हो.. कोई कहता है नोटों पर देवी लक्ष्मी की फोटो से गिरता रुपया उठ जाएगा, तो बढ़ती प्याज़ की कीमतों पर कोई कहता है ” मैं तो प्याज़ खाती नहीं मुझे क्या”। बमुश्किल देश में कोई बाहरी कंपनी आकर निवेश करती है तो मंत्री कह देते हैं “एहसान नहीं कर रहे”।

खैर तमाशा जारी है..देखने के सिवा आप कुछ कर सकते हैं?

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